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कर्णप्रयाग - अलकनंदा और पिंडर का पवित्र संगम

कर्णप्रयाग पंच प्रयाग में तीसरा संगम है। यह उत्तराखंड के चमोली जिले में 840 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां अलकनंदा नदी और पिंडर नदी का संगम होता है। कर्णप्रयाग का नाम महाभारत के दानवीर कर्ण के नाम पर है। मान्यता है कि कर्ण ने यहां सूर्य की उपासना की थी और अपना कवच-कुंडल दान दिया था। संगम स्थल पर उमा देवी मंदिर है। कर्णप्रयाग एक छोटा शहर है और बद्रीनाथ-केदारनाथ दोनों मार्गों का जंक्शन है। यहां से केदारनाथ जाने का मार्ग अलग होता है। पिंडर नदी पिंडारी ग्लेशियर से निकलती है।

पंच प्रयाग पवित्र नदियां
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परिचय

कर्णप्रयाग उत्तराखंड के चमोली जिले में 840 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पंच प्रयाग में तीसरा संगम है। यहां अलकनंदा और पिंडर नदी का मिलन होता है। पिंडर नदी पिंडारी ग्लेशियर से निकलती है। महाभारत के कर्ण ने यहां सूर्य की उपासना की थी, इसलिए कर्णप्रयाग नाम पड़ा। संगम पर उमा देवी का मंदिर है। यह बद्रीनाथ-केदारनाथ मार्गों का जंक्शन है। एक छोटा शहर है जहां से केदारनाथ का मार्ग अलग होता है।

Karnaprayag is located at 840 meters in Chamoli district of Uttarakhand. It is the third confluence in Panch Prayag. Here Alaknanda and Pindar rivers meet. Pindar originates from Pindari Glacier. Karna from Mahabharata worshipped Surya here, hence the name Karnaprayag. Uma Devi temple is at the confluence. It is the junction of Badrinath-Kedarnath routes. A small town from where Kedarnath route separates.

कर्णप्रयाग | अलकनंदा-पिंडर संगम - पंच प्रयाग

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🙏 कर्णप्रयाग 🙏

**कर्णप्रयाग का परिचय:**

कर्णप्रयाग **पंच प्रयाग** में तीसरा संगम है।

**नदियों का संगम:**
- **अलकनंदा** नदी
- **पिंडर** नदी

**पिंडर नदी:**
- **पिंडारी ग्लेशियर** से निकलती है
- बागेश्वर जिले से बहती है
- पिंडर घाटी से होकर आती है

**भौगोलिक स्थिति:**

- **राज्य:** उत्तराखंड
- **जिला:** चमोली
- **ऊंचाई:** 840 मीटर (2,756 फीट)
- **रुद्रप्रयाग से:** 32 किमी
- **जोशीमठ से:** 110 किमी

**कर्णप्रयाग की कथा:**

**महाभारत का कर्ण:**

महाभारत के महान योद्धा **कर्ण** (दानवीर कर्ण) ने यहां **सूर्य देव** की उपासना की थी।

**कवच-कुंडल का दान:**

कर्ण जन्म से **कवच-कुंडल** धारण किए हुए थे जो उन्हें अजेय बनाते थे।

महाभारत युद्ध से पहले **इंद्र** ब्राह्मण का वेश धारण कर कर्ण से कवच-कुंडल मांगने आए।

कर्ण ने यहीं **कर्णप्रयाग** में अपना **कवच-कुंडल दान** कर दिया। इसी दानवीरता के कारण इस स्थान का नाम कर्णप्रयाग पड़ा।

**उमा देवी मंदिर:**

संगम स्थल पर **उमा देवी** (माता पार्वती) का प्राचीन मंदिर है।

**मंदिर विशेषता:**
- प्राचीन मंदिर
- संगम के किनारे
- स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र

**कर्णप्रयाग शहर:**

कर्णप्रयाग एक छोटा शहर है जो **महत्वपूर्ण जंक्शन** है।

**जंक्शन:**
- यहां से **केदारनाथ** जाने का मार्ग अलग होता है
- **बद्रीनाथ** के लिए सीधा मार्ग
- दोनों धामों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव

**सुविधाएं:**
- होटल और गेस्ट हाउस
- बाजार
- पेट्रोल पंप
- अस्पताल
- बैंक और ATM

**कर्णप्रयाग की महिमा:**

१. **पंच प्रयाग में तृतीय**
२. **कर्ण की तपोभूमि**
३. **कवच-कुंडल दान स्थल**
④. **उमा देवी मंदिर**
⑤. **बद्रीनाथ-केदारनाथ जंक्शन**
⑥. **महत्वपूर्ण पड़ाव**

**स्नान का महत्व:**

कर्णप्रयाग में स्नान करने से:
- पापों का नाश
- दान का पुण्य
- कर्ण का आशीर्वाद
- पितरों की शांति

**कर्णप्रयाग कैसे पहुंचें:**

**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **देहरादून** (240 किमी)

**रेल मार्ग:**
- निकटतम स्टेशन: **ऋषिकेश** (220 किमी)

**सड़क मार्ग:**
- ऋषिकेश → देवप्रयाग → रुद्रप्रयाग → **कर्णप्रयाग**
- बद्रीनाथ/केदारनाथ जाते समय यहां से होकर जाना पड़ता है

**ठहरने की व्यवस्था:**

**कर्णप्रयाग में:**
- कई होटल और लॉज
- गेस्ट हाउस
- धर्मशालाएं
- GMVN टूरिस्ट रेस्ट हाउस

**आसपास के दर्शनीय स्थल:**

१. **उमा देवी मंदिर** - संगम पर
२. **आदि बद्री** (17 किमी) - 16 प्राचीन मंदिर
३. **नृसिंह मंदिर** - पास में
④. **गरुड़ गंगा संगम** - 5 किमी
⑤. **केदारनाथ मार्ग** - यहां से शुरू

**विशेष जानकारी:**

- बद्रीनाथ/केदारनाथ जाने का मुख्य पड़ाव
- यहां ठहर सकते हैं
- संगम दर्शन करें
- उमा देवी मंदिर में पूजा करें
- पिंडर नदी का पानी स्वच्छ
- शहर में सभी सुविधाएं
- पेट्रोल पंप उपलब्ध
- बैंक और ATM हैं

**यात्रा का सर्वोत्तम समय:**

- **अप्रैल-जून:** धाम खुलने के बाद
- **सितंबर-नवंबर:** सबसे अच्छा मौसम
- **जुलाई-अगस्त:** बारिश (सावधानी)
- **दिसंबर-मार्च:** ठंड, बर्फबारी

**महत्वपूर्ण तथ्य:**

- पंच प्रयाग में तीसरा
- 840 मीटर की ऊंचाई
- अलकनंदा + पिंडर
- कर्ण की तपोभूमि
- कवच-कुंडल दान स्थल
- उमा देवी मंदिर
- बद्रीनाथ-केदारनाथ जंक्शन
- महत्वपूर्ण पड़ाव शहर

🙏 जय उमा देवी 🙏
🙏 दानवीर कर्ण की जय 🙏
🙏 हर हर गंगे 🙏