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दक्षिण कालिका कालीघाट - माँ काली का सर्वशक्तिमान आदि शक्तिपीठ

दक्षिण कालिका कालीघाट कोलकाता में आदि गंगा के तट पर विराजमान माँ काली का सर्वशक्तिमान पीठ है। 4 आदि शक्तिपीठों में चतुर्थ यह पीठ वह पवित्र स्थान है जहाँ माँ सती के दाहिने पैर की चार अँगुलियाँ गिरी थीं। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की साधना स्थली यह पीठ भारत के सबसे जागृत और सिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

4 आदि शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठ महाशक्तिपीठ
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परिचय

दक्षिण कालिका कालीघाट मंदिर कोलकाता में आदि गंगा के तट पर स्थित है। यह 4 आदि शक्तिपीठों में चतुर्थ स्थान रखता है जहाँ माँ सती के दाहिने पैर की चार अँगुलियाँ गिरी थीं। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की आस्था का यह केंद्र भारत के सबसे सिद्ध शक्तिपीठों में से एक है।

Dakshina Kalika Kalighat Temple is situated on the banks of Adi Ganga in Kolkata. It holds the fourth place among the 4 Adi Shaktipeeths where Goddess Sati's four toes of the right foot fell. This center of faith of Ramakrishna Paramhansa and Swami Vivekananda is one of the most powerful Shaktipeeths in India.

दक्षिण कालिका कालीघाट - आदि शक्तिपीठ कोलकाता | माँ काली का सर्वशक्तिमान पीठ

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दक्षिण कालिका कालीघाट - माँ काली का महाशक्तिपीठ

दक्षिण कालिका मंदिर जिसे कालीघाट मंदिर के नाम से जाना जाता है, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आदि गंगा (हुगली नदी की शाखा) के तट पर स्थित है। यह 52 शक्तिपीठों में से एक और 4 आदि शक्तिपीठों में चतुर्थ और अंतिम स्थान रखता है। यहाँ माँ सती के दाहिने पैर की चार अँगुलियाँ गिरी थीं।

कालीघाट को माँ काली का सबसे शक्तिशाली और सिद्ध पीठ माना जाता है। यहाँ माँ दक्षिण कालिका रूप में विराजमान हैं जो अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और शत्रुओं का नाश करती हैं। स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस इस मंदिर में नियमित दर्शन करते थे।

कालीघाट मंदिर का इतिहास

कालीघाट मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। वर्तमान मंदिर का निर्माण सन 1809 में सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने करवाया था। इससे पहले यहाँ एक छोटा मंदिर था। मंदिर की वास्तुकला बंगाली आटचाला शैली में बनी है। रामकृष्ण परमहंस यहाँ के पुजारी रह चुके हैं और उन्होंने माँ काली की यहाँ साक्षात अनुभूति की थी।

कालीघाट के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. कालीघाट मंदिर गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ दक्षिण कालिका की अद्भुत प्रतिमा विराजमान है। माँ की जिह्वा सोने की बनी है और आँखें सोने की हैं। माँ का मुख अत्यंत तेजस्वी और भव्य है। यहाँ बकरे की बलि की परंपरा है जो आज भी जारी है।

2. नाट मंदिर
गर्भगृह के सामने नाट मंदिर है जहाँ भक्त बैठकर माँ की आराधना करते हैं। यहाँ नियमित रूप से भजन कीर्तन होता रहता है।

3. कुंड
मंदिर परिसर में एक पवित्र कुंड है जिसमें स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है। इस कुंड को माँ काली का स्नान स्थल कहा जाता है।

4. भैरव मंदिर
कालीघाट के भैरव नकुलेश हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।

5. रामकृष्ण परमहंस स्थान
मंदिर के समीप वह स्थान है जहाँ रामकृष्ण परमहंस ने माँ काली की साधना की थी और उन्हें माँ के साक्षात दर्शन हुए थे। यह स्थान भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है।

6. दक्षिणेश्वर काली मंदिर
कालीघाट से कुछ दूरी पर दक्षिणेश्वर काली मंदिर भी स्थित है जहाँ रामकृष्ण परमहंस ने वर्षों साधना की थी। दोनों मंदिरों के दर्शन एक साथ किए जा सकते हैं।

कालीघाट कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कोलकाता में ही है जो मंदिर से 17 किमी दूर है।
रेलमार्ग: कोलकाता में मेट्रो रेल की कालीघाट मेट्रो स्टेशन मंदिर से मात्र 500 मीटर दूर है।
सड़कमार्ग: कोलकाता शहर से बस, टैक्सी और ऑटो आसानी से उपलब्ध हैं।

कालीघाट दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च का समय कालीघाट यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। काली पूजा, दुर्गा पूजा और नवरात्रि के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। काली पूजा पर कोलकाता में दीपावली की रात माँ काली की विशेष पूजा होती है और कालीघाट में लाखों भक्त उमड़ते हैं। सुबह 5 बजे मंगला आरती के समय दर्शन का अनुभव अत्यंत दिव्य होता है।

कालीघाट का धार्मिक महत्व

कालीघाट को माँ काली का सबसे जागृत और सिद्ध पीठ माना जाता है। स्वामी विवेकानंद ने अपनी अमेरिका यात्रा से पहले यहाँ माँ का आशीर्वाद लिया था। रामकृष्ण परमहंस ने कहा था कि माँ कालीघाट में साक्षात विराजमान हैं। यहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। यह पीठ तंत्र साधना के लिए भी अत्यंत सिद्ध माना जाता है।