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हिंगलाज माता - ब्रह्मरंध्र की दिव्य महाशक्तिपीठ पाकिस्तान

हिंगलाज माता पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंगोल नदी के पावन तट पर एक प्राकृतिक गुफा में विराजमान 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत सिद्ध और पवित्र पीठ हैं। यहाँ माँ सती का ब्रह्मरंध्र गिरा था। यह एकमात्र शक्तिपीठ है जो हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की समान रूप से आस्था का केंद्र है। प्रतिवर्ष अप्रैल में आयोजित हिंगलाज यात्रा में लाखों श्रद्धालु माँ की कृपा प्राप्त करने आते हैं।

51 शक्तिपीठ
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परिचय

हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंगोल नदी के तट पर एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती का ब्रह्मरंध्र गिरा था। हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की आस्था का यह केंद्र भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे बड़े तीर्थों में से एक है।

Hinglaj Mata Temple is situated in a natural cave on the banks of Hingol river in Balochistan, Pakistan. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's Brahmarandhra fell. This center of faith of both Hindu and Muslim communities is one of the largest pilgrimage sites in the Indian subcontinent.

हिंगलाज माता - शक्तिपीठ पाकिस्तान | ब्रह्मरंध्र की पवित्र शक्तिपीठ

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हिंगलाज माता - हिंदू मुस्लिम आस्था का महाशक्तिपीठ

हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगोल नदी के तट पर हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का ब्रह्मरंध्र अर्थात सिर का ऊपरी भाग गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।

हिंगलाज माता की एक विशेषता यह है कि यह शक्तिपीठ हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की आस्था का केंद्र है। मुस्लिम समुदाय माँ हिंगलाज को नानी पीर के नाम से पूजता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे बड़े तीर्थों में से एक है।

हिंगलाज माता मंदिर का इतिहास

हिंगलाज माता मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। इसका उल्लेख महाभारत और अन्य प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि भगवान परशुराम और भगवान राम ने भी यहाँ माँ की उपासना की थी। यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है जो स्वयं माँ का स्वरूप मानी जाती है।

हिंगलाज माता के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. हिंगलाज माता गुफा मंदिर
मंदिर एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है जहाँ माँ हिंगलाज की पिंडी रूप में पूजा होती है। गुफा के भीतर माँ का स्वरूप अत्यंत दिव्य और चमत्कारी है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।

2. चंद्रकूप ज्वालामुखी
मंदिर के समीप चंद्रकूप नामक एक कीचड़ ज्वालामुखी है जो प्राकृतिक गैस से सक्रिय रहता है। तीर्थयात्री यहाँ नारियल चढ़ाते हैं।

3. अघोर कुंड
मंदिर के समीप अघोर कुंड नामक एक पवित्र कुंड है जहाँ स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

4. भैरव मंदिर
हिंगलाज शक्तिपीठ के भैरव भीमलोचन रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है।

5. हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान
मंदिर हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता अत्यंत मनोरम है।

हिंगलाज यात्रा

प्रतिवर्ष अप्रैल माह में हिंगलाज यात्रा का आयोजन होता है जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा हिंदू धार्मिक उत्सव है। इसमें पाकिस्तान भारत और विश्वभर से लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यात्रा में चार दिन का कठिन पैदल मार्ग तय करना होता है।

हिंगलाज माता कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: कराची अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो हिंगलाज से 250 किमी दूर है।
रेलमार्ग: लियारी रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है।
सड़कमार्ग: कराची से 250 किमी, लास बेला से 100 किमी।

हिंगलाज माता दर्शन का सबसे अच्छा समय

अप्रैल माह में हिंगलाज यात्रा के समय यहाँ आना सर्वोत्तम है। नवरात्रि के समय भी यहाँ विशेष पूजा होती है।

हिंगलाज माता का धार्मिक महत्व

हिंगलाज माता को 51 शक्तिपीठों में सर्वप्रमुख माना जाता है। यह एकमात्र शक्तिपीठ है जो हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की समान रूप से आस्था का केंद्र है। माँ की कृपा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।