परिचय
Kurukshetra Shaktipeeth is situated on the banks of Saraswati river in Kurukshetra, Haryana. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's ankle fell. Maa Savitri is enshrined here. This Shaktipeeth holds extremely special significance in the holy land of Mahabharat Kurukshetra.
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ - हरियाणा | माँ सती के टखने का पवित्र शक्तिपीठ
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ - धर्मक्षेत्र की दिव्य शक्तिपीठ
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ हरियाणा राज्य के कुरुक्षेत्र में सरस्वती नदी के तट पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का टखना गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
माँ सावित्री रूप में यहाँ विराजमान हैं। कुरुक्षेत्र वह पवित्र भूमि है जहाँ महाभारत का युद्ध हुआ था और भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इस पावन धर्मक्षेत्र में माँ सावित्री शक्तिपीठ की उपस्थिति इसे और भी विशेष बनाती है।
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ का इतिहास
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ का उल्लेख प्राचीन तंत्र ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। कुरुक्षेत्र का इतिहास महाभारत काल से भी पुराना है। यह भूमि वेदों पुराणों और महाभारत सभी में अत्यंत पवित्र बताई गई है।
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. माँ सावित्री गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ सावित्री की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ का श्रृंगार अत्यंत भव्य होता है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।
2. ब्रह्मसरोवर
कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर स्थित है जो भारत के सबसे बड़े और पवित्र सरोवरों में से एक है। यहाँ स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। सूर्यग्रहण के समय यहाँ लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं।
3. ज्योतिसर तीर्थ
ज्योतिसर वह पवित्र स्थान है जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। यहाँ अक्षयवट और भगवान कृष्ण की विशाल प्रतिमा स्थित है।
4. भैरव मंदिर
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ के भैरव स्थाणु रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
5. कुरुक्षेत्र पैनोरमा
कुरुक्षेत्र में एक भव्य पैनोरमा म्यूजियम है जहाँ महाभारत युद्ध के दृश्यों को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है।
6. थानेसर
कुरुक्षेत्र के समीप थानेसर में हर्षवर्धन की राजधानी के अवशेष हैं। यहाँ स्थानेश्वर महादेव मंदिर भी दर्शनीय है।
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ की पूजा विधि
माँ सावित्री की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती सावित्री स्तोत्र और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि गीता जयंती और सूर्यग्रहण के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो कुरुक्षेत्र से 160 किमी दूर है।
रेलमार्ग: कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन दिल्ली अंबाला और अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: दिल्ली से 160 किमी अंबाला से 40 किमी चंडीगढ़ से 90 किमी।
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। गीता जयंती नवरात्रि और सूर्यग्रहण के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। गीता जयंती पर कुरुक्षेत्र में भव्य महोत्सव का आयोजन होता है जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं।
कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व
कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र कहा जाता है। यहाँ भगवान कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था और माँ सावित्री शक्तिपीठ की उपस्थिति इस भूमि को और भी पवित्र बनाती है। माँ सावित्री की कृपा से भक्तों को ज्ञान शक्ति और धर्म की राह पर चलने की प्रेरणा मिलती है। ब्रह्मसरोवर स्नान और माँ के दर्शन से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।