परिचय
Puruhutika Devi Temple is situated in Pithapuram, Andhra Pradesh. It is one of the 21 Mahashaktipeeths where Goddess Sati's left hip fell. The name Pithapuram itself is derived from this Shaktipeeth. Bhairav is worshipped here as Kukuteshwar.
पुरुहूतिका देवी - महाशक्तिपीठ आंध्र प्रदेश | पीठापुरम की अधिष्ठात्री देवी
पुरुहूतिका देवी - पीठापुरम की दिव्य महाशक्तिपीठ
पुरुहूतिका देवी मंदिर आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में पीठापुरम नामक स्थान पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का वाम नितंब गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
पीठापुरम का नाम ही इस शक्तिपीठ के कारण पड़ा है। पीठ अर्थात शक्तिपीठ और पुरम अर्थात नगर - अर्थात शक्तिपीठ की नगरी। माँ पुरुहूतिका इस पूरे क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं और यहाँ के लोग माँ को अपनी कुलदेवी मानते हैं।
पुरुहूतिका देवी मंदिर का इतिहास
पुरुहूतिका देवी मंदिर अत्यंत प्राचीन है। इसका उल्लेख प्राचीन तेलुगु ग्रंथों में मिलता है। मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली में बनी है। विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। पीठापुरम आदि शंकराचार्य की शिष्य परंपरा में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
पुरुहूतिका देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. पुरुहूतिका देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ पुरुहूतिका की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ का श्रृंगार सोने के आभूषणों से होता है। यहाँ माँ को लाल फूल, सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।
2. कुमार रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर
पीठापुरम में कुमार रुद्रेश्वर स्वामी का प्राचीन मंदिर भी स्थित है जो भगवान शिव को समर्पित है। माँ पुरुहूतिका दर्शन के साथ इस मंदिर के दर्शन भी अवश्य करें।
3. पादगया तीर्थ
पीठापुरम में पादगया नामक पवित्र तीर्थ है जहाँ पितरों की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है। यह स्थान अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
4. भैरव मंदिर
पुरुहूतिका शक्तिपीठ के भैरव कुकुटेश्वर रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
5. पीठापुरम झील
मंदिर के समीप एक पवित्र झील है जहाँ स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है। झील के चारों ओर का वातावरण अत्यंत शांत और दिव्य है।
पुरुहूतिका देवी की पूजा विधि
माँ पुरुहूतिका की पूजा में लाल फूल, सिंदूर, लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती और ललिता सहस्रनाम का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि और शुक्रवार के दिन यहाँ विशेष पूजा और अनुष्ठान होते हैं।
पुरुहूतिका देवी कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: राजमुंद्री हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो पीठापुरम से 55 किमी दूर है।
रेलमार्ग: पीठापुरम रेलवे स्टेशन मंदिर से मात्र 2 किमी दूर है और विशाखापट्टनम तथा चेन्नई से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: काकीनाडा से 25 किमी, राजमुंद्री से 55 किमी, विशाखापट्टनम से 200 किमी।
पुरुहूतिका देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि, उगादि और शुक्रवार के दिन यहाँ विशेष पूजा होती है। सुबह जल्दी दर्शन करने से माँ का दिव्य श्रृंगार देखने को मिलता है।
पुरुहूतिका देवी का धार्मिक महत्व
पुरुहूतिका देवी को दक्षिण भारत की सबसे जागृत और सिद्ध देवियों में से एक माना जाता है। पीठापुरम का नाम ही इस शक्तिपीठ के कारण विश्वविख्यात है। माँ की कृपा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।