परिचय
Varanasi Shaktipeeth is situated at Manikarnika Ghat in Varanasi Kashi, Uttar Pradesh. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's earrings fell. Maa Manikarni is enshrined here. This Shaktipeeth situated at the Mahashamshan Manikarnika Ghat of Kashi is the prime center of Moksha.
वाराणसी शक्तिपीठ - उत्तर प्रदेश | माँ सती के कुंडल का पवित्र शक्तिपीठ
वाराणसी शक्तिपीठ - काशी के मणिकर्णिका की दिव्य शक्तिपीठ
वाराणसी शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के वाराणसी काशी में मणिकर्णिका घाट पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती के कुंडल गिरे थे इसीलिए इस स्थान को मणिकर्णिका कहते हैं। मणि का अर्थ है रत्न और कर्णिका का अर्थ है कर्णाभूषण अर्थात कान का आभूषण।
माँ मणिकर्णी रूप में यहाँ विराजमान हैं। काशी स्वयं भगवान शिव की नगरी है और यहाँ माँ मणिकर्णी शक्तिपीठ की उपस्थिति काशी को और भी विशेष बनाती है। मणिकर्णिका घाट काशी का महाश्मशान है जहाँ हजारों वर्षों से चिता की अग्नि अनवरत जल रही है।
वाराणसी शक्तिपीठ का इतिहास
वाराणसी शक्तिपीठ का उल्लेख काशी खंड स्कंद पुराण और अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। मणिकर्णिका घाट का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। यह घाट काशी के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण घाटों में से एक है।
वाराणसी शक्तिपीठ के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. माँ मणिकर्णी मंदिर गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ मणिकर्णी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ का श्रृंगार सोने के कुंडल और आभूषणों से होता है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।
2. मणिकर्णिका घाट
मणिकर्णिका घाट काशी का महाश्मशान है जहाँ हजारों वर्षों से चिता की अग्नि अनवरत जल रही है। यहाँ अंतिम संस्कार होने से मोक्ष की प्राप्ति होती है ऐसी मान्यता है। इस घाट पर भगवान शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं।
3. गंगा नदी
मणिकर्णिका घाट पर गंगा नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। गंगा स्नान से सभी पापों का नाश होता है।
4. भैरव मंदिर
वाराणसी शक्तिपीठ के भैरव खंडपाणि रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव का स्थान भी है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
5. काशी विश्वनाथ मंदिर
वाराणसी शक्तिपीठ के समीप ही काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित है। एक ही यात्रा में शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग दोनों के दर्शन का अद्भुत अवसर मिलता है।
6. दशाश्वमेध घाट गंगा आरती
मणिकर्णिका घाट के समीप दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन शाम को होने वाली गंगा आरती विश्वप्रसिद्ध है। माँ के दर्शन के बाद इस आरती का दर्शन अवश्य करें।
वाराणसी शक्तिपीठ की पूजा विधि
माँ मणिकर्णी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती देवी कवच और काशी माहात्म्य का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि महाशिवरात्रि देव दीपावली और अष्टमी के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।
वाराणसी शक्तिपीठ कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मंदिर से 26 किमी दूर है।
रेलमार्ग: वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन देशभर के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: प्रयागराज से 120 किमी लखनऊ से 320 किमी दिल्ली से 820 किमी।
वाराणसी शक्तिपीठ दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। महाशिवरात्रि नवरात्रि और देव दीपावली के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। देव दीपावली पर गंगा के सभी घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं जो एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करते हैं।
वाराणसी शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व
वाराणसी शक्तिपीठ काशी के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में से एक है। मणिकर्णिका घाट पर माँ मणिकर्णी शक्तिपीठ की उपस्थिति इस स्थान को मोक्ष और मुक्ति का सर्वोच्च केंद्र बनाती है। काशी में मृत्यु होने पर भगवान शिव तारक मंत्र देते हैं और माँ मणिकर्णी की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है।