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विशालाक्षी देवी काशी - मणिकर्णिका घाट की दिव्य महाशक्तिपीठ

विशालाक्षी देवी उत्तर प्रदेश के वाराणसी काशी में मणिकर्णिका घाट के समीप विराजमान 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत सिद्ध और पवित्र पीठ हैं। यहाँ माँ सती के कुंडल गिरे थे। माँ विशालाक्षी के विशाल नेत्रों में ब्रह्मांड का ज्ञान समाया हुआ है। काशी की मोक्षदायिनी देवी माँ विशालाक्षी के दर्शन मात्र से भक्तों को ज्ञान दृष्टि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

51 शक्तिपीठ महाशक्तिपीठ
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परिचय

विशालाक्षी देवी मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के समीप स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती के कुंडल गिरे थे। माँ विशालाक्षी विशाल नेत्रों वाली मोक्षदायिनी देवी हैं जो काशी में आने वाले भक्तों को ज्ञान और मोक्ष प्रदान करती हैं।

Vishalakshi Devi Temple is situated near Manikarnika Ghat in Varanasi, Uttar Pradesh. It is one of the 21 Mahashaktipeeths where Goddess Sati's earrings fell. Maa Vishalakshi is the large-eyed Moksha-granting goddess who bestows knowledge and liberation to the devotees who come to Kashi.

विशालाक्षी देवी काशी - महाशक्तिपीठ वाराणसी | मणिकर्णिका घाट की अधिष्ठात्री देवी

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विशालाक्षी देवी काशी - मणिकर्णिका घाट की दिव्य महाशक्तिपीठ

विशालाक्षी देवी मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी काशी में मणिकर्णिका घाट के समीप मीरघाट पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती के कुंडल गिरे थे इसीलिए इस स्थान को मणिकर्णिका कहते हैं और यह अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

विशालाक्षी का अर्थ है विशाल नेत्रों वाली देवी। माँ विशालाक्षी की दृष्टि अत्यंत कृपालु और दिव्य है। माँ के विशाल नेत्रों में ब्रह्मांड का ज्ञान समाया हुआ है। काशी में माँ विशालाक्षी को मोक्षदायिनी देवी कहा जाता है क्योंकि काशी में मोक्ष प्रदान करने में माँ की विशेष भूमिका मानी जाती है।

विशालाक्षी देवी मंदिर का इतिहास

विशालाक्षी देवी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसका उल्लेख काशी खंड और स्कंद पुराण में विस्तार से मिलता है। यह मंदिर काशी के सबसे प्राचीन और पवित्र मंदिरों में से एक है। मणिकर्णिका घाट के समीप होने के कारण यह मंदिर अत्यंत विशेष महत्व रखता है।

विशालाक्षी देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. विशालाक्षी देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ विशालाक्षी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ के विशाल नेत्र अत्यंत कृपालु और मनमोहक हैं। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है। माँ का श्रृंगार सोने के आभूषणों से होता है।

2. मणिकर्णिका घाट
विशालाक्षी मंदिर के समीप मणिकर्णिका घाट स्थित है जो काशी का महाश्मशान है। यहाँ हजारों वर्षों से चिता की अग्नि अनवरत जल रही है। यहाँ अंतिम संस्कार होने से मोक्ष की प्राप्ति होती है ऐसी मान्यता है।

3. गंगा नदी
मंदिर के समीप गंगा नदी बहती है जिसमें स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। गंगा में डुबकी लगाने से सभी पापों का नाश होता है।

4. भैरव मंदिर
विशालाक्षी शक्तिपीठ के भैरव काल भैरव रूप में पूजे जाते हैं। काशी के कोतवाल काल भैरव का मंदिर यहाँ से कुछ ही दूरी पर स्थित है।

5. काशी विश्वनाथ मंदिर
विशालाक्षी मंदिर से काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग भी निकट है। एक ही यात्रा में शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग दोनों के दर्शन का अद्भुत अवसर मिलता है।

विशालाक्षी देवी की पूजा विधि

माँ विशालाक्षी की पूजा में कमल पुष्प सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। ललिता सहस्रनाम दुर्गा सप्तशती और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि अष्टमी और शुक्रवार के दिन यहाँ विशेष पूजा और अनुष्ठान होते हैं।

विशालाक्षी देवी कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मंदिर से 25 किमी दूर है।
रेलमार्ग: वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन देशभर के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: प्रयागराज से 120 किमी, लखनऊ से 320 किमी, दिल्ली से 820 किमी।

विशालाक्षी देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि महाशिवरात्रि देव दीपावली और शुक्रवार के दिन यहाँ विशेष पूजा होती है। सुबह मंगला आरती के समय माँ के दर्शन का अनुभव अत्यंत दिव्य और अलौकिक होता है।

विशालाक्षी देवी का धार्मिक महत्व

माँ विशालाक्षी को काशी की मोक्षदायिनी देवी कहा जाता है। माँ के विशाल नेत्रों में ब्रह्मांड का ज्ञान समाया हुआ है और माँ की दृष्टि मात्र से भक्तों को ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। काशी में मणिकर्णिका घाट के समीप स्थित होने से इस शक्तिपीठ का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है।