परिचय
Magadh Shaktipeeth is situated near Bodhgaya in Gaya district of Bihar. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's right thigh fell. Maa Sarvanandakari is enshrined here. Being near Bodhgaya and Vishnupad Temple this area is sacred for both Hindus and Buddhists.
मगध शक्तिपीठ - बिहार | माँ सती की दाहिनी जांघ का पवित्र शक्तिपीठ
मगध शक्तिपीठ - बोधगया की दिव्य शक्तिपीठ
मगध शक्तिपीठ बिहार राज्य के गया जिले में बोधगया के समीप स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती की दाहिनी जांघ गिरी थी इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
माँ सर्वानंदकरी रूप में यहाँ विराजमान हैं। सर्वानंदकरी का अर्थ है सभी को आनंद देने वाली देवी। माँ अपने भक्तों के जीवन में आनंद और प्रसन्नता का संचार करती हैं। मगध क्षेत्र प्राचीन भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य था और यहाँ शक्तिपीठ की उपस्थिति इस क्षेत्र को और भी विशेष बनाती है।
मगध शक्तिपीठ का इतिहास
मगध शक्तिपीठ का उल्लेख प्राचीन तंत्र ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। मगध साम्राज्य की भूमि पर स्थित यह शक्तिपीठ अत्यंत प्राचीन है। बोधगया में भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी क्षेत्र में माँ सर्वानंदकरी का शक्तिपीठ होना इस भूमि को अत्यंत विशेष बनाता है।
मगध शक्तिपीठ के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. माँ सर्वानंदकरी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ सर्वानंदकरी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ का स्वरूप अत्यंत प्रसन्न और करुणामयी है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।
2. महाबोधि मंदिर बोधगया
मगध शक्तिपीठ के समीप बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र स्थल महाबोधि मंदिर स्थित है जहाँ भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
3. विष्णुपद मंदिर गया
मगध शक्तिपीठ के समीप गया में विष्णुपद मंदिर स्थित है जहाँ भगवान विष्णु के चरण चिह्न हैं। यह हिंदू धर्म का प्रमुख पितृ तीर्थ है जहाँ पितरों की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है।
4. फल्गु नदी
गया में फल्गु नदी बहती है जिसे पितरों की नदी कहा जाता है। यहाँ पिंडदान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
5. भैरव मंदिर
मगध शक्तिपीठ के भैरव वज्रप्रकाश रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
6. राजगीर और नालंदा
मगध शक्तिपीठ के समीप प्राचीन राजगीर और नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष भी दर्शनीय हैं जो बौद्ध और हिंदू दोनों संस्कृतियों की महानता के प्रतीक हैं।
मगध शक्तिपीठ की पूजा विधि
माँ सर्वानंदकरी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती आनंद लहरी और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि पितृ पक्ष और अष्टमी के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।
मगध शक्तिपीठ कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मंदिर से 10 किमी दूर है।
रेलमार्ग: गया जंक्शन रेलवे स्टेशन देशभर के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: पटना से 100 किमी वाराणसी से 250 किमी दिल्ली से 1000 किमी।
मगध शक्तिपीठ दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। पितृ पक्ष नवरात्रि और बुद्ध पूर्णिमा के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। पितृ पक्ष में गया में पिंडदान के साथ माँ सर्वानंदकरी के दर्शन का विशेष महत्व है।
मगध शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व
मगध शक्तिपीठ प्राचीन मगध साम्राज्य की भूमि पर स्थित है जहाँ भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। माँ सर्वानंदकरी की कृपा से भक्तों के जीवन में आनंद प्रसन्नता और शांति आती है। गया में पिंडदान और माँ सर्वानंदकरी के दर्शन से पितरों को मोक्ष और भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है।