परिचय
Nageshwar Jyotirlinga is located near Dwarka in Gujarat. It is the tenth Jyotirlinga of Lord Shiva. Nageshwar means lord of serpents. According to mythology, a demoness named Daruka imprisoned Shiva devotees. The devotees worshipped Shiva. Lord Shiva appeared as Nageshwar, killed Daruka and established himself as Jyotirlinga here. The temple complex has a 25-meter tall statue of Lord Shiva.
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका | नागों के स्वामी का पवित्र धाम
**नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का परिचय:**
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में दसवां ज्योतिर्लिंग है। यह गुजरात राज्य में द्वारका के पास स्थित है।
"नागेश्वर" का अर्थ है "नागों के ईश्वर" - नाग अर्थात सर्प और ईश्वर अर्थात स्वामी।
**भौगोलिक स्थिति:**
- **राज्य:** गुजरात
- **स्थान:** द्वारका के पास (17 किमी)
- **समुद्र:** अरब सागर के तट के पास
- **द्वारका से दूरी:** 17 किमी
**नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा:**
**दारुका राक्षसी:**
प्राचीन काल में दारुक नामक एक शक्तिशाली राक्षस था। उसकी पत्नी का नाम दारुका था जो एक राक्षसी थी।
दारुका ने घोर तपस्या करके देवी पार्वती से वरदान प्राप्त किया था। उसे एक विशेष **दारुकावन** (जंगल) मिला था जो समुद्र में चलता था।
दारुका अत्यंत अहंकारी हो गई। वह समुद्र में व्यापारियों और यात्रियों को पकड़ लेती थी और उन्हें अपने दारुकावन में कैद कर देती थी।
**शिव भक्त सुप्रिय:**
एक बार सुप्रिय नामक एक शिव भक्त समुद्र मार्ग से यात्रा कर रहा था। उसके साथ कई अन्य यात्री भी थे।
दारुका ने उन सभी को पकड़ लिया और दारुकावन में कैद कर दिया। उसने उन्हें बहुत कष्ट दिया।
**शिव की आराधना:**
सुप्रिय ने अन्य कैदियों को भगवान शिव की पूजा करने के लिए कहा। उन्होंने कहा:
"भगवान शिव अपने भक्तों की सदा रक्षा करते हैं। हम सब मिलकर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।"
सभी कैदियों ने पूरी श्रद्धा से शिव की आराधना शुरू कर दी। वे दिन-रात शिव का नाम जपते रहे।
**भगवान शिव का प्रकट होना:**
भक्तों की प्रार्थना सुनकर भगवान शिव प्रकट हुए। उन्होंने **नागेश्वर** रूप धारण किया - सर्पों से सुशोभित।
भगवान शिव ने दारुका और उसके पति दारुक का वध किया। सभी कैदियों को मुक्त कर दिया।
**ज्योतिर्लिंग की स्थापना:**
भक्तों ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे यहीं सदा के लिए निवास करें।
भगवान शिव ने कहा:
"मैं यहां नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा विराजमान रहूंगा।"
तभी से नागेश्वर ज्योतिर्लिंग यहां स्थापित है।
**मंदिर की वास्तुकला:**
**मुख्य मंदिर:**
- सफेद पत्थर से निर्मित
- गर्भगृह में शिवलिंग
- सुंदर वास्तुकला
**विशाल शिव प्रतिमा:**
- **25 मीटर (80 फीट) ऊंची** भगवान शिव की मूर्ति
- बैठे हुए ध्यान मुद्रा में
- दूर से दिखाई देती है
- मंदिर परिसर में स्थित
**पार्वती मंदिर:**
- मुख्य मंदिर के पास
**नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा:**
१. **नागों के स्वामी**
२. **दारुका वध**
३. **विशाल शिव प्रतिमा**
४. **समुद्र तट के पास**
५. **द्वारका के पास**
**पूजा और दर्शन का समय:**
**मंदिर खुलने का समय:**
- **सुबह:** 6:00 AM से रात 9:30 PM
**आरती समय:**
- प्रातः आरती: 7:00 AM
- संध्या आरती: 7:00 PM
**प्रमुख त्योहार:**
- **महाशिवरात्रि**
- **श्रावण मास**
- **नाग पंचमी**
**नागेश्वर कैसे पहुंचें:**
**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **जामनगर** (130 किमी)
- **राजकोट** (180 किमी)
**रेल मार्ग:**
- निकटतम स्टेशन: **द्वारका** (17 किमी)
**सड़क मार्ग:**
- द्वारका से: 17 किमी
- अहमदाबाद से: 430 किमी
**ठहरने की व्यवस्था:**
- द्वारका में होटल
- धर्मशालाएं
**आसपास के दर्शनीय स्थल:**
१. **द्वारकाधीश मंदिर** - कृष्ण मंदिर (17 किमी)
२. **बेट द्वारका** - द्वीप
३. **रुक्मिणी मंदिर**
४. **गोमती घाट**
५. **सोमनाथ** (225 किमी)
**महत्वपूर्ण तथ्य:**
- दसवां ज्योतिर्लिंग
- द्वारका के पास
- 25 मीटर ऊंची शिव प्रतिमा
- नागों के स्वामी
- समुद्र तट के पास
🙏 हर हर महादेव 🙏
🙏 जय नागेश्वर 🙏