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चामुंडेश्वरी देवी मैसूर - महिषासुर मर्दिनी का दिव्य महाशक्तिपीठ

चामुंडेश्वरी देवी कर्नाटक के मैसूर में चामुंडी पहाड़ी पर विराजमान 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत सिद्ध पीठ हैं। यहाँ माँ सती के केश गिरे थे। माँ चामुंडेश्वरी ने महिषासुर का वध करके देवताओं को मुक्त कराया था। मैसूर राजघराने की कुलदेवी माँ चामुंडेश्वरी के सम्मान में मैसूर दशहरा विश्वप्रसिद्ध है। यहाँ दर्शन मात्र से शत्रुओं का नाश होता है और विजय की प्राप्ति होती है।

51 शक्तिपीठ महाशक्तिपीठ
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परिचय

चामुंडेश्वरी देवी मंदिर कर्नाटक के मैसूर में चामुंडी पहाड़ी पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती के केश गिरे थे। माँ चामुंडेश्वरी महिषासुर मर्दिनी और मैसूर राजघराने की कुलदेवी हैं। मैसूर दशहरा इन्हीं की कृपा से विश्वप्रसिद्ध है।

Chamundeshwari Devi Temple is situated on Chamundi Hill in Mysore, Karnataka. It is one of the 21 Mahashaktipeeths where Goddess Sati's hair fell. Maa Chamundeshwari is Mahishasura Mardini and the Kuldevi of Mysore royal family. The world famous Mysore Dasara is celebrated in her honor.

चामुंडेश्वरी देवी मैसूर - महाशक्तिपीठ कर्नाटक | चामुंडी पहाड़ी की अधिष्ठात्री देवी

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चामुंडेश्वरी देवी - महिषासुर मर्दिनी का दिव्य शक्तिपीठ

चामुंडेश्वरी देवी मंदिर कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर से 13 किमी दूर चामुंडी पहाड़ी पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती के केश गिरे थे इसीलिए यह स्थान अत्यंत पावन माना जाता है।

माँ चामुंडेश्वरी को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने महिषासुर नामक राक्षस का वध करके देवताओं और मानवों को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। मैसूर का नाम ही महिषासुर के नाम पर पड़ा है। माँ चामुंडेश्वरी मैसूर राजघराने की कुलदेवी हैं।

चामुंडेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास

चामुंडेश्वरी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था और इसका जीर्णोद्धार मैसूर के राजाओं ने करवाया था। मंदिर का सात मंजिला गोपुरम द्रविड़ स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर तक पहुँचने के लिए 1000 सीढ़ियाँ बनी हैं।

चामुंडेश्वरी देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. चामुंडेश्वरी देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ चामुंडेश्वरी की अष्टभुजी प्रतिमा विराजमान है। माँ के हाथों में त्रिशूल, खड्ग, पाश, अंकुश और कपाल हैं। माँ का श्रृंगार सोने और हीरे के आभूषणों से होता है जो अत्यंत भव्य लगता है।

2. महिषासुर प्रतिमा
चामुंडी पहाड़ी पर महिषासुर की विशाल प्रतिमा स्थापित है जो मैसूर का प्रतीक बन चुकी है। यह प्रतिमा पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

3. नंदी प्रतिमा
पहाड़ी पर चढ़ते समय रास्ते में भगवान शिव के वाहन नंदी की विशाल प्रतिमा स्थित है जो 16वीं शताब्दी में बनाई गई थी। यह नंदी प्रतिमा भारत की सबसे बड़ी नंदी प्रतिमाओं में से एक है।

4. भैरव मंदिर
चामुंडेश्वरी शक्तिपीठ के भैरव क्रमदीश्वर रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव का मंदिर भी स्थित है।

5. चामुंडी पहाड़ी
जिस पहाड़ी पर मंदिर स्थित है उससे मैसूर शहर का अत्यंत सुंदर और विहंगम दृश्य दिखता है। विशेषकर रात में मैसूर महल की रोशनी का दृश्य अद्भुत होता है।

मैसूर दशहरा

मैसूर का दशहरा विश्वप्रसिद्ध है और माँ चामुंडेश्वरी इस उत्सव की प्रमुख देवी हैं। दशहरे के दिन माँ की मूर्ति को सोने के हौदे में हाथी पर बिठाकर भव्य जुलूस निकाला जाता है जिसमें लाखों लोग भाग लेते हैं। यह जुलूस विश्व के सबसे भव्य धार्मिक आयोजनों में से एक है।

चामुंडेश्वरी देवी कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: मैसूर हवाई अड्डा और बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम हैं। बेंगलुरु से मैसूर 150 किमी दूर है।
रेलमार्ग: मैसूर रेलवे स्टेशन से चामुंडी पहाड़ी 13 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: बेंगलुरु से 150 किमी, ऊटी से 128 किमी, मैंगलोर से 250 किमी।

चामुंडेश्वरी देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। दशहरा, नवरात्रि और शुक्रवार के दिन यहाँ विशेष पूजा होती है। दशहरे के समय मैसूर आना एक अविस्मरणीय अनुभव है।

चामुंडेश्वरी देवी का धार्मिक महत्व

माँ चामुंडेश्वरी को शक्ति और विजय की देवी माना जाता है। मान्यता है कि माँ के दर्शन मात्र से शत्रुओं का नाश होता है और भक्तों को विजय प्राप्त होती है। मैसूर राजघराने की कुलदेवी होने के कारण यह पीठ विशेष महत्व रखता है। यहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।