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शारदा देवी कश्मीर - विद्या और ज्ञान की दिव्य महाशक्तिपीठ

शारदा देवी जम्मू कश्मीर में नीलम नदी के पावन तट पर विराजमान 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत सिद्ध और पवित्र पीठ हैं। यहाँ माँ सती का दाहिना हाथ गिरा था। माँ शारदा विद्या ज्ञान और कला की सर्वोच्च देवी हैं। प्राचीन काल में शारदा पीठ भारत का सबसे बड़ा विद्या केंद्र था। कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी माँ शारदा की कृपा से भक्तों को विद्या बुद्धि ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

51 शक्तिपीठ महाशक्तिपीठ
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परिचय

शारदा देवी मंदिर जम्मू कश्मीर में नीलम नदी के तट पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती का दाहिना हाथ गिरा था। माँ शारदा विद्या और ज्ञान की देवी हैं और यह प्राचीन काल में भारत का सबसे बड़ा विद्या केंद्र था।

Sharda Devi Temple is situated on the banks of Neelam river in Jammu Kashmir. It is one of the 21 Mahashaktipeeths where Goddess Sati's right hand fell. Maa Sharda is the goddess of knowledge and wisdom and this was the largest center of learning in ancient India.

शारदा देवी - महाशक्तिपीठ कश्मीर | शारदा पीठ की अधिष्ठात्री देवी

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शारदा देवी - विद्या और ज्ञान की महाशक्तिपीठ

शारदा देवी मंदिर जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नीलम नदी के तट पर शारदा नामक स्थान पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का दाहिना हाथ गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।

शारदा देवी को विद्या ज्ञान और कला की देवी कहा जाता है। माँ शारदा देवी सरस्वती का ही स्वरूप हैं। प्राचीन काल में शारदा पीठ भारत का सबसे बड़ा विद्या केंद्र था जहाँ तक्षशिला और नालंदा जैसे महान विश्वविद्यालय की तरह देशभर के विद्वान और छात्र अध्ययन के लिए आते थे। आदि शंकराचार्य ने भी यहाँ आकर माँ शारदा का आशीर्वाद प्राप्त किया था।

शारदा देवी मंदिर का इतिहास

शारदा देवी मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। यह मंदिर कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी का धाम है। शारदा लिपि जो कश्मीरी भाषा की प्राचीन लिपि है उसका नाम माँ शारदा के नाम पर ही पड़ा है। वर्तमान में यह मंदिर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित है इसलिए यहाँ पहुँचना कठिन है।

शारदा देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. शारदा देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ शारदा की प्रतिमा विराजमान है। माँ का स्वरूप अत्यंत शांत और ज्ञानमय है। यहाँ माँ को सफेद फूल पुस्तक और वाद्ययंत्र चढ़ाए जाते हैं।

2. शारदा विश्वविद्यालय के अवशेष
प्राचीन शारदा विश्वविद्यालय के अवशेष आज भी मंदिर के समीप देखे जा सकते हैं। यह विश्वविद्यालय प्राचीन काल में विद्या और ज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र था।

3. नीलम नदी
मंदिर के समीप नीलम नदी बहती है जिसका जल अत्यंत स्वच्छ और नीला है। इसीलिए इसे नीलम नदी कहते हैं। यहाँ स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है।

4. भैरव मंदिर
शारदा देवी शक्तिपीठ के भैरव त्रिसंध्येश्वर रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है।

5. शारदा कॉरिडोर
भारत सरकार शारदा कॉरिडोर के माध्यम से कश्मीरी पंडितों को माँ शारदा के दर्शन का अवसर देने के प्रयास कर रही है। यह कॉरिडोर बनने पर यहाँ दर्शन सुलभ हो जाएंगे।

शारदा देवी की पूजा विधि

माँ शारदा देवी की पूजा में सफेद फूल सफेद वस्त्र पुस्तक और वाद्ययंत्र का विशेष महत्व है। सरस्वती वंदना शारदा स्तोत्र और ललिता सहस्रनाम का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि बसंत पंचमी और विद्यारंभ के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।

शारदा देवी कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है।
रेलमार्ग: जम्मू रेलवे स्टेशन से श्रीनगर होते हुए शारदा पहुँचा जा सकता है।
सड़कमार्ग: वर्तमान में नियंत्रण रेखा के पास होने के कारण यहाँ पहुँचना कठिन है। शारदा कॉरिडोर बनने पर यात्रा सुलभ हो जाएगी।

शारदा देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय

अप्रैल से अक्टूबर का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। बसंत पंचमी और नवरात्रि के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। कश्मीरी पंडित समुदाय प्रतिवर्ष माँ शारदा की पूजा विशेष श्रद्धा से करता है।

शारदा देवी का धार्मिक महत्व

माँ शारदा देवी को विद्या और ज्ञान की सर्वोच्च देवी माना जाता है। कश्मीरी पंडितों के लिए माँ शारदा उनकी कुलदेवी और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र हैं। शारदा लिपि और शारदा पीठ का नाम माँ शारदा के नाम पर ही है। माँ की कृपा से भक्तों को विद्या बुद्धि ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है।