होम / Tirth Sthal / अम्बिका देवी - शक्तिपीठ गुजरात | माँ सती के हृदय का पवित्र शक्तिपीठ

अम्बिका देवी अम्बाजी - गुजरात की अधिष्ठात्री दिव्य शक्तिपीठ

अम्बिका देवी गुजरात के बनासकांठा जिले में अम्बाजी नामक स्थान पर विराजमान 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ हैं। यहाँ माँ सती का हृदय गिरा था। माँ अम्बाजी गुजरात और राजस्थान के करोड़ों भक्तों की कुलदेवी हैं। श्री यंत्र स्वरूप में माँ की उपासना इस पीठ को अत्यंत विशेष बनाती है। माँ की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख शांति समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

51 शक्तिपीठ
📖

परिचय

अम्बिका देवी शक्तिपीठ गुजरात के बनासकांठा जिले में अम्बाजी नामक स्थान पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती का हृदय गिरा था। माँ अम्बाजी गुजरात और राजस्थान के करोड़ों भक्तों की कुलदेवी हैं।

Ambika Devi Shaktipeeth is situated at Ambaji in Banaskantha district of Gujarat. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's heart fell. Maa Ambaji is the Kuldevi of crores of devotees from Gujarat and Rajasthan.

अम्बिका देवी - शक्तिपीठ गुजरात | माँ सती के हृदय का पवित्र शक्तिपीठ

PDF

अम्बिका देवी - गुजरात की अधिष्ठात्री महाशक्तिपीठ

अम्बिका देवी शक्तिपीठ गुजरात राज्य के बनासकांठा जिले में अम्बाजी नामक स्थान पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का हृदय गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।

माँ अम्बिका देवी को गुजरात की अधिष्ठात्री देवी और माँ अम्बाजी के नाम से पूजा जाता है। गुजरात और राजस्थान दोनों राज्यों के करोड़ों भक्त माँ अम्बाजी को अपनी कुलदेवी मानते हैं। यह मंदिर गुजरात के सबसे प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है।

अम्बिका देवी मंदिर का इतिहास

अम्बिका देवी मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। इसका उल्लेख स्कंद पुराण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर से हुआ है जो अत्यंत भव्य और दिव्य लगता है। मंदिर के शिखर पर सोने का कलश स्थापित है।

अम्बिका देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. अम्बिका देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ अम्बिका की पवित्र यंत्र रूप में पूजा होती है। यहाँ कोई मूर्ति नहीं है बल्कि श्री यंत्र स्वरूप में माँ की उपासना होती है। यह अत्यंत दुर्लभ और विशेष परंपरा है।

2. गब्बर पर्वत
अम्बाजी से 4 किमी दूर गब्बर पर्वत स्थित है जहाँ माँ अम्बिका की प्राचीन गुफा है। यहाँ से आसपास के क्षेत्र का अद्भुत दृश्य दिखता है। रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है।

3. भैरव मंदिर
अम्बिका शक्तिपीठ के भैरव बटुक रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।

4. कोटेश्वर महादेव मंदिर
अम्बाजी के समीप कोटेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर भी दर्शनीय है।

5. अम्बाजी मेला
प्रतिवर्ष भाद्रपद पूर्णिमा पर अम्बाजी में विशाल मेला लगता है जिसमें लाखों भक्त भाग लेते हैं।

अम्बिका देवी की पूजा विधि

माँ अम्बिका देवी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती अम्बा स्तोत्र और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि और भाद्रपद पूर्णिमा के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।

अम्बिका देवी कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो अम्बाजी से 185 किमी दूर है।
रेलमार्ग: आबू रोड रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है जो अम्बाजी से 20 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: अहमदाबाद से 185 किमी, माउंट आबू से 45 किमी, उदयपुर से 160 किमी।

अम्बिका देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि और भाद्रपद पूर्णिमा के समय यहाँ लाखों भक्त माँ के दर्शन के लिए आते हैं। सुबह जल्दी दर्शन करने से भीड़ कम मिलती है।

अम्बिका देवी का धार्मिक महत्व

माँ अम्बिका देवी गुजरात और राजस्थान के करोड़ों भक्तों की कुलदेवी हैं। यहाँ श्री यंत्र स्वरूप में माँ की पूजा होती है जो अत्यंत दुर्लभ और विशेष है। माँ की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।