परिचय
Golden Temple is holiest Sikh gurdwara. In Amritsar, Punjab. In middle of sarovar. Gold plated. Guru Ramdas ji excavated sarovar in 1577. Guru Arjan Dev built temple in 1604. Maharaja Ranjit Singh gold plated in 1830. Guru Granth Sahib enshrined. Langar feeds 100,000 daily. Open to all religions. Four doors. Amrit Sarovar sacred.
गोल्डन टेम्पल | हरमंदिर साहिब की स्थापना और स्वर्ण गुरुद्वारा
**गोल्डन टेम्पल का परिचय:**
गोल्डन टेम्पल (**हरमंदिर साहिब** या **दरबार साहिब**) **सिखों का सबसे पवित्र गुरुद्वारा** है।
**स्थान:**
- **राज्य:** पंजाब
- **शहर:** अमृतसर
- **दिल्ली से:** 450 किमी
**नाम:**
- **हरमंदिर साहिब** = भगवान का मंदिर
- **दरबार साहिब** = दरबार
- **गोल्डन टेम्पल** = सोने का मंदिर (अंग्रेजी नाम)
**गोल्डन टेम्पल की स्थापना कथा:**
**गुरु रामदास जी (चौथे गुरु):**
**1577 में** गुरु **रामदास जी** ने **अमृतसर** शहर की स्थापना की।
उन्होंने एक **सरोवर (तालाब)** खुदवाया। इस सरोवर को **अमृत सरोवर** कहा गया क्योंकि इसका जल **अमृत की तरह पवित्र** माना गया।
"अमृतसर" नाम इसी सरोवर से पड़ा।
**गुरु अर्जन देव जी (पांचवे गुरु):**
**1588 में** गुरु **अर्जन देव जी** (गुरु रामदास के पुत्र) सिखों के पांचवें गुरु बने।
**1604 में** उन्होंने **अमृत सरोवर के बीच** में मंदिर बनवाया। इसे **हरमंदिर साहिब** कहा गया।
**विशेषता:**
गुरु अर्जन देव जी ने मंदिर में **चार दरवाजे** बनवाए - **चारों दिशाओं** में। यह प्रतीक है कि:
"यह स्थान **सभी जातियों, धर्मों और समुदायों** के लिए खुला है।"
**मियां मीर का पत्थर:**
मंदिर की **नींव** का पहला पत्थर एक **सूफी संत मियां मीर** ने रखा। यह **हिंदू-मुस्लिम-सिख एकता** का प्रतीक था।
**गुरु ग्रंथ साहिब:**
गुरु अर्जन देव ने **गुरु ग्रंथ साहिब** (सिखों का पवित्र ग्रंथ) को यहां स्थापित किया।
**सोने की परत:**
**मूल मंदिर** सोने का नहीं था। **1830 में** महाराजा **रणजीत सिंह** ने मंदिर के ऊपरी हिस्से को **750 किलो सोने** से मढ़वाया।
तभी से इसे **गोल्डन टेम्पल** कहा जाने लगा।
**मंदिर की वास्तुकला:**
**सरोवर के बीच:**
मंदिर **अमृत सरोवर के बीच** में बना है। मंदिर तक पहुंचने के लिए एक **पुल** है।
**चार दरवाजे:**
मंदिर में **चार प्रवेश द्वार** हैं:
- **पूर्व** - उत्तर भारत के लोगों के लिए
- **पश्चिम** - पश्चिम के लोगों के लिए
- **उत्तर** - उत्तर के लोगों के लिए
- **दक्षिण** - दक्षिण के लोगों के लिए
**सोने का गुंबद:**
- मंदिर का **ऊपरी भाग सोने** से मढ़ा
- **कमल के आकार** का गुंबद
- सूर्य की रोशनी में चमकता है
**संगमरमर:**
- निचला भाग **संगमरमर** का
- सुंदर नक्काशी
**गुरु ग्रंथ साहिब:**
मंदिर के अंदर **गुरु ग्रंथ साहिब** (सिखों का पवित्र ग्रंथ) विराजमान है।
**दिन में:**
- सुबह **अमृत वेला** में गुरु ग्रंथ साहिब को मंदिर में लाया जाता है
- रात में **सुखासन** (विश्राम) के लिए **अकाल तख्त** ले जाया जाता है
**लंगर (मुफ्त भोजन):**
गोल्डन टेम्पल में **विश्व का सबसे बड़ा लंगर** चलता है।
**लंगर की विशेषताएं:**
- प्रतिदिन **100,000+ लोगों** को मुफ्त भोजन
- **24 घंटे** चालू
- **सभी** को समान भोजन - अमीर-गरीब, हिंदू-मुस्लिम-सिख
- **जमीन पर बैठकर** सभी साथ खाते हैं (समानता का प्रतीक)
**भोजन:**
- शाकाहारी
- रोटी, दाल, सब्जी, खीर
**विशेष परंपराएं:**
**1. सिर ढकना:**
मंदिर में प्रवेश से पहले सिर ढकना अनिवार्य (पुरुष-महिला दोनों)।
**2. जूते उतारना:**
मंदिर परिसर में जूते उतारने होते हैं।
**3. सरोवर में स्नान:**
श्रद्धालु **अमृत सरोवर** में स्नान करते हैं। यह अत्यंत पवित्र माना जाता है।
**समय:**
- **24 घंटे खुला**
- **गर्मी:** 3:00 AM - 10:00 PM (मंदिर के अंदर)
- **सर्दी:** 4:00 AM - 9:00 PM
**त्योहार:**
- **गुरपुरब** - गुरुओं के जन्मदिन
- **बैसाखी** - खालसा पंथ की स्थापना
- **दिवाली** - सिखों का महत्वपूर्ण त्योहार
- **लोहड़ी**
**गोल्डन टेम्पल कैसे पहुंचें:**
**हवाई मार्ग:**
- **अमृतसर हवाई अड्डा** (10 किमी)
**रेल मार्ग:**
- **अमृतसर रेलवे स्टेशन** (2 किमी)
**सड़क मार्ग:**
- दिल्ली से: 450 किमी
- चंडीगढ़ से: 230 किमी
**ठहरने की व्यवस्था:**
- गुरुद्वारे में **मुफ्त निवास**
- बाहर होटल
**महत्वपूर्ण तथ्य:**
- सिखों का सबसे पवित्र गुरुद्वारा
- 1577 - गुरु रामदास ने सरोवर
- 1604 - गुरु अर्जन देव ने मंदिर
- 1830 - रणजीत सिंह ने सोने की परत
- सरोवर के बीच में
- चार दरवाजे - सभी के लिए खुला
- गुरु ग्रंथ साहिब विराजमान
- विश्व का सबसे बड़ा लंगर
- 100,000+ लोगों को दैनिक भोजन
- 24 घंटे खुला
🙏 वाहे गुरु जी का खालसा 🙏
🙏 वाहे गुरु जी की फतेह 🙏