परिचय
Govardhan Parvat is sacred hill in Mathura district, Uttar Pradesh. Krishna lifted on little finger for 7 days. Protected Brajwasis from Indra's anger. 21 km parikrama auspicious. Mukharvind, Mansi Ganga, Radhakund, Kusum Sarovar prominent. Govardhan stones worshipable. Annakut puja after Diwali. Lakhs of devotees. 25 km from Mathura-Vrindavan. Braj parikrama.
गोवर्धन पर्वत परिक्रमा | कृष्ण ने उठाया पर्वत उत्तर प्रदेश
**गोवर्धन पर्वत का परिचय:**
गोवर्धन पर्वत **उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले** में स्थित एक पवित्र पहाड़ी है।
**स्थान:**
- **राज्य:** उत्तर प्रदेश
- **जिला:** मथुरा
- **कस्बा:** गोवर्धन
- **मथुरा से:** 25 किमी
- **वृंदावन से:** 25 किमी
- **दिल्ली से:** 165 किमी
**गोवर्धन उठाने की कथा:**
**इंद्र पूजा:**
द्वापर युग में **ब्रजवासी** (गोकुल, वृंदावन के निवासी) हर वर्ष **इंद्र देव** की पूजा करते थे।
इंद्र वर्षा के देवता हैं। ब्रजवासी उनसे वर्षा की प्रार्थना करते थे।
**बालक कृष्ण का सुझाव:**
एक बार **बालक कृष्ण** ने कहा:
"हे ब्रजवासियों! इंद्र की पूजा क्यों करते हो? **गोवर्धन पर्वत** की पूजा करो। यही हमें घास, पानी देता है। यही हमारी गायों का पालन करता है।"
**ब्रजवासियों ने गोवर्धन पूजा:**
ब्रजवासियों ने कृष्ण की बात मानी और **गोवर्धन पर्वत** की पूजा की। उन्होंने **अन्नकूट** (56 भोग) बनाकर पर्वत को अर्पित किया।
**इंद्र का क्रोध:**
इंद्र देव **क्रोधित** हो गए। उन्होंने सोचा:
"इन ब्रजवासियों ने मेरी पूजा छोड़ दी! मैं इन्हें दंड दूंगा।"
इंद्र ने **घनघोर वर्षा** शुरू कर दी। लगातार वर्षा होने लगी।
**7 दिन की मूसलधार बारिश:**
**7 दिन और 7 रात** लगातार **मूसलधार बारिश** हुई। बाढ़ आ गई। ब्रजवासी और गायें भयभीत हो गए।
**कृष्ण का चमत्कार:**
भगवान कृष्ण ने **गोवर्धन पर्वत** को अपनी **छोटी उंगली (कनिष्ठा)** पर उठा लिया!
पर्वत **छाता** की तरह हो गया। सभी ब्रजवासी, गायें, बछड़े पर्वत के **नीचे सुरक्षित** हो गए।
**7 दिन तक** कृष्ण ने पर्वत को उंगली पर धारण किया। कोई बारिश उन तक नहीं पहुंची।
**इंद्र की हार:**
इंद्र समझ गए कि कृष्ण साधारण बालक नहीं हैं। वे **भगवान** हैं।
इंद्र ने वर्षा बंद की और कृष्ण से **क्षमा** मांगी।
**गोवर्धन की पूजा:**
तभी से **गोवर्धन पर्वत** पूजनीय हो गया। इसे **गिरिराज** (पर्वतों का राजा) कहते हैं।
**गोवर्धन परिक्रमा:**
**दूरी:** लगभग **21 किमी** (पैदल)
**समय:** 5-7 घंटे (पैदल चलने पर)
**महत्व:**
गोवर्धन परिक्रमा करना अत्यंत **पुण्यदायी** माना जाता है। मान्यता है कि:
- सभी पापों का नाश
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
- कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है
**परिक्रमा मार्ग के प्रमुख स्थल:**
**1. मुखारविंद मंदिर:**
**मुखारविंद** = गोवर्धन का मुख (चेहरा)
यहां से परिक्रमा शुरू होती है। मंदिर में कृष्ण की मूर्ति है।
**2. मानसी गंगा:**
**मानसी गंगा** = मन से बुलाई गई गंगा
कथा: कृष्ण ने अपने **मन की शक्ति** से **गंगा** को बुलाया। एक तालाब बन गया - मानसी गंगा।
पवित्र कुंड। स्नान करना शुभ।
**3. कुसुम सरोवर:**
अत्यंत सुंदर सरोवर। राजा सुदर्शन ने बनवाया।
कथा: राधा रानी यहां **फूल (कुसुम) चुनती** थीं।
घाट पर बैठकर सूर्यास्त देखना लोकप्रिय।
**4. राधाकुंड:**
**सबसे पवित्र कुंड** माना जाता है। राधा रानी से जुड़ा।
श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं। अत्यंत पुण्यदायी।
**5. दान घाटी:**
कथा: कृष्ण ने यहां **गोपियों से मक्खन का दान** लिया था। प्रसिद्ध लीला स्थल।
**गोवर्धन शिलाएं:**
गोवर्धन पर्वत की **शिलाएं (पत्थर)** पूजनीय मानी जाती हैं।
मान्यता है ये **शालिग्राम** की तरह पवित्र हैं। लोग इन्हें घर ले जाकर पूजते हैं।
**गोवर्धन पूजा (अन्नकूट):**
**समय:** **दीपावली के अगले दिन** (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)
**पूजा विधि:**
**अन्नकूट** = अन्न का पहाड़
गोवर्धन पर्वत के **आकार का अन्न** (56 भोग) बनाया जाता है:
- चावल, दाल, सब्जी, रोटी
- मिठाई, फल
- कुल 56 प्रकार के व्यंजन
इसे **गोवर्धन पर्वत की पूजा** के रूप में अर्पित किया जाता है।
**उत्सव:**
गोवर्धन पूजा के दिन **लाखों श्रद्धालु** गोवर्धन आते हैं। पूरे ब्रज में उत्सव होता है।
**गोवर्धन कैसे पहुंचें:**
**मथुरा से:** 25 किमी (बस/टैक्सी)
**वृंदावन से:** 25 किमी
**दिल्ली से:** 165 किमी
**ठहरने की व्यवस्था:**
गोवर्धन में धर्मशालाएं और छोटे होटल उपलब्ध हैं।
**महत्वपूर्ण तथ्य:**
- उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में
- कृष्ण ने 7 दिन उंगली पर उठाया
- इंद्र से ब्रजवासियों की रक्षा
- 21 किमी की परिक्रमा पुण्यदायी
- मुखारविंद, मानसी गंगा, राधाकुंड प्रमुख
- गोवर्धन शिलाएं पूजनीय
- दीपावली बाद अन्नकूट पूजा
- लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष
🙏 गोवर्धन धारी की जय 🙏
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏