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उज्जैन अवंतिका - महाकाल की दिव्य नगरी, सप्त पुरी में षष्ठम

उज्जैन मध्य प्रदेश की वह पावन नगरी है जहाँ कालों के काल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। सात मोक्षदायिनी नगरियों में षष्ठम स्थान रखने वाली इस नगरी में प्रतिदिन सुबह होने वाली भस्म आरती, हरसिद्धि शक्तिपीठ और काल भैरव के दर्शन अत्यंत पुण्यकारी हैं। शिप्रा नदी के तट पर बसी यह नगरी कुंभ मेले के सिंहस्थ के लिए भी विश्वप्रसिद्ध है।

प्रसिद्ध मंदिर सप्त पुरी
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परिचय

उज्जैन मध्य प्रदेश की सबसे पवित्र नगरी है जो शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का धाम और सप्त पुरी में षष्ठम मोक्षदायिनी नगरी है। महाकाल मंदिर, हरसिद्धि शक्तिपीठ, काल भैरव मंदिर और कुंभ मेला यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं।

Ujjain is the most sacred city of Madhya Pradesh situated on the banks of river Shipra. It is the abode of Mahakaleshwar Jyotirlinga and holds the sixth place among the Sapta Puri - seven cities that grant Moksha.

उज्जैन अवंतिका - महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पवित्र नगरी | सप्त पुरी मोक्षदायिनी तीर्थ

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उज्जैन अवंतिका - महाकाल की दिव्य नगरी

उज्जैन जिसे प्राचीन काल में अवंतिका कहा जाता था, मध्य प्रदेश में शिप्रा नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन नगरी है। हिंदू धर्म की सात मोक्षदायिनी नगरियों (सप्त पुरी) में उज्जैन को षष्ठम स्थान प्राप्त है। यह नगरी भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का धाम है।

उज्जैन को "महाकाल की नगरी" कहा जाता है। शास्त्रों में उज्जैन को "कालों के काल महाकाल" की नगरी बताया गया है। यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है और यहाँ भस्म आरती का विशेष महत्व है।

उज्जैन के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन का सबसे पवित्र स्थान है। यहाँ प्रतिदिन सुबह होने वाली भस्म आरती विश्वप्रसिद्ध है जिसमें चिता की भस्म से भगवान महाकाल का श्रृंगार किया जाता है। नवनिर्मित महाकाल लोक कॉरिडोर ने इस मंदिर की भव्यता को और अधिक बढ़ा दिया है।

2. हरसिद्धि मंदिर
हरसिद्धि मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माता सती की कोहनी गिरी थी। यह मंदिर माँ अन्नपूर्णा और माँ महालक्ष्मी को समर्पित है। नवरात्रि पर यहाँ विशेष पूजा होती है।

3. काल भैरव मंदिर
उज्जैन के कोतवाल कहे जाने वाले काल भैरव का यह मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यहाँ काल भैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता है जो एक अद्भुत परंपरा है।

4. मंगलनाथ मंदिर
मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उज्जैन कर्क रेखा और भारत की मध्य रेखा पर स्थित है इसीलिए यहाँ मंगल ग्रह की पूजा का विशेष महत्व है।

5. सिद्धवट
सिद्धवट उज्जैन का एक पवित्र वटवृक्ष है जहाँ पितरों की शांति के लिए पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहाँ माता पार्वती ने तपस्या की थी।

6. राम घाट
शिप्रा नदी के तट पर राम घाट उज्जैन का प्रमुख घाट है। यहाँ प्रतिदिन शाम को गंगा आरती की तरह शिप्रा आरती होती है। कुंभ मेले के समय यहाँ करोड़ों श्रद्धालु स्नान करते हैं।

7. वेधशाला (जंतर मंतर)
उज्जैन में महाराजा जयसिंह द्वारा निर्मित प्राचीन वेधशाला स्थित है जो भारत की सबसे महत्वपूर्ण वेधशालाओं में से एक है।

उज्जैन कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो उज्जैन से 55 किमी दूर है।
रेलमार्ग: उज्जैन जंक्शन देशभर के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: इंदौर से 55 किमी, भोपाल से 185 किमी, दिल्ली से 780 किमी।

उज्जैन दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च का समय उज्जैन यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। महाशिवरात्रि, नवरात्रि, कार्तिक पूर्णिमा और कुंभ मेले के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती के दर्शन के लिए पहले से ऑनलाइन बुकिंग करना आवश्यक है।

उज्जैन का धार्मिक महत्व

उज्जैन को पृथ्वी का नाभि केंद्र माना जाता है। यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहाँ भगवान स्वयं महाकाल अर्थात काल के स्वामी के रूप में विराजमान हैं। यहाँ शिप्रा स्नान और महाकाल दर्शन से मृत्यु का भय समाप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कुंभ मेले का सिंहस्थ उज्जैन में 12 वर्षों में एक बार आयोजित होता है।