परिचय
Rameshwaram Jyotirlinga is located on Rameshwaram island in Tamil Nadu. It is the eleventh Jyotirlinga of Lord Shiva and one of the Char Dham. According to mythology, Lord Rama established Shivling here after killing Ravana to get rid of the sin of Brahma Hatya. The temple has two Shivlings - Ramalingam (made of sand) and Vishwalingam (from Kashi). The temple corridors are the longest in the world. Bathing in 22 sacred kunds is very auspicious. Ram Setu (Adam's Bridge) is also visible from here. It is an excellent example of Dravidian architecture.
रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग | भगवान राम द्वारा स्थापित चार धाम
**रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग का परिचय:**
रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग है। यह तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम् द्वीप पर स्थित है।
"रामेश्वरम्" का अर्थ है "राम के ईश्वर" - भगवान राम के आराध्य भगवान शिव।
**विशेष महत्व:**
- **चार धाम में से एक** - बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी, रामेश्वरम्
- **राम द्वारा स्थापित**
- **दो शिवलिंग** - रामलिंगम और विश्वलिंगम
- **22 पवित्र कुंड**
- **विश्व के सबसे लंबे मंदिर गलियारे**
- **राम सेतु के पास**
**भौगोलिक स्थिति:**
- **राज्य:** तमिलनाडु
- **द्वीप:** रामेश्वरम् द्वीप (पंबन द्वीप)
- **समुद्र:** बंगाल की खाड़ी और मन्नार की खाड़ी के बीच
- **मदुरै से दूरी:** 170 किमी
- **चेन्नई से दूरी:** 570 किमी
**रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की कथा:**
**रावण वध और ब्रह्म हत्या:**
रामायण के अनुसार, भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था। रावण महान विद्वान और ब्राह्मण था।
राम को ब्रह्म हत्या (ब्राह्मण की हत्या) का पाप लग गया। इस पाप से मुक्ति के लिए राम को शिवलिंग की स्थापना और पूजा करनी थी।
**ऋषियों की सलाह:**
ऋषियों ने राम से कहा:
"हे प्रभु! आपको भगवान शिव की पूजा करनी होगी। काशी से शिवलिंग लाकर यहां स्थापित करें और पूजा करें।"
**हनुमान को भेजना:**
राम ने हनुमान को काशी से शिवलिंग लाने के लिए भेजा। हनुमान तुरंत काशी की ओर उड़ गए।
लेकिन शुभ मुहूर्त नजदीक आ रहा था और हनुमान अभी तक वापस नहीं आए थे।
**सीता द्वारा शिवलिंग निर्माण:**
राम चिंतित थे। माता सीता ने कहा:
"प्रभु! मैं बालू (रेत) से शिवलिंग बनाती हूं। शुभ मुहूर्त निकल न जाए।"
सीता ने समुद्र तट की बालू से एक शिवलिंग बनाया। राम ने उसी शिवलिंग की पूजा की।
इस शिवलिंग को **रामलिंगम** कहा गया।
**हनुमान का आना:**
कुछ समय बाद हनुमान काशी से शिवलिंग लेकर वापस आए। जब उन्होंने देखा कि राम ने पहले ही दूसरे शिवलिंग की पूजा कर ली है तो वे बहुत दुखी हुए।
हनुमान ने सोचा कि उनकी सेवा व्यर्थ हो गई।
**राम का समाधान:**
राम ने हनुमान को समझाया:
"हे हनुमान! तुम्हारी सेवा व्यर्थ नहीं हुई। तुम जो शिवलिंग लाए हो, वह भी यहीं स्थापित होगा।"
राम ने हनुमान द्वारा लाए गए शिवलिंग को भी स्थापित किया। इसे **विश्वलिंगम** या **काशी विश्वनाथ लिंगम** कहा गया।
**दोनों शिवलिंग की महत्ता:**
राम ने घोषणा की:
"विश्वलिंगम को पहले पूजा जाएगा, फिर रामलिंगम को। दोनों का समान महत्व है।"
आज भी मंदिर में पहले विश्वलिंगम की पूजा होती है, फिर रामलिंगम की।
**ज्योतिर्लिंग की स्थापना:**
भगवान शिव राम की भक्ति से प्रसन्न हुए और रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां सदा के लिए स्थापित हो गए।
**मंदिर का इतिहास:**
**प्राचीन काल:**
- रामायण काल से
- त्रेता युग की स्थापना
**चोल राजवंश (11वीं-13वीं शताब्दी):**
- मंदिर का विस्तार
**पांड्य राजवंश (13वीं-16वीं शताब्दी):**
- विशाल गलियारों का निर्माण
**नायक राजवंश (16वीं-17वीं शताब्दी):**
- मंदिर का अंतिम रूप
**सेतुपति राजा:**
- संरक्षण और विकास
**मंदिर की वास्तुकला:**
द्रविड़ स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट नमूना।
**विशाल गलियारे:**
- **पूर्वी गलियारा:** 197 मीटर
- **उत्तरी गलियारा:** 225 मीटर
- **पश्चिमी गलियारा:** 224 मीटर
- **दक्षिणी गलियारा:** 206 मीटर
- विश्व के सबसे लंबे मंदिर गलियारे
- 1212 विशाल स्तंभ
**गोपुरम:**
- 9 भव्य गोपुरम (प्रवेश द्वार)
- सुंदर नक्काशी
**22 पवित्र कुंड (तीर्थ):**
मंदिर में 22 पवित्र कुंड हैं। प्रत्येक कुंड में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
**प्रमुख कुंड:**
१. महालक्ष्मी तीर्थ
२. सावित्री तीर्थ
३. गायत्री तीर्थ
४. सरस्वती तीर्थ
५. सेतु माधव तीर्थ
और 17 अन्य...
**परंपरा:**
भक्त सभी 22 कुंडों में स्नान करते हैं। मंदिर के पंडे कुंडों से जल लाकर भक्तों पर डालते हैं।
**रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की महिमा:**
१. **चार धाम** - मोक्ष यात्रा का हिस्सा
२. **राम द्वारा स्थापित**
३. **दो शिवलिंग** - रामलिंगम और विश्वलिंगम
४. **22 पवित्र कुंड**
५. **विश्व के सबसे लंबे गलियारे**
६. **राम सेतु** - यहां से दिखाई देता है
**पूजा और दर्शन का समय:**
**मंदिर खुलने का समय:**
- **सुबह:** 5:00 AM से दोपहर 1:00 PM
- **शाम:** 3:00 PM से रात 9:00 PM
**आरती समय:**
- प्रातः आरती: 5:30 AM
- संध्या आरती: 8:00 PM
**प्रमुख त्योहार:**
- **महाशिवरात्रि**
- **राम नवमी**
- **कार्तिक पूर्णिमा**
**रामेश्वरम् कैसे पहुंचें:**
**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **मदुरै** (170 किमी)
**रेल मार्ग:**
- **रामेश्वरम् रेलवे स्टेशन** - द्वीप पर ही
**सड़क मार्ग:**
- मदुरै से: 170 किमी
- **पंबन ब्रिज** - रेल और सड़क पुल
**ठहरने की व्यवस्था:**
- रामेश्वरम् में होटल
- धर्मशालाएं
- तमिलनाडु पर्यटन
**आसपास के दर्शनीय स्थल:**
१. **राम सेतु (एडम ब्रिज)** - धनुषकोडी से दिखता है
२. **धनुषकोडी** - भूत नगर
३. **पंबन ब्रिज** - प्रसिद्ध पुल
४. **अग्नि तीर्थम** - समुद्र तट
५. **गांधी स्मारक**
६. **कोठंडरामस्वामी मंदिर**
७. **मदुरै** - मीनाक्षी मंदिर
**विशेष जानकारी:**
- 22 कुंडों में स्नान की व्यवस्था
- पंडे जल डालने की सेवा देते हैं
- उचित पोशाक अनिवार्य
- गलियारों में चलना दिव्य अनुभव
- राम सेतु देखना न भूलें
- धनुषकोडी अवश्य जाएं
**यात्रा का सर्वोत्तम समय:**
- **अक्टूबर से अप्रैल** - मौसम अच्छा
- **महाशिवरात्रि** - विशेष दर्शन
- **गर्मियों में** बहुत गर्मी
**महत्वपूर्ण तथ्य:**
- ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग
- चार धाम में से एक
- राम द्वारा स्थापित
- दो शिवलिंग (रामलिंगम, विश्वलिंगम)
- 22 पवित्र कुंड
- विश्व के सबसे लंबे मंदिर गलियारे
- राम सेतु के पास
🙏 हर हर महादेव 🙏
🙏 जय रामेश्वरम् 🙏
🙏 जय श्री राम 🙏