होम / Tirth Sthal / मनसा देवी - सिद्ध पीठ हरिद्वार | बिल्व पर्वत की अधिष्ठात्री देवी

मनसा देवी हरिद्वार - मन की इच्छा पूर्ण करने वाली दिव्य सिद्ध पीठ

मनसा देवी उत्तराखंड के हरिद्वार में बिल्व पर्वत पर विराजमान 5 सिद्ध पीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ हैं। यहाँ माँ सती का मस्तक गिरा था। माँ मनसा देवी अपने भक्तों के मन की सभी इच्छाएँ और मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं। धागा बाँधने की अनूठी परंपरा और रोपवे से दर्शन इस यात्रा को अविस्मरणीय बनाते हैं। हरिद्वार यात्रा में माँ के दर्शन के बाद हर की पौड़ी पर गंगा आरती अवश्य देखें।

51 शक्तिपीठ सिद्ध पीठ
📖

परिचय

मनसा देवी मंदिर उत्तराखंड के हरिद्वार में बिल्व पर्वत पर स्थित है। यह 5 सिद्ध पीठों में से एक है जहाँ माँ सती का मस्तक गिरा था। माँ मनसा देवी मन की सभी इच्छाएँ पूर्ण करने वाली देवी हैं। हरिद्वार यात्रा में माँ के दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।

Mansa Devi Temple is situated on Bilwa Parvat in Haridwar, Uttarakhand. It is one of the 5 Siddha Peeths where Goddess Sati's head fell. Maa Mansa Devi is the goddess who fulfills all the wishes of the mind. Her darshan is considered mandatory during Haridwar Yatra.

मनसा देवी - सिद्ध पीठ हरिद्वार | बिल्व पर्वत की अधिष्ठात्री देवी

PDF

मनसा देवी - मन की इच्छाएँ पूर्ण करने वाली सिद्ध शक्तिपीठ

मनसा देवी मंदिर उत्तराखंड के हरिद्वार में बिल्व पर्वत पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक और 5 सिद्ध पीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का मस्तक गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।

मनसा का अर्थ है मन की इच्छा। माँ मनसा देवी अपने भक्तों के मन की सभी इच्छाएँ और मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं। हरिद्वार आने वाले प्रत्येक भक्त के लिए हर की पौड़ी पर गंगा स्नान के साथ माँ मनसा देवी और माँ चंडी देवी के दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं तभी हरिद्वार यात्रा पूर्ण होती है।

मनसा देवी मंदिर का इतिहास

मनसा देवी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसका उल्लेख प्राचीन शास्त्रों और पुराणों में मिलता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में कश्मीर के राजा सुचेत सिंह ने करवाया था। मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी है।

मनसा देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. मनसा देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ मनसा देवी की दो प्रतिमाएँ हैं। एक प्रतिमा तीन मुख और पाँच भुजाओं वाली है और दूसरी आठ भुजाओं वाली है। माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है। यहाँ इच्छा पूर्ण होने पर धागा बाँधने और पूर्ण होने के बाद खोलने की परंपरा है।

2. धागा बाँधने की परंपरा
मनसा देवी मंदिर में एक विशेष परंपरा है जिसमें भक्त मंदिर परिसर में एक पेड़ पर धागा बाँधकर माँ से मनोकामना माँगते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर वापस आकर धागा खोलते हैं।

3. रोपवे
बिल्व पर्वत तक पहुँचने के लिए रोपवे की सुविधा उपलब्ध है। रोपवे से हरिद्वार शहर और गंगा नदी का अद्भुत दृश्य दिखता है।

4. भैरव मंदिर
मनसा देवी शक्तिपीठ के भैरव क्रोधीश रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।

5. हर की पौड़ी और गंगा आरती
मनसा देवी मंदिर के नीचे हरिद्वार का प्रसिद्ध हर की पौड़ी घाट है। यहाँ प्रतिदिन शाम को होने वाली गंगा आरती विश्वप्रसिद्ध है। माँ मनसा देवी दर्शन के बाद गंगा आरती का दर्शन अवश्य करें।

6. चंडी देवी मंदिर
मनसा देवी से कुछ दूरी पर नील पर्वत पर चंडी देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। हरिद्वार यात्रा में दोनों देवियों के दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।

मनसा देवी की पूजा विधि

माँ मनसा देवी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती देवी कवच और मनसा देवी स्तोत्र का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि कांवड़ यात्रा और गंगा दशहरा के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।

मनसा देवी कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो हरिद्वार से 35 किमी दूर है।
रेलमार्ग: हरिद्वार रेलवे स्टेशन देशभर के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: देहरादून से 54 किमी, ऋषिकेश से 24 किमी, दिल्ली से 220 किमी।

मनसा देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से अप्रैल का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि कुंभ मेला कांवड़ यात्रा और गंगा दशहरा के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। सुबह जल्दी दर्शन करने से भीड़ कम मिलती है और माँ का दिव्य श्रृंगार देखने को मिलता है।

मनसा देवी का धार्मिक महत्व

माँ मनसा देवी को हरिद्वार की सबसे जागृत और सिद्ध देवी माना जाता है। हरिद्वार आने वाले प्रत्येक भक्त के लिए माँ मनसा देवी के दर्शन अनिवार्य हैं। धागा बाँधने की परंपरा माँ की शक्ति और भक्तों की आस्था का प्रतीक है। माँ की कृपा से भक्तों के मन की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।