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द्वारका धाम - भगवान कृष्ण की स्वर्णनगरी

द्वारका धाम चार धाम में से एक और भगवान कृष्ण की राजधानी है। यह गुजरात राज्य में अरब सागर के तट पर स्थित है। द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है और सप्त पुरी में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़कर यहां अपनी नई राजधानी बसाई थी। द्वारका शब्द का अर्थ है द्वार या प्रवेश द्वार - मोक्ष का द्वार। मंदिर 2,500 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है। द्वारकाधीश मंदिर 5 मंजिला है और 72 स्तंभों पर खड़ा है। मंदिर के शिखर पर 52 गज ऊंचा ध्वज लहराता है। बेट द्वारका (द्वीप) समुद्र में 30 किमी दूर है जहां कृष्ण का महल था। गोमती घाट पवित्र स्नान स्थल है। द्वारका प्राचीन सभ्यता और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है।

चार धाम प्रसिद्ध मंदिर
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परिचय

द्वारका धाम गुजरात में अरब सागर के तट पर स्थित है। यह चार धाम और सप्त पुरी में से एक है। भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़कर यहां अपनी राजधानी बसाई थी। द्वारकाधीश मंदिर 2,500 वर्ष पुराना है और 5 मंजिला संरचना है। मंदिर 72 स्तंभों पर खड़ा है और शिखर पर 52 गज ऊंचा ध्वज लहराता है। बेट द्वारका (द्वीप) समुद्र में 30 किमी दूर है जहां कृष्ण का महल था। गोमती घाट में स्नान पवित्र माना जाता है। रुक्मिणी मंदिर भी पास में है। द्वारका में जन्माष्टमी का भव्य आयोजन होता है।

Dwarka Dham is located on the coast of Arabian Sea in Gujarat. It is one of the Char Dham and Sapta Puri. Lord Krishna left Mathura and established his capital here. Dwarkadhish temple is 2,500 years old and is a 5-story structure. The temple stands on 72 pillars and a 52-yard high flag flies on the spire. Bet Dwarka (island) is 30 km away in the sea where Krishna's palace was. Bathing in Gomti Ghat is considered sacred. Rukmini temple is also nearby. Janmashtami is celebrated grandly in Dwarka.

द्वारका धाम | भगवान कृष्ण की राजधानी - चार धाम यात्रा

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🙏 द्वारका धाम 🙏

**द्वारका धाम का परिचय:**

द्वारका धाम भारत के **चार धाम** में से एक है। यह गुजरात राज्य में अरब सागर के तट पर स्थित है।

"द्वारका" का अर्थ है "द्वार" - मोक्ष का प्रवेश द्वार।

**चार धाम में स्थान:**
१. बद्रीनाथ - उत्तर (विष्णु)
२. **द्वारका - पश्चिम (कृष्ण)**
३. जगन्नाथ पुरी - पूर्व (जगन्नाथ)
४. रामेश्वरम् - दक्षिण (शिव)

**विशेष महत्व:**

- **चार धाम में द्वितीय**
- **भगवान कृष्ण** की राजधानी
- **सप्त पुरी** में से एक
- **द्वारकाधीश मंदिर** - 2,500 वर्ष पुराना
- **बेट द्वारका** - समुद्र में द्वीप
- **गोमती नदी** का संगम

**भौगोलिक स्थिति:**

- **राज्य:** गुजरात
- **समुद्र:** अरब सागर
- **नदी:** गोमती नदी
- **अहमदाबाद से:** 440 किमी
- **राजकोट से:** 220 किमी

**द्वारका की कथा:**

**कंस वध के बाद:**

भगवान कृष्ण ने मथुरा में अपने मामा कंस का वध किया। कंस के ससुर **जरासंध** (मगध के राजा) ने मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया।

**द्वारका की स्थापना:**

कृष्ण ने निर्णय लिया कि मथुरा छोड़कर नई राजधानी बनाई जाए। उन्होंने समुद्र तट पर एक सुंदर स्थान चुना।

भगवान कृष्ण ने समुद्र के देवता से भूमि मांगी। समुद्र ने 12 योजन (लगभग 96 किमी) भूमि दे दी।

**विश्वकर्मा का निर्माण:**

देवताओं के शिल्पकार **विश्वकर्मा** ने द्वारका नगरी का निर्माण किया। यह अत्यंत सुंदर और भव्य नगरी थी।

द्वारका में:
- सोने के महल
- चौड़ी सड़कें
- सुंदर उद्यान
- विशाल द्वार
- समुद्री बंदरगाह

**कृष्ण का शासन:**

भगवान कृष्ण ने द्वारका से अपना शासन चलाया। यहां से उन्होंने महाभारत युद्ध में पांडवों की सहायता की।

**द्वारका का समुद्र में समाना:**

महाभारत युद्ध के 36 वर्ष बाद यादव वंश में आपसी युद्ध हुआ। भगवान कृष्ण ने देह त्याग दिया।

कृष्ण की इच्छा से **द्वारका नगरी समुद्र में समा गई**। केवल मंदिर बचा रहा।

**आधुनिक खोज:**

1980-90 के दशक में समुद्री पुरातत्वविदों ने समुद्र में प्राचीन द्वारका के अवशेष खोजे हैं।

**द्वारकाधीश मंदिर:**

**मंदिर का इतिहास:**

- **स्थापना:** भगवान कृष्ण के समय (द्वापर युग)
- **पुनर्निर्माण:** आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी)
- **आयु:** 2,500 वर्ष से अधिक पुराना

**मंदिर की वास्तुकला:**

**संरचना:**
- **5 मंजिला** इमारत
- **72 स्तंभों** पर खड़ा
- **60 स्तंभ** गर्भगृह को सहारा देते हैं
- **शिखर:** 78.3 मीटर ऊंचा
- **ध्वज:** 52 गज (47 मीटर) ऊंचा

**मुख्य मूर्ति:**
- भगवान द्वारकाधीश (कृष्ण)
- काले रंग की मूर्ति
- चार भुजाओं वाली
- शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए

**अन्य देवता:**
- राधा
- रुक्मिणी
- जामवंती
- सत्यभामा
- बलराम

**गोमती घाट:**

द्वारकाधीश मंदिर के सामने **गोमती नदी** और **अरब सागर** का संगम है।

**गोमती घाट:**
- 56 सीढ़ियां
- पवित्र स्नान स्थल
- संगम पर स्नान अत्यंत पुण्यदायी
- सूर्यास्त का दृश्य मनमोहक

**बेट द्वारका:**

समुद्र में **30 किमी** दूर **बेट द्वारका** द्वीप है।

**विशेषता:**
- यहां कृष्ण का महल था
- प्राचीन मंदिर
- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग पास में (17 किमी)

**कैसे जाएं:**
- द्वारका से ओखा बंदरगाह (30 किमी)
- ओखा से नाव/फेरी (30 मिनट)

**रुक्मिणी मंदिर:**

द्वारका से 2 किमी दूर **रुक्मिणी मंदिर** है।

**कथा:**
रुक्मिणी कृष्ण की पटरानी थी। एक बार ऋषि दुर्वासा के श्राप से रुक्मिणी यहां रह गईं।

**द्वारका धाम की महिमा:**

१. **चार धाम** में से एक
२. **सप्त पुरी** में से एक
३. **कृष्ण की राजधानी**
४. **2,500 वर्ष पुराना** मंदिर
५. **गोमती संगम**
६. **मोक्ष का द्वार**

**दर्शन का समय:**

**मंदिर खुलने का समय:**
- **प्रातः:** 6:30 AM से 1:00 PM
- **सायं:** 5:00 PM से 9:30 PM

**आरती समय:**
- मंगला आरती: 6:30 AM
- श्रृंगार आरती: 10:30 AM
- संध्या आरती: 7:00 PM
- शयन आरती: 9:00 PM

**प्रमुख त्योहार:**
- **जन्माष्टमी** - भव्य उत्सव
- **होली**
- **दीपावली**

**द्वारका कैसे पहुंचें:**

**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **जामनगर** (137 किमी)
- **राजकोट** (220 किमी)

**रेल मार्ग:**
- **द्वारका रेलवे स्टेशन** - शहर में ही
- अहमदाबाद, मुंबई से सीधी ट्रेनें

**सड़क मार्ग:**
- अहमदाबाद से: 440 किमी
- राजकोट से: 220 किमी
- नियमित बस सेवा

**ठहरने की व्यवस्था:**

- द्वारका में कई होटल
- गेस्ट हाउस
- धर्मशालाएं
- गुजरात पर्यटन के होटल

**आसपास के दर्शनीय स्थल:**

१. **बेट द्वारका** (30 किमी)
२. **नागेश्वर ज्योतिर्लिंग** (17 किमी)
३. **गोपी तालाब**
④. **रुक्मिणी मंदिर** (2 किमी)
५. **दुर्गा मंदिर**
६. **समुद्र नारायण मंदिर**
७. **सुदामा सेतु** - पुल
८. **सोमनाथ** (225 किमी)

**विशेष जानकारी:**

- गोमती घाट में स्नान करें
- बेट द्वारका अवश्य जाएं
- रुक्मिणी मंदिर दर्शन करें
- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जाएं
- सुबह जल्दी दर्शन करें
- प्रसाद - मक्खन मिश्री
- समुद्री भोजन उपलब्ध
- गुजराती थाली स्वादिष्ट

**यात्रा का सर्वोत्तम समय:**

- **अक्टूबर से मार्च** - सबसे अच्छा
- **जन्माष्टमी** - विशेष उत्सव
- **गर्मियों में** बहुत गर्मी

**महत्वपूर्ण तथ्य:**

- चार धाम में द्वितीय
- सप्त पुरी में से एक
- कृष्ण की राजधानी
- 2,500 वर्ष पुराना मंदिर
- 5 मंजिला संरचना
- 72 स्तंभों पर
- 52 गज ऊंचा ध्वज
- गोमती-सागर संगम

🙏 हरे कृष्ण 🙏
🙏 जय द्वारकाधीश 🙏
🙏 राधे राधे 🙏