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घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग - अंतिम और छोटा ज्योतिर्लिंग

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में बारहवां और अंतिम ज्योतिर्लिंग है। यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफाओं के पास स्थित है। घुश्मेश्वर को घृष्णेश्वर भी कहा जाता है। यह आकार में सबसे छोटा ज्योतिर्लिंग है लेकिन महिमा में उतना ही पवित्र। मंदिर की स्थापना की कथा घुश्मा नामक एक सती स्त्री से जुड़ी है। घुश्मा की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे पुत्र का वरदान दिया और यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए। मंदिर लाल पत्थरों से बना है और हेमाद्रि शैली में निर्मित है। यह विश्व प्रसिद्ध एलोरा गुफाओं के बिल्कुल पास है।

प्रसिद्ध मंदिर शिव के 12 ज्योतिर्लिंग
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परिचय

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफाओं के पास स्थित है। यह भगवान शिव का बारहवां और अंतिम ज्योतिर्लिंग है। घुश्मेश्वर को घृष्णेश्वर भी कहते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, घुश्मा नामक भक्त स्त्री की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर निवास किया। यह आकार में सबसे छोटा ज्योतिर्लिंग है। मंदिर लाल पत्थर से बना है और हेमाद्रि स्थापत्य शैली में निर्मित है। विश्व धरोहर एलोरा गुफाएं यहां से 500 मीटर दूर हैं। अहिल्याबाई होलकर ने 18वीं शताब्दी में मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।
Ghrishneshwar Jyotirlinga is located near Ellora Caves in Aurangabad district of Maharashtra. It is the twelfth and last Jyotirlinga of Lord Shiva. Ghrishneshwar is also called Ghushmeshwar. According to mythology, pleased with the devotion of a devotee named Ghushma, Lord Shiva manifested as Jyotirlinga here. This is the smallest Jyotirlinga in size. The temple is built of red stone in Hemadri architectural style. World Heritage Ellora Caves are 500 meters away. Ahilyabai Holkar renovated the temple in the 18th century.

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग औरंगाबाद | अंतिम ज्योतिर्लिंग एलोरा के पास

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🙏 घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग 🙏

**घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग का परिचय:**

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में बारहवां और **अंतिम ज्योतिर्लिंग** है। यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफाओं के पास स्थित है।

"घुश्मेश्वर" या "घृष्णेश्वर" का नाम घुश्मा नामक भक्त से पड़ा।

**विशेष महत्व:**

- **अंतिम ज्योतिर्लिंग** - 12वां और अंतिम
- **सबसे छोटा** - आकार में सबसे छोटा
- **एलोरा के पास** - विश्व धरोहर के पास
- **अहिल्याबाई होलकर द्वारा पुनर्निर्मित**

**भौगोलिक स्थिति:**

- **राज्य:** महाराष्ट्र
- **जिला:** औरंगाबाद
- **स्थान:** दौलताबाद तालुका
- **एलोरा से दूरी:** 500 मीटर
- **औरंगाबाद से दूरी:** 30 किमी

**घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा:**

**सुधर्म ब्राह्मण और उनकी दो पत्नियां:**

प्राचीन काल में सुधर्म नामक एक धर्मात्मा ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम सुदेहा था। सुदेहा सुंदर और गुणवान थी लेकिन उसके कोई संतान नहीं थी।

सुदेहा को इस बात का बहुत दुख था। उसने अपनी छोटी बहन घुश्मा का विवाह अपने पति से करवा दिया ताकि वंश आगे बढ़े।

**घुश्मा की भक्ति:**

घुश्मा अत्यंत धर्मात्मा और शिव भक्त थी। वह प्रतिदिन मिट्टी से शिवलिंग बनाती और पूजा करती। पूजा के बाद उन शिवलिंगों को पास के सरोवर में विसर्जित कर देती थी।

घुश्मा की भक्ति सच्ची और निष्काम थी। भगवान शिव उसकी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न थे।

**पुत्र का जन्म:**

कुछ समय बाद भगवान शिव की कृपा से घुश्मा को एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। घर में खुशियां छा गईं।

लेकिन सुदेहा को बहुत ईर्ष्या हुई। उसे लगा कि घुश्मा को पुत्र मिल गया और उसे नहीं।

**सुदेहा की ईर्ष्या:**

ईर्ष्या में अंधी होकर सुदेहा ने एक रात घुश्मा के पुत्र की हत्या कर दी और उसके शरीर को उसी सरोवर में फेंक दिया जहां घुश्मा शिवलिंग विसर्जित करती थी।

सुबह जब घुश्मा को अपने पुत्र की मृत्यु का पता चला तो वह अत्यंत दुखी हुई। लेकिन उसने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी।

**घुश्मा का धैर्य:**

घुश्मा रोई लेकिन किसी पर आरोप नहीं लगाया। उसने कहा:

"यह भगवान की इच्छा है। जो भी हुआ, ठीक हुआ।"

वह पहले की तरह ही शिवलिंग की पूजा करती रही। उसकी भक्ति में कोई कमी नहीं आई।

**भगवान शिव का प्रकट होना:**

घुश्मा की निष्काम भक्ति और धैर्य से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने प्रकट होकर कहा:

"हे घुश्मा! तुम्हारी भक्ति और धैर्य अद्भुत है। मैं तुमसे अत्यंत प्रसन्न हूं। मांग, तुम्हें क्या चाहिए?"

**पुत्र का पुनर्जीवन:**

घुश्मा ने कहा:

"हे प्रभु! मुझे कुछ नहीं चाहिए। लेकिन यदि आप प्रसन्न हैं तो मेरे पुत्र को जीवित कर दें।"

भगवान शिव ने घुश्मा के पुत्र को जीवित कर दिया। वह सरोवर से बाहर आया।

साथ ही भगवान शिव ने कहा:

"मैं यहां **घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग** के रूप में सदा के लिए निवास करूंगा। तुम्हारे नाम पर यह स्थान प्रसिद्ध होगा।"

**सुदेहा का पश्चाताप:**

सुदेहा ने अपनी गलती मान ली और क्षमा मांगी। घुश्मा ने उसे माफ कर दिया।

तभी से भगवान शिव घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां विराजमान हैं।

**मंदिर का इतिहास:**

**प्राचीन काल:**
- यादव राजवंश द्वारा निर्माण

**18वीं शताब्दी:**
- **अहिल्याबाई होलकर** ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया (1760-1765)
- वर्तमान संरचना उन्हीं की देन है

**मंदिर की वास्तुकला:**

**संरचना:**
- लाल पत्थर से निर्मित
- हेमाद्रि शैली (मराठा वास्तुकला)
- पांच स्तरीय शिखर
- छोटा लेकिन सुंदर

**गर्भगृह:**
- छोटा शिवलिंग (सबसे छोटा ज्योतिर्लिंग)
- पूर्वमुखी मंदिर

**विशेष वास्तु:**
- सुंदर नक्काशी
- गणेश मूर्ति
- नंदी मंडप

**शिवालय सरोवर:**
- मंदिर के पास पवित्र सरोवर
- घुश्मा शिवलिंग यहीं विसर्जित करती थी

**घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा:**

१. **अंतिम ज्योतिर्लिंग** - 12वां और अंतिम
२. **सबसे छोटा** - आकार में छोटा, महिमा में महान
३. **घुश्मा की भक्ति** - निष्काम भक्ति का प्रतीक
४. **एलोरा के पास** - विश्व धरोहर के निकट
५. **अहिल्याबाई होलकर की देन**

**पूजा और दर्शन का समय:**

**मंदिर खुलने का समय:**
- **सुबह:** 5:30 AM से रात 9:30 PM

**आरती समय:**
- प्रातः आरती: 6:00 AM
- संध्या आरती: 7:00 PM

**प्रमुख त्योहार:**
- **महाशिवरात्रि**
- **श्रावण मास**

**घुश्मेश्वर कैसे पहुंचें:**

**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **औरंगाबाद** (30 किमी)

**रेल मार्ग:**
- निकटतम स्टेशन: **औरंगाबाद** (30 किमी)

**सड़क मार्ग:**
- औरंगाबाद से: 30 किमी
- मुंबई से: 340 किमी
- नियमित बस सेवा

**ठहरने की व्यवस्था:**
- औरंगाबाद में होटल
- एलोरा के पास होटल

**आसपास के दर्शनीय स्थल:**

१. **एलोरा गुफाएं** - विश्व धरोहर (500 मीटर)
२. **दौलताबाद किला** (15 किमी)
३. **अजंता गुफाएं** (100 किमी)
४. **बीबी का मकबरा** - औरंगाबाद
५. **पनचक्की** - औरंगाबाद

**विशेष जानकारी:**

- एलोरा गुफाएं अवश्य देखें
- छोटा मंदिर - दर्शन जल्दी हो जाते हैं
- औरंगाबाद में ठहरना बेहतर
- अजंता-एलोरा दोनों देखें

**यात्रा का सर्वोत्तम समय:**

- **अक्टूबर से मार्च** - मौसम अच्छा
- **महाशिवरात्रि** - विशेष दर्शन

**महत्वपूर्ण तथ्य:**

- बारहवां और अंतिम ज्योतिर्लिंग
- सबसे छोटा ज्योतिर्लिंग
- घुश्मा की भक्ति कथा
- एलोरा गुफाओं के पास
- अहिल्याबाई होलकर द्वारा पुनर्निर्मित
- लाल पत्थर का सुंदर मंदिर

🙏 हर हर महादेव 🙏
🙏 जय घुश्मेश्वर 🙏
🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏