परिचय
Katyayani Devi Temple is situated in Vrindavan, Uttar Pradesh. It is one of the 5 Siddha Peeths where Goddess Sati's hair fell. Maa Katyayani is the sixth Navdurga and the presiding deity of Braj Bhoomi. The Gopis worshipped Maa Katyayani here to get Lord Krishna as their husband.
कात्यायनी देवी - सिद्ध पीठ वृंदावन | ब्रज की अधिष्ठात्री देवी
कात्यायनी देवी - ब्रज भूमि की दिव्य सिद्ध शक्तिपीठ
कात्यायनी देवी मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में वृंदावन में भूतेश्वर महादेव मंदिर के समीप छटीकरा नामक स्थान पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक और 5 सिद्ध पीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती के केश गिरे थे इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
माँ कात्यायनी नवदुर्गा के नौ स्वरूपों में षष्ठी देवी हैं। माँ कात्यायनी की उपासना नवरात्रि के छठे दिन विशेष रूप से की जाती है। माँ कात्यायनी को विवाह और सौभाग्य की देवी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए माँ कात्यायनी की उपासना की थी।
कात्यायनी देवी मंदिर का इतिहास
कात्यायनी देवी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसका उल्लेख भागवत पुराण में मिलता है जहाँ गोपियों द्वारा माँ कात्यायनी की उपासना का वर्णन है। यह मंदिर ब्रज के 84 कोस परिक्रमा मार्ग पर स्थित है। मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी है।
कात्यायनी देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. कात्यायनी देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ कात्यायनी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और करुणामयी है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है। विवाह की इच्छुक कन्याएँ यहाँ विशेष पूजा करती हैं।
2. भैरव मंदिर
कात्यायनी शक्तिपीठ के भैरव क्रोधीश रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
3. वृंदावन के प्रमुख मंदिर
कात्यायनी मंदिर के समीप वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर राधारमण मंदिर इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर दर्शनीय हैं। एक ही यात्रा में शक्तिपीठ और कृष्ण भक्ति दोनों का अद्भुत संगम मिलता है।
4. यमुना नदी
वृंदावन में यमुना नदी के घाटों पर स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। केशी घाट पर संध्या आरती का दृश्य अत्यंत मनोरम होता है।
5. ब्रज 84 कोस परिक्रमा
कात्यायनी मंदिर ब्रज के 84 कोस परिक्रमा मार्ग पर स्थित है। इस परिक्रमा में ब्रज के सभी प्रमुख तीर्थों के दर्शन होते हैं।
कात्यायनी देवी की पूजा विधि
माँ कात्यायनी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और शहद का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती कात्यायनी स्तोत्र और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि के छठे दिन यहाँ विशेष पूजा का आयोजन होता है। विवाह की इच्छा रखने वाली कन्याएँ माँ की विशेष कृपा प्राप्त करती हैं।
कात्यायनी देवी कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: आगरा हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो वृंदावन से 65 किमी दूर है।
रेलमार्ग: मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन वृंदावन से 12 किमी दूर है और देशभर से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: मथुरा से 12 किमी, आगरा से 65 किमी, दिल्ली से 145 किमी।
कात्यायनी देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि के छठे दिन जन्माष्टमी होली और राधाष्टमी के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। ब्रज की होली विश्वप्रसिद्ध है और फाल्गुन माह में यहाँ विशेष आनंद आता है।
कात्यायनी देवी का धार्मिक महत्व
माँ कात्यायनी को ब्रज भूमि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए माँ कात्यायनी की उपासना की थी इसीलिए विवाह की इच्छा रखने वाली कन्याओं के लिए माँ की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। माँ कात्यायनी की कृपा से भक्तों को शक्ति साहस और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।