होम / Tirth Sthal / मणिबंध शक्तिपीठ - राजस्थान | माँ सती की कलाई का पवित्र शक्तिपीठ

मणिबंध शक्तिपीठ पुष्कर - माँ गायत्री की दिव्य पवित्र शक्तिपीठ

मणिबंध शक्तिपीठ राजस्थान के पुष्कर में विराजमान 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती की कलाई गिरी थी। माँ गायत्री रूप में यहाँ विराजमान हैं जो विद्या बुद्धि और ज्ञान की देवी हैं। पुष्कर सरोवर और ब्रह्मा मंदिर के समीप होने से यह शक्तिपीठ अत्यंत विशेष है। माँ की कृपा से भक्तों को ज्ञान आत्मशुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

51 शक्तिपीठ
📖

परिचय

मणिबंध शक्तिपीठ राजस्थान के अजमेर जिले में पुष्कर में स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती की कलाई गिरी थी। माँ गायत्री रूप में यहाँ विराजमान हैं। पुष्कर के विश्वप्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर और पवित्र सरोवर के समीप होने से यह शक्तिपीठ अत्यंत विशेष है।

Manibandh Shaktipeeth is situated at Pushkar in Ajmer district of Rajasthan. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's wrist fell. Maa Gayatri is enshrined here. Being near the world famous Brahma Temple and sacred Pushkar lake this Shaktipeeth is extremely special.

मणिबंध शक्तिपीठ - राजस्थान | माँ सती की कलाई का पवित्र शक्तिपीठ

PDF

मणिबंध शक्तिपीठ - पुष्कर की दिव्य शक्तिपीठ

मणिबंध शक्तिपीठ राजस्थान के अजमेर जिले में पुष्कर नामक स्थान पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती की कलाई गिरी थी इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।

मणिबंध का अर्थ है कलाई अर्थात हाथ का वह भाग जहाँ मणि अर्थात रत्न जड़े आभूषण पहने जाते हैं। माँ गायत्री रूप में यहाँ विराजमान हैं। पुष्कर भगवान ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर होने के कारण विश्वप्रसिद्ध है और यहाँ माँ गायत्री शक्तिपीठ की उपस्थिति पुष्कर को और भी विशेष बनाती है।

मणिबंध शक्तिपीठ का इतिहास

मणिबंध शक्तिपीठ का उल्लेख प्राचीन तंत्र ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। पुष्कर को भारत का पाँचवाँ धाम भी कहा जाता है। यहाँ का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। माँ गायत्री का यह शक्तिपीठ पुष्कर की धार्मिक परंपरा का अभिन्न अंग है।

मणिबंध शक्तिपीठ के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. माँ गायत्री गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ गायत्री की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ गायत्री पाँच मुखी हैं और दस भुजाओं वाली हैं। माँ का श्रृंगार सोने के आभूषणों से होता है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।

2. पुष्कर सरोवर
पुष्कर में पवित्र पुष्कर सरोवर स्थित है जो भारत के सबसे पवित्र सरोवरों में से एक है। यहाँ स्नान करना करोड़ों तीर्थों के बराबर माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ विशाल मेला लगता है।

3. ब्रह्मा मंदिर
पुष्कर में भगवान ब्रह्मा का विश्व का एकमात्र प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। मणिबंध शक्तिपीठ दर्शन के साथ ब्रह्मा मंदिर के दर्शन का विशेष महत्व है।

4. भैरव मंदिर
मणिबंध शक्तिपीठ के भैरव सर्वानंद रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।

5. पुष्कर के 52 घाट
पुष्कर सरोवर के किनारे 52 घाट बने हैं जहाँ श्रद्धालु स्नान और पूजा करते हैं। इनमें ब्रह्म घाट और गौ घाट सबसे प्रमुख हैं।

6. सावित्री मंदिर
पुष्कर में रत्नागिरि पर्वत पर माँ सावित्री का मंदिर स्थित है। यहाँ से पुष्कर का अद्भुत दृश्य दिखता है।

मणिबंध शक्तिपीठ की पूजा विधि

माँ गायत्री की पूजा में पीले फूल हल्दी पीले वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। गायत्री मंत्र गायत्री सहस्रनाम और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि कार्तिक पूर्णिमा और बसंत पंचमी के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।

मणिबंध शक्तिपीठ कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो पुष्कर से 145 किमी दूर है।
रेलमार्ग: अजमेर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है जो पुष्कर से 14 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: अजमेर से 14 किमी जयपुर से 145 किमी जोधपुर से 200 किमी।

मणिबंध शक्तिपीठ दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर मेला विश्वप्रसिद्ध है जिसमें लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। नवरात्रि और बसंत पंचमी के समय भी यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

मणिबंध शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व

मणिबंध शक्तिपीठ राजस्थान का सबसे प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर और माँ गायत्री शक्तिपीठ दोनों की उपस्थिति इस नगरी को अत्यंत विशेष बनाती है। माँ गायत्री की कृपा से भक्तों को विद्या बुद्धि ज्ञान और आत्मशुद्धि की प्राप्ति होती है। पुष्कर सरोवर स्नान और माँ के दर्शन से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।