परिचय
Bhramaramba Devi Temple is situated on the banks of Krishna river in Srisailam, Andhra Pradesh. It is one of the 21 Mahashaktipeeths where Goddess Sati's neck fell. Both Mallikarjuna Jyotirlinga and Bhramaramba Shaktipeeth are situated together here making it an extremely rare and sacred place.
भ्रमराम्बा देवी श्रीशैलम - महाशक्तिपीठ आंध्र प्रदेश | मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की शक्ति
भ्रमराम्बा देवी - शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग का अद्भुत संगम
भ्रमराम्बा देवी मंदिर आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले में श्रीशैलम नामक स्थान पर कृष्णा नदी के तट पर नल्लामला पहाड़ियों पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती की गर्दन गिरी थी इसीलिए यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।
श्रीशैलम एक ऐसा दुर्लभ स्थान है जहाँ एक साथ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और 51 शक्तिपीठों में से एक भ्रमराम्बा शक्तिपीठ दोनों स्थित हैं। यही कारण है कि श्रीशैलम को दक्षिण भारत का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है।
भ्रमराम्बा देवी मंदिर का इतिहास
भ्रमराम्बा देवी मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। इसका उल्लेख महाभारत और पुराणों में मिलता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने करवाया था। मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली में बनी है।
भ्रमराम्बा देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. भ्रमराम्बा देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ भ्रमराम्बा की अत्यंत तेजस्वी प्रतिमा विराजमान है। माँ का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। भ्रमर का अर्थ है भौंरा - माँ भ्रमराम्बा भौंरे के रूप में अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
भ्रमराम्बा मंदिर के समीप ही भगवान शिव का मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग स्थित है जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। एक ही परिसर में शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग दोनों के दर्शन का यह दुर्लभ अवसर श्रीशैलम को अत्यंत विशेष बनाता है।
3. कृष्णा नदी और पातालगंगा
श्रीशैलम में कृष्णा नदी को पातालगंगा कहा जाता है। यहाँ रोपवे से नदी के दर्शन और स्नान का अनुभव अत्यंत दिव्य होता है।
4. भैरव मंदिर
भ्रमराम्बा शक्तिपीठ के भैरव ईश्वर रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है।
5. श्रीशैलम बाँध
कृष्णा नदी पर बना श्रीशैलम बाँध इस क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण है। बाँध से कृष्णा नदी और नल्लामला पहाड़ियों का दृश्य अत्यंत मनोरम होता है।
भ्रमराम्बा देवी की पूजा विधि
माँ भ्रमराम्बा की पूजा में लाल फूल, सिंदूर, लाल वस्त्र और मधु का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती और ललिता सहस्रनाम का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि के समय यहाँ विशेष पूजा और महोत्सव होता है।
भ्रमराम्बा देवी कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: हैदराबाद का राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो श्रीशैलम से 230 किमी दूर है।
रेलमार्ग: मार्कापुर रोड रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है जो श्रीशैलम से 85 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: हैदराबाद से 230 किमी, कुर्नूल से 165 किमी, विजयवाड़ा से 290 किमी।
भ्रमराम्बा देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। महाशिवरात्रि, नवरात्रि और मकर संक्रांति के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। महाशिवरात्रि पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और भ्रमराम्बा शक्तिपीठ दोनों के दर्शन का विशेष महत्व है।
भ्रमराम्बा देवी का धार्मिक महत्व
श्रीशैलम भारत का एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ ज्योतिर्लिंग और महाशक्तिपीठ दोनों एक साथ स्थित हैं। इसीलिए यहाँ दर्शन का फल दोगुना माना जाता है। माँ भ्रमराम्बा की कृपा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान तांत्रिक साधकों के लिए भी विशेष सिद्धिदायक है।