होम / Tirth Sthal / गोवर्धन पर्वत परिक्रमा | कृष्ण ने उठाया पर्वत उत्तर प्रदेश

गोवर्धन पर्वत परिक्रमा उत्तर प्रदेश - कृष्ण ने उठाया था पर्वत

गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित पवित्र पहाड़ी है जिसे भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर उठाकर 7 दिन तक धारण किया था। द्वापर युग में इंद्र के क्रोध से ब्रजवासियों और गायों की रक्षा के लिए। 21 किमी की परिक्रमा अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। मुखारविंद मंदिर, मानसी गंगा, कुसुम सरोवर, राधाकुंड, दान घाटी प्रमुख स्थल। गोवर्धन की शिलाएं पूजनीय। दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)। लाखों श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं। मथुरा-वृंदावन से 25 किमी। ब्रज की प्रमुख परिक्रमा।

प्रसिद्ध मंदिर
📖

परिचय

गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में पवित्र पहाड़ी। कृष्ण ने छोटी उंगली पर 7 दिन उठाया। इंद्र के क्रोध से ब्रजवासियों की रक्षा। 21 किमी परिक्रमा पुण्यदायी। मुखारविंद, मानसी गंगा, राधाकुंड, कुसुम सरोवर प्रमुख। गोवर्धन शिलाएं पूजनीय। दीपावली बाद अन्नकूट पूजा। लाखों श्रद्धालु। मथुरा-वृंदावन से 25 किमी। ब्रज परिक्रमा।

Govardhan Parvat is sacred hill in Mathura district, Uttar Pradesh. Krishna lifted on little finger for 7 days. Protected Brajwasis from Indra's anger. 21 km parikrama auspicious. Mukharvind, Mansi Ganga, Radhakund, Kusum Sarovar prominent. Govardhan stones worshipable. Annakut puja after Diwali. Lakhs of devotees. 25 km from Mathura-Vrindavan. Braj parikrama.

गोवर्धन पर्वत परिक्रमा | कृष्ण ने उठाया पर्वत उत्तर प्रदेश

PDF
🙏 गोवर्धन पर्वत 🙏

**गोवर्धन पर्वत का परिचय:**

गोवर्धन पर्वत **उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले** में स्थित एक पवित्र पहाड़ी है।

**स्थान:**
- **राज्य:** उत्तर प्रदेश
- **जिला:** मथुरा
- **कस्बा:** गोवर्धन
- **मथुरा से:** 25 किमी
- **वृंदावन से:** 25 किमी
- **दिल्ली से:** 165 किमी

**गोवर्धन उठाने की कथा:**

**इंद्र पूजा:**

द्वापर युग में **ब्रजवासी** (गोकुल, वृंदावन के निवासी) हर वर्ष **इंद्र देव** की पूजा करते थे।

इंद्र वर्षा के देवता हैं। ब्रजवासी उनसे वर्षा की प्रार्थना करते थे।

**बालक कृष्ण का सुझाव:**

एक बार **बालक कृष्ण** ने कहा:

"हे ब्रजवासियों! इंद्र की पूजा क्यों करते हो? **गोवर्धन पर्वत** की पूजा करो। यही हमें घास, पानी देता है। यही हमारी गायों का पालन करता है।"

**ब्रजवासियों ने गोवर्धन पूजा:**

ब्रजवासियों ने कृष्ण की बात मानी और **गोवर्धन पर्वत** की पूजा की। उन्होंने **अन्नकूट** (56 भोग) बनाकर पर्वत को अर्पित किया।

**इंद्र का क्रोध:**

इंद्र देव **क्रोधित** हो गए। उन्होंने सोचा:

"इन ब्रजवासियों ने मेरी पूजा छोड़ दी! मैं इन्हें दंड दूंगा।"

इंद्र ने **घनघोर वर्षा** शुरू कर दी। लगातार वर्षा होने लगी।

**7 दिन की मूसलधार बारिश:**

**7 दिन और 7 रात** लगातार **मूसलधार बारिश** हुई। बाढ़ आ गई। ब्रजवासी और गायें भयभीत हो गए।

**कृष्ण का चमत्कार:**

भगवान कृष्ण ने **गोवर्धन पर्वत** को अपनी **छोटी उंगली (कनिष्ठा)** पर उठा लिया!

पर्वत **छाता** की तरह हो गया। सभी ब्रजवासी, गायें, बछड़े पर्वत के **नीचे सुरक्षित** हो गए।

**7 दिन तक** कृष्ण ने पर्वत को उंगली पर धारण किया। कोई बारिश उन तक नहीं पहुंची।

**इंद्र की हार:**

इंद्र समझ गए कि कृष्ण साधारण बालक नहीं हैं। वे **भगवान** हैं।

इंद्र ने वर्षा बंद की और कृष्ण से **क्षमा** मांगी।

**गोवर्धन की पूजा:**

तभी से **गोवर्धन पर्वत** पूजनीय हो गया। इसे **गिरिराज** (पर्वतों का राजा) कहते हैं।

**गोवर्धन परिक्रमा:**

**दूरी:** लगभग **21 किमी** (पैदल)

**समय:** 5-7 घंटे (पैदल चलने पर)

**महत्व:**

गोवर्धन परिक्रमा करना अत्यंत **पुण्यदायी** माना जाता है। मान्यता है कि:
- सभी पापों का नाश
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
- कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है

**परिक्रमा मार्ग के प्रमुख स्थल:**

**1. मुखारविंद मंदिर:**

**मुखारविंद** = गोवर्धन का मुख (चेहरा)

यहां से परिक्रमा शुरू होती है। मंदिर में कृष्ण की मूर्ति है।

**2. मानसी गंगा:**

**मानसी गंगा** = मन से बुलाई गई गंगा

कथा: कृष्ण ने अपने **मन की शक्ति** से **गंगा** को बुलाया। एक तालाब बन गया - मानसी गंगा।

पवित्र कुंड। स्नान करना शुभ।

**3. कुसुम सरोवर:**

अत्यंत सुंदर सरोवर। राजा सुदर्शन ने बनवाया।

कथा: राधा रानी यहां **फूल (कुसुम) चुनती** थीं।

घाट पर बैठकर सूर्यास्त देखना लोकप्रिय।

**4. राधाकुंड:**

**सबसे पवित्र कुंड** माना जाता है। राधा रानी से जुड़ा।

श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं। अत्यंत पुण्यदायी।

**5. दान घाटी:**

कथा: कृष्ण ने यहां **गोपियों से मक्खन का दान** लिया था। प्रसिद्ध लीला स्थल।

**गोवर्धन शिलाएं:**

गोवर्धन पर्वत की **शिलाएं (पत्थर)** पूजनीय मानी जाती हैं।

मान्यता है ये **शालिग्राम** की तरह पवित्र हैं। लोग इन्हें घर ले जाकर पूजते हैं।

**गोवर्धन पूजा (अन्नकूट):**

**समय:** **दीपावली के अगले दिन** (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)

**पूजा विधि:**

**अन्नकूट** = अन्न का पहाड़

गोवर्धन पर्वत के **आकार का अन्न** (56 भोग) बनाया जाता है:
- चावल, दाल, सब्जी, रोटी
- मिठाई, फल
- कुल 56 प्रकार के व्यंजन

इसे **गोवर्धन पर्वत की पूजा** के रूप में अर्पित किया जाता है।

**उत्सव:**

गोवर्धन पूजा के दिन **लाखों श्रद्धालु** गोवर्धन आते हैं। पूरे ब्रज में उत्सव होता है।

**गोवर्धन कैसे पहुंचें:**

**मथुरा से:** 25 किमी (बस/टैक्सी)

**वृंदावन से:** 25 किमी

**दिल्ली से:** 165 किमी

**ठहरने की व्यवस्था:**

गोवर्धन में धर्मशालाएं और छोटे होटल उपलब्ध हैं।

**महत्वपूर्ण तथ्य:**

- उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में
- कृष्ण ने 7 दिन उंगली पर उठाया
- इंद्र से ब्रजवासियों की रक्षा
- 21 किमी की परिक्रमा पुण्यदायी
- मुखारविंद, मानसी गंगा, राधाकुंड प्रमुख
- गोवर्धन शिलाएं पूजनीय
- दीपावली बाद अन्नकूट पूजा
- लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष

🙏 गोवर्धन धारी की जय 🙏
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏