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ज्वाला जी देवी - नौ अखंड ज्योतियों का दिव्य महाशक्तिपीठ

ज्वाला जी देवी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में विराजमान 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत चमत्कारी और सिद्ध पीठ हैं। यहाँ माँ सती की जिह्वा गिरी थी। इस पीठ का सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि पृथ्वी से नौ अखंड ज्योतियाँ बिना किसी तेल बाती या ईंधन के हजारों वर्षों से अनवरत प्रज्वलित हैं। यहाँ दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

51 शक्तिपीठ महाशक्तिपीठ सिद्ध पीठ
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परिचय

ज्वाला जी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती की जिह्वा गिरी थी। यहाँ पृथ्वी से नौ अखंड ज्योतियाँ बिना किसी ईंधन के हजारों वर्षों से प्रज्वलित हैं जो माँ की दिव्य शक्ति का जीवंत प्रमाण हैं।

Jwala Ji Devi Temple is situated in Kangra district of Himachal Pradesh. It is one of the 21 Mahashaktipeeths where Goddess Sati's tongue fell. Here nine eternal flames emerge from the earth and have been burning for thousands of years without any fuel which is a living proof of Maa's divine power.

ज्वाला जी देवी - महाशक्तिपीठ हिमाचल प्रदेश | अखंड ज्योति की चमत्कारी देवी

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ज्वाला जी देवी - नौ अखंड ज्योतियों का चमत्कारी महाशक्तिपीठ

ज्वाला जी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में ज्वाला जी नामक स्थान पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और चमत्कारी पीठ है। यहाँ माँ सती की जिह्वा गिरी थी इसीलिए यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र माना जाता है।

ज्वाला जी का सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि यहाँ पृथ्वी से नौ अखंड ज्योतियाँ निकलती हैं जो बिना किसी तेल बाती या किसी ईंधन के हजारों वर्षों से अनवरत प्रज्वलित हैं। इन नौ ज्योतियों के नाम महाकाली सरस्वती अन्नपूर्णा चंडी हिंगलाज विंध्यवासिनी महालक्ष्मी अम्बिका और अंजी देवी हैं।

ज्वाला जी मंदिर का इतिहास

ज्वाला जी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने करवाया था। मंदिर का सोने का छत्र महाराजा रणजीत सिंह ने चढ़ाया था।

अकबर और ज्वाला जी का चमत्कार

मुगल सम्राट अकबर ने ज्वाला जी की ज्योतियों को बुझाने का प्रयास किया था। उसने नहर का पानी ज्योतियों पर डलवाया लेकिन ज्योतियाँ नहीं बुझीं। तब अकबर ने माँ की शक्ति को स्वीकार करते हुए सोने का छत्र चढ़ाया। मान्यता है कि माँ ने वह छत्र स्वीकार नहीं किया और वह किसी अन्य धातु में बदल गया।

ज्वाला जी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. नौ अखंड ज्योतियाँ
मंदिर के गर्भगृह में पृथ्वी से निकलती नौ अखंड ज्योतियाँ इस पीठ का सबसे बड़ा चमत्कार हैं। इन ज्योतियों के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

2. गोरख डिब्बी
मंदिर के समीप गोरख डिब्बी नामक एक कुंड है जिसमें से गर्म पानी निकलता है। यहाँ स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है।

3. भैरव मंदिर
ज्वाला जी शक्तिपीठ के भैरव उन्मत्त रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है।

4. नगरकोट मंदिर
ज्वाला जी से कुछ दूरी पर नगरकोट में माँ ब्रजेश्वरी देवी का प्रसिद्ध मंदिर है जिसके दर्शन यात्रा को पूर्ण बनाते हैं।

5. चामुंडा देवी मंदिर
ज्वाला जी के समीप ही चामुंडा देवी का प्रसिद्ध मंदिर है जो बाणगंगा नदी के तट पर स्थित है।

ज्वाला जी देवी की पूजा विधि

माँ ज्वाला जी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि और शिवरात्रि के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।

ज्वाला जी देवी कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: कांगड़ा हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो ज्वाला जी से 45 किमी दूर है।
रेलमार्ग: पठानकोट रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है जो ज्वाला जी से 115 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: धर्मशाला से 56 किमी, कांगड़ा से 30 किमी, पठानकोट से 115 किमी।

ज्वाला जी देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय

अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि के समय यहाँ लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं। सुबह मंगला आरती के समय नौ ज्योतियों का दर्शन अत्यंत दिव्य और अलौकिक होता है।

ज्वाला जी देवी का धार्मिक महत्व

ज्वाला जी को भारत के सबसे चमत्कारी और जागृत शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। बिना किसी ईंधन के जलती नौ अखंड ज्योतियाँ माँ की दिव्य शक्ति का जीवंत प्रमाण हैं। यहाँ दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।