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गुह्येश्वरी देवी काठमांडू - नेपाल की रहस्यमयी तांत्रिक शक्तिपीठ

गुह्येश्वरी देवी नेपाल के काठमांडू में बागमती नदी के पावन तट पर पशुपतिनाथ के समीप विराजमान 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत रहस्यमयी और सिद्ध पीठ हैं। यहाँ माँ सती के दोनों घुटने गिरे थे। माँ की पूजा एक गोपनीय जलकुंड के रूप में होती है जो इस पीठ को अत्यंत विशेष बनाता है। तांत्रिक साधकों के लिए यह नेपाल का सर्वोच्च सिद्धिदायक पीठ माना जाता है।

51 शक्तिपीठ
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परिचय

गुह्येश्वरी देवी मंदिर नेपाल के काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर से मात्र 500 मीटर दूर बागमती नदी के तट पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती के दोनों घुटने गिरे थे। यह नेपाल का सबसे रहस्यमयी और तांत्रिक सिद्ध पीठ है।

Guhyeshwari Devi Temple is situated just 500 meters from Pashupatinath Temple on the banks of Bagmati river in Kathmandu, Nepal. It is one of the 51 Shaktipeeths where both knees of Goddess Sati fell. This is the most mysterious and tantric Siddha Peeth of Nepal.

गुह्येश्वरी देवी नेपाल - शक्तिपीठ | माँ सती के घुटनों का पवित्र शक्तिपीठ

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गुह्येश्वरी देवी - नेपाल का गोपनीय और रहस्यमयी शक्तिपीठ

गुह्येश्वरी देवी मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के पावन तट पर पशुपतिनाथ मंदिर से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत गोपनीय और रहस्यमयी पीठ है। यहाँ माँ सती के दोनों घुटने गिरे थे जिससे यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली और सिद्ध बन गया।

गुह्येश्वरी शब्द दो शब्दों से बना है - गुह्य अर्थात गोपनीय रहस्यमयी और ईश्वरी अर्थात शक्ति की देवी। अर्थात गुह्येश्वरी वह देवी हैं जो सृष्टि की गोपनीय और रहस्यमयी शक्ति की अधिष्ठात्री हैं। यह मंदिर नेपाल में केवल हिंदुओं के लिए खुला है।

गुह्येश्वरी देवी मंदिर का इतिहास

गुह्येश्वरी देवी मंदिर अत्यंत प्राचीन है। स्वयंभू पुराण और नेपाल के प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में नेपाल नरेश प्रताप मल्ल ने करवाया था। मंदिर की स्थापत्य शैली नेपाली पगोडा परंपरा में है और इसकी सुनहरी छत दूर से ही दिखती है।

गुह्येश्वरी देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. गुह्येश्वरी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ गुह्येश्वरी की पूजा एक विशेष कुंड के रूप में होती है जिसमें से सदा जल निकलता रहता है। इस कुंड को माँ का गोपनीय स्वरूप माना जाता है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल अर्पित किए जाते हैं।

2. पशुपतिनाथ मंदिर
गुह्येश्वरी मंदिर से मात्र 500 मीटर दूर भगवान शिव का विश्वप्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर है। एक ही यात्रा में शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग दोनों के दर्शन का यह सुअवसर अत्यंत दुर्लभ है।

3. बागमती नदी के घाट
मंदिर के समीप बागमती नदी के पवित्र घाट हैं जिन्हें नेपाल की गंगा कहा जाता है। यहाँ स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है।

4. आर्यघाट और पशुपतिनाथ घाट
बागमती नदी के तट पर आर्यघाट और पशुपतिनाथ घाट स्थित हैं जहाँ हिंदू रीति से अंतिम संस्कार होता है। यहाँ अंतिम संस्कार को मोक्षदायी माना जाता है।

5. भैरव मंदिर
गुह्येश्वरी शक्तिपीठ के भैरव कपाल रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव का स्थान भी है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।

6. बौद्धनाथ स्तूप
गुह्येश्वरी मंदिर से कुछ दूरी पर विश्वप्रसिद्ध बौद्धनाथ स्तूप स्थित है जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।

गुह्येश्वरी देवी की तांत्रिक महत्ता

गुह्येश्वरी मंदिर नेपाल के सबसे प्रमुख तांत्रिक पीठों में से एक है। यहाँ वज्रयान बौद्ध धर्म और हिंदू तंत्र दोनों परंपराओं के साधक माँ की उपासना करते हैं। तांत्रिक साधकों के लिए यह पीठ सर्वोच्च सिद्धिदायक माना जाता है। यहाँ की साधना शीघ्र फलदायी होती है।

गुह्येश्वरी देवी की पूजा विधि

माँ गुह्येश्वरी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती तंत्र चूडामणि और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि महाशिवरात्रि और तीज के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

गुह्येश्वरी देवी कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा काठमांडू में ही है जो मंदिर से मात्र 7 किमी दूर है।
रेलमार्ग: नेपाल में रेल सेवा सीमित है। भारत से काठमांडू वायु या सड़क मार्ग से पहुँचें।
सड़कमार्ग: भारत के रक्सौल सोनौली या सुनौली बॉर्डर होते हुए काठमांडू पहुँचा जा सकता है।

गुह्येश्वरी देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से अप्रैल का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। महाशिवरात्रि पर पशुपतिनाथ और गुह्येश्वरी दोनों के दर्शन का विशेष महत्व है। नवरात्रि में यहाँ विशेष तांत्रिक अनुष्ठान होते हैं।

गुह्येश्वरी देवी का धार्मिक महत्व

गुह्येश्वरी देवी नेपाल की सबसे गोपनीय और शक्तिशाली देवी मानी जाती हैं। यह एकमात्र शक्तिपीठ है जहाँ माँ की पूजा एक रहस्यमयी जलकुंड के रूप में होती है। पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग के इतने समीप होने से यहाँ दर्शन का फल अत्यंत विशेष माना जाता है। माँ गुह्येश्वरी की कृपा से साधकों को गोपनीय ज्ञान सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।