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कामाक्षी देवी कांची - श्री विद्या की अधिष्ठात्री महाशक्तिपीठ

कामाक्षी देवी तमिलनाडु के कांचीपुरम में विराजमान 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत सिद्ध और पवित्र पीठ हैं। यहाँ माँ सती की पीठ गिरी थी। माँ कामाक्षी त्रिपुर सुंदरी का दिव्य स्वरूप हैं जो तीनों लोकों की माता हैं। आदि शंकराचार्य ने यहाँ श्री चक्र की स्थापना की थी। माँ की कृपा से भक्तों को ज्ञान धन और मोक्ष तीनों की प्राप्ति होती है।

51 शक्तिपीठ महाशक्तिपीठ
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परिचय

कामाक्षी देवी मंदिर तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित 21 महाशक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती की पीठ गिरी थी। माँ कामाक्षी त्रिपुर सुंदरी का स्वरूप हैं और आदि शंकराचार्य ने यहाँ श्री चक्र की स्थापना की थी।

Kamakshi Devi Temple in Kanchipuram, Tamil Nadu is one of the 21 Mahashaktipeeths where Goddess Sati's back fell. Maa Kamakshi is the form of Tripura Sundari and Adi Shankaracharya established the Sri Chakra here.

कामाक्षी देवी कांची - महाशक्तिपीठ तमिलनाडु | दक्षिण भारत की सर्वशक्तिमान देवी

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कामाक्षी देवी कांची - त्रिपुर सुंदरी का महाशक्तिपीठ

कामाक्षी देवी मंदिर तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती की पीठ गिरी थी इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। माँ कामाक्षी को त्रिपुर सुंदरी और ललिता देवी का ही स्वरूप माना जाता है।

कामाक्षी का अर्थ है - "का" अर्थात सरस्वती, "मा" अर्थात लक्ष्मी और "अक्षी" अर्थात आँखें - अर्थात जिनकी आँखों में सरस्वती और लक्ष्मी दोनों का वास हो। माँ कामाक्षी तीनों लोकों की माता हैं जो अपने भक्तों की सभी इच्छाएँ पूर्ण करती हैं।

कामाक्षी देवी मंदिर का इतिहास

कामाक्षी देवी मंदिर अत्यंत प्राचीन है। इस मंदिर का उल्लेख प्राचीन तमिल ग्रंथों में मिलता है। आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में यहाँ आकर माँ कामाक्षी की उपासना की और श्री चक्र की स्थापना की। उन्होंने माँ की शक्ति को श्री यंत्र में स्थापित करके मंदिर की महिमा को और अधिक बढ़ाया।

कामाक्षी देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. कामाक्षी देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ कामाक्षी पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं जो अत्यंत दुर्लभ है क्योंकि अधिकांश देवियाँ खड़ी मुद्रा में होती हैं। माँ के हाथों में गन्ना, पुष्प बाण, पाश और अंकुश हैं। गर्भगृह में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित श्री चक्र भी है।

2. आदि शंकराचार्य मठ
मंदिर परिसर में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठ है जहाँ उन्होंने माँ की साधना की थी। यह स्थान शंकर भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है।

3. भैरव मंदिर
कामाक्षी शक्तिपीठ के भैरव रुद्र रूप में विराजमान हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है।

4. कांचीपुरम के अन्य मंदिर
कामाक्षी मंदिर के साथ-साथ कांचीपुरम में एकाम्बरेश्वर शिव मंदिर, वरदराज पेरुमल विष्णु मंदिर और कैलासनाथ मंदिर भी दर्शनीय हैं।

कामाक्षी देवी की पूजा विधि

माँ कामाक्षी की पूजा में कमल पुष्प, हल्दी, कुमकुम और पीले वस्त्र का विशेष महत्व है। ललिता सहस्रनाम और श्री सूक्त का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।

कामाक्षी देवी कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो कांचीपुरम से 75 किमी दूर है।
रेलमार्ग: कांचीपुरम रेलवे स्टेशन चेन्नई से सीधे जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: चेन्नई से 75 किमी, वेल्लोर से 90 किमी, पुदुचेरी से 100 किमी।

कामाक्षी देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि, ब्रह्मोत्सव और शुक्रवार के दिन यहाँ विशेष पूजा होती है। शुक्रवार को माँ कामाक्षी का विशेष अभिषेक और श्रृंगार होता है।

कामाक्षी देवी का धार्मिक महत्व

माँ कामाक्षी को श्री विद्या की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। आदि शंकराचार्य ने यहाँ श्री चक्र की स्थापना करके इस पीठ को सर्वोच्च तांत्रिक और आध्यात्मिक महत्व प्रदान किया। यहाँ दर्शन मात्र से भक्तों की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। माँ कामाक्षी की कृपा से साधक को ज्ञान, धन और मोक्ष तीनों की प्राप्ति होती है।