परिचय
Devprayag is located at 618 meters in Tehri Garhwal district of Uttarakhand. It is the fifth and most sacred confluence in Panch Prayag. Here Alaknanda and Bhagirathi rivers meet and Ganga is born. After the confluence, the river is named Ganga. Raghunath temple here is believed to be 10,000 years old. Bhagirathi comes from Gomukh and Alaknanda from Badrinath. There are 72 ghats. 70 km from Rishikesh. Extremely sacred and picturesque confluence.
देवप्रयाग | गंगा का जन्म स्थल - पंच प्रयाग
**देवप्रयाग का परिचय:**
देवप्रयाग **पंच प्रयाग** में पांचवां और **सबसे पवित्र संगम** है।
"देवप्रयाग" का अर्थ है "देवताओं का प्रयाग" - सबसे पवित्र संगम।
**नदियों का संगम:**
- **अलकनंदा** नदी (बद्रीनाथ से)
- **भागीरथी** नदी (गोमुख से)
- = **गंगा** (संगम के बाद)
**गंगा का जन्म:**
यहीं से नदी का नाम **गंगा** हो जाता है। इसलिए देवप्रयाग को **गंगा का जन्म स्थल** कहा जाता है।
**भौगोलिक स्थिति:**
- **राज्य:** उत्तराखंड
- **जिला:** टिहरी गढ़वाल
- **ऊंचाई:** 618 मीटर (2,028 फीट)
- **ऋषिकेश से:** 70 किमी
- **टिहरी से:** 91 किमी
**देवप्रयाग की कथा:**
**देवताओं का प्रयाग:**
पौराणिक मान्यता के अनुसार, **देवताओं** ने यहां यज्ञ किया था। इसलिए इसे **देवप्रयाग** (देवताओं का प्रयाग) कहा गया।
**राम-लक्ष्मण की तपस्या:**
यह भी मान्यता है कि भगवान **राम और लक्ष्मण** ने यहां तपस्या की थी।
**रघुनाथ मंदिर:**
संगम के ऊपर पहाड़ी पर **रघुनाथ मंदिर** (राम मंदिर) है।
**मंदिर विशेषता:**
- **10,000 वर्ष पुराना** माना जाता है
- द्रविड़ शैली में निर्मित
- भगवान राम को समर्पित
- संगम का मनोरम दृश्य
- 220 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं
**72 घाट:**
देवप्रयाग में **72 घाट** हैं जो अत्यंत पवित्र माने जाते हैं।
**प्रमुख घाट:**
- ब्रह्म कुंड
- वासुदेव घाट
- शिवानंद घाट
**स्नान का महत्व:**
देवप्रयाग में स्नान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है क्योंकि यहीं **गंगा का जन्म** होता है।
**संगम की विशेषता:**
**दोनों नदियों का अलग रंग:**
- **अलकनंदा** - हल्का भूरा/दूधिया
- **भागीरथी** - हरा/नीला
संगम पर दोनों नदियों का अलग रंग स्पष्ट दिखता है।
**देवप्रयाग की महिमा:**
१. **पंच प्रयाग में अंतिम और सर्वश्रेष्ठ**
२. **गंगा का जन्म स्थल**
३. **देवताओं का प्रयाग**
④. **रघुनाथ मंदिर - 10,000 वर्ष पुराना**
⑤. **72 पवित्र घाट**
⑥. **सबसे पवित्र संगम**
**स्नान का महत्व:**
देवप्रयाग में स्नान करने से:
- सभी पापों का नाश
- मोक्ष की प्राप्ति
- पितरों का तारण
- गंगा माता का आशीर्वाद
**देवप्रयाग कैसे पहुंचें:**
**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **देहरादून** (105 किमी)
**रेल मार्ग:**
- निकटतम स्टेशन: **ऋषिकेश** (70 किमी)
**सड़क मार्ग:**
- ऋषिकेश → **देवप्रयाग** (70 किमी)
- बद्रीनाथ/केदारनाथ से वापसी में
- अच्छी सड़क
- नियमित बस सेवा
**ठहरने की व्यवस्था:**
**देवप्रयाग में:**
- होटल और लॉज
- गेस्ट हाउस
- धर्मशालाएं
- GMVN टूरिस्ट रेस्ट हाउस
**आसपास के दर्शनीय स्थल:**
१. **रघुनाथ मंदिर** - संगम के ऊपर
२. **दशरथांचल मंदिर**
३. **चंद्रबदनी मंदिर** (15 किमी)
④. **ऋषिकेश** (70 किमी)
⑤. **टिहरी बांध** (91 किमी)
**विशेष जानकारी:**
- पंच प्रयाग यात्रा का अंतिम पड़ाव
- संगम में अवश्य स्नान करें
- रघुनाथ मंदिर जाएं
- संगम का फोटो लें
- दोनों नदियों का अलग रंग देखें
- घाटों पर बैठकर ध्यान करें
- गंगा आरती देखें
- यहीं से गंगा शुरू होती है
**यात्रा का सर्वोत्तम समय:**
- **अप्रैल-जून:** गर्मी, लेकिन अच्छा
- **सितंबर-नवंबर:** सबसे अच्छा मौसम
- **जुलाई-अगस्त:** बारिश (पानी बढ़ जाता है)
- **दिसंबर-मार्च:** ठंड
**महत्वपूर्ण तथ्य:**
- पंच प्रयाग में पांचवां और अंतिम
- सबसे पवित्र संगम
- 618 मीटर की ऊंचाई
- अलकनंदा + भागीरथी = गंगा
- गंगा का जन्म स्थल
- रघुनाथ मंदिर 10,000 वर्ष पुराना
- 72 घाट
- देवताओं का प्रयाग
🙏 जय गंगा मैया 🙏
🙏 जय रघुनाथ 🙏
🙏 हर हर गंगे 🙏