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गिरिजा देवी नेपाल - पशुपतिनाथ धाम की दिव्य महाशक्तिपीठ

गिरिजा देवी नेपाल के काठमांडू में बागमती नदी के पावन तट पर पशुपतिनाथ मंदिर के समीप विराजमान 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत सिद्ध पीठ हैं। यहाँ माँ सती के दोनों घुटने गिरे थे। माँ गिरिजा भगवान शिव की अर्धांगिनी पार्वती का दिव्य स्वरूप हैं। पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग और गिरिजा शक्तिपीठ दोनों एक साथ होने से यहाँ दर्शन का फल दोगुना माना जाता है।

51 शक्तिपीठ महाशक्तिपीठ
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परिचय

गिरिजा देवी मंदिर नेपाल के काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर के समीप गुह्येश्वरी नामक स्थान पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती के दोनों घुटने गिरे थे। पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग और गिरिजा शक्तिपीठ दोनों एक साथ होने से यह स्थान अत्यंत दुर्लभ और पवित्र है।

Girija Devi Temple is situated at Guhyeshwari near Pashupatinath Temple in Kathmandu, Nepal. It is one of the 21 Mahashaktipeeths where both knees of Goddess Sati fell. The presence of both Pashupatinath Jyotirlinga and Girija Shaktipeeth together makes this place extremely rare and sacred.

गिरिजा देवी - महाशक्तिपीठ नेपाल | पशुपतिनाथ धाम की अधिष्ठात्री शक्ति

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गिरिजा देवी - पशुपतिनाथ धाम की दिव्य महाशक्तिपीठ

गिरिजा देवी मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के तट पर पशुपतिनाथ मंदिर के समीप गुह्येश्वरी नामक स्थान पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती के दोनों घुटने गिरे थे इसीलिए यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र माना जाता है।

गिरिजा देवी को गुह्येश्वरी भी कहा जाता है। माँ गिरिजा भगवान शिव की अर्धांगिनी पार्वती का ही दिव्य स्वरूप हैं। गिरि का अर्थ है पर्वत - अर्थात पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती। नेपाल में यह शक्तिपीठ अत्यंत विशेष माना जाता है क्योंकि यहाँ पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग और गिरिजा शक्तिपीठ दोनों एक साथ हैं।

गिरिजा देवी मंदिर का इतिहास

गिरिजा देवी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। यह मंदिर नेपाल के लिच्छवी काल से भी पुराना माना जाता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में नेपाल के राजा प्रताप मल्ल ने करवाया था। मंदिर की वास्तुकला नेपाली पगोडा शैली में बनी है।

गिरिजा देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. गुह्येश्वरी मंदिर गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ गिरिजा की प्रतिमा विराजमान है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र है और केवल हिंदू ही इसमें प्रवेश कर सकते हैं। माँ को लाल फूल, सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।

2. पशुपतिनाथ मंदिर
गिरिजा देवी मंदिर के समीप ही भगवान शिव का पशुपतिनाथ मंदिर स्थित है जो नेपाल का सबसे पवित्र मंदिर और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। एक ही स्थान पर शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग दोनों के दर्शन का यह दुर्लभ अवसर है।

3. बागमती नदी
मंदिर के समीप बागमती नदी बहती है जिसे नेपाल की गंगा कहा जाता है। यहाँ स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

4. आर्यघाट
बागमती नदी के तट पर आर्यघाट स्थित है जो हिंदुओं का प्रमुख श्मशान घाट है। यहाँ अंतिम संस्कार करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

5. भैरव मंदिर
गिरिजा देवी शक्तिपीठ के भैरव कपाल रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।

गिरिजा देवी की पूजा विधि

माँ गिरिजा देवी की पूजा में लाल फूल, सिंदूर, लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती, ललिता सहस्रनाम और शिव पार्वती स्तोत्र का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि और महाशिवरात्रि के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।

गिरिजा देवी कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा काठमांडू में ही है जो मंदिर से 8 किमी दूर है।
रेलमार्ग: नेपाल में रेल सेवा सीमित है। भारत से काठमांडू बस या हवाई मार्ग से पहुँचा जा सकता है।
सड़कमार्ग: भारत के गोरखपुर से सोनौली बॉर्डर होते हुए काठमांडू 500 किमी दूर है।

गिरिजा देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। महाशिवरात्रि, नवरात्रि और तीज के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। महाशिवरात्रि पर पशुपतिनाथ और गिरिजा देवी दोनों के दर्शन का विशेष महत्व है।

गिरिजा देवी का धार्मिक महत्व

गिरिजा देवी शक्तिपीठ नेपाल का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है। यहाँ पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग और गिरिजा शक्तिपीठ दोनों एक साथ होने से दर्शन का फल दोगुना माना जाता है। माँ गिरिजा की कृपा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और दांपत्य जीवन में सुख शांति आती है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।