परिचय
Jalandhar Shaktipeeth is situated in Jalandhar city of Punjab as Devi Talab Temple. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's left breast fell. Maa Tripuramaalini is enshrined here and bathing in Devi Talab is considered extremely auspicious.
जालंधर शक्तिपीठ - पंजाब | माँ सती के बाएँ स्तन का पवित्र शक्तिपीठ
जालंधर शक्तिपीठ - पंजाब की दिव्य शक्तिपीठ
जालंधर शक्तिपीठ पंजाब राज्य के जालंधर शहर में देवी तालाब मंदिर के रूप में स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का बायाँ स्तन गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
माँ त्रिपुरमालिनी रूप में यहाँ विराजमान हैं। देवी तालाब मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस शक्तिपीठ में एक पवित्र तालाब है जिसमें स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यह मंदिर पंजाब के सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है।
जालंधर शक्तिपीठ का इतिहास
जालंधर शक्तिपीठ का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण अनेक राजाओं और श्रद्धालुओं के सहयोग से हुआ है। मंदिर परिसर अत्यंत विशाल और भव्य है।
जालंधर शक्तिपीठ के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. देवी तालाब मंदिर गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ त्रिपुरमालिनी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ का श्रृंगार सोने के आभूषणों से होता है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।
2. देवी तालाब
मंदिर परिसर में एक पवित्र तालाब है जिसे देवी तालाब कहते हैं। इस तालाब में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। तालाब के चारों ओर घाट बने हैं।
3. भैरव मंदिर
जालंधर शक्तिपीठ के भैरव क्षीरकंठ रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
4. श्री देवी तालाब मंदिर परिसर
मंदिर परिसर अत्यंत विशाल है जिसमें अनेक छोटे बड़े मंदिर स्थित हैं। परिसर में शिव मंदिर हनुमान मंदिर और अन्य देवी देवताओं के मंदिर भी हैं।
5. जालंधर के अन्य धार्मिक स्थल
जालंधर में इमाम नासिर दरगाह और देवी तालाब के समीप अनेक अन्य धार्मिक स्थल भी दर्शनीय हैं।
जालंधर शक्तिपीठ की पूजा विधि
माँ त्रिपुरमालिनी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती देवी कवच और त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि अष्टमी और शुक्रवार के दिन यहाँ विशेष पूजा और अनुष्ठान होते हैं।
जालंधर शक्तिपीठ कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो जालंधर से 80 किमी दूर है।
रेलमार्ग: जालंधर सिटी और जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन देशभर से जुड़े हुए हैं।
सड़कमार्ग: अमृतसर से 80 किमी, लुधियाना से 60 किमी, दिल्ली से 370 किमी।
जालंधर शक्तिपीठ दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि के समय यहाँ लाखों भक्त माँ के दर्शन के लिए आते हैं। शुक्रवार को माँ का विशेष अभिषेक और श्रृंगार होता है।
जालंधर शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व
जालंधर शक्तिपीठ पंजाब की सबसे जागृत और सिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। माँ त्रिपुरमालिनी की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है। देवी तालाब में स्नान और माँ के दर्शन से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।