परिचय
Naina Devi Temple is situated on Naina Devi hill on the banks of Gobind Sagar lake in Bilaspur district of Himachal Pradesh. It is one of the 5 Siddha Peeths where Goddess Sati's eyes fell. Maa Naina Devi bestows divine vision and fulfills the wishes of her devotees.
नैना देवी - सिद्ध पीठ हिमाचल प्रदेश | बिलासपुर की अधिष्ठात्री देवी
नैना देवी - दिव्य दृष्टि की सिद्ध शक्तिपीठ
नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में नैना देवी पर्वत पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक और 5 सिद्ध पीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती की आँखें गिरी थीं इसीलिए इस स्थान को नैना देवी कहते हैं और यह अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।
माँ नैना देवी की आँखें अत्यंत कृपालु और दिव्य हैं। माँ की दृष्टि मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। गोबिंद सागर झील के किनारे ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ से गोबिंद सागर झील और आसपास के पर्वतों का अद्भुत दृश्य दिखता है।
नैना देवी मंदिर का इतिहास
नैना देवी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा बीणू ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण बिलासपुर के राजाओं ने करवाया था। मंदिर की वास्तुकला पहाड़ी शैली में बनी है। 1970 में भाखड़ा बाँध बनने के बाद मूल मंदिर जलमग्न हो गया और नए स्थान पर मंदिर की स्थापना की गई।
नैना देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. नैना देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ नैना देवी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ की आँखें अत्यंत करुणामयी और तेजस्वी हैं। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है। माँ का श्रृंगार अत्यंत भव्य होता है।
2. गोबिंद सागर झील
नैना देवी मंदिर के नीचे गोबिंद सागर झील फैली हुई है जो भाखड़ा बाँध से बनी है। झील का दृश्य अत्यंत मनोरम और दिव्य है। झील में नौका विहार का आनंद भी लिया जा सकता है।
3. रोपवे
नैना देवी पर्वत तक पहुँचने के लिए रोपवे की सुविधा उपलब्ध है जो यात्रा को सुखद और आसान बनाती है। रोपवे से झील और पर्वतों का अद्भुत दृश्य दिखता है।
4. भैरव मंदिर
नैना देवी शक्तिपीठ के भैरव क्रोधीश रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
5. हनुमान मंदिर
मंदिर परिसर में हनुमान जी का भी एक प्राचीन मंदिर है जहाँ भक्त दर्शन करते हैं।
नैना देवी की पूजा विधि
माँ नैना देवी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती देवी कवच और नैना देवी स्तोत्र का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि और श्रावण अष्टमी के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।
नैना देवी कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: चंडीगढ़ हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो नैना देवी से 100 किमी दूर है।
रेलमार्ग: आनंदपुर साहिब रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है जो नैना देवी से 25 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: बिलासपुर से 56 किमी, चंडीगढ़ से 100 किमी, शिमला से 110 किमी।
नैना देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि और श्रावण अष्टमी के समय यहाँ लाखों भक्त माँ के दर्शन के लिए आते हैं। सुबह जल्दी दर्शन करने से माँ का दिव्य श्रृंगार देखने को मिलता है और भीड़ भी कम रहती है।
नैना देवी का धार्मिक महत्व
नैना देवी को हिमाचल प्रदेश की सबसे जागृत और सिद्ध देवियों में से एक माना जाता है। माँ नैना देवी की कृपा से भक्तों को दिव्य दृष्टि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। जो भक्त नेत्र रोग या दृष्टि दोष से पीड़ित हों उनके लिए माँ नैना देवी की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।