परिचय
Mahalakshmi Devi Temple is situated on the banks of Panchaganga river in Kolhapur, Maharashtra. It is one of the 21 Mahashaktipeeths where Goddess Sati's eyes fell. Maa Mahalakshmi is the goddess of wealth and prosperity and Kolhapur is called the Dakshina Kashi.
महालक्ष्मी देवी कोल्हापुर - महाशक्तिपीठ महाराष्ट्र | दक्षिण काशी की अधिष्ठात्री देवी
महालक्ष्मी देवी कोल्हापुर - धन और वैभव की महाशक्तिपीठ
महालक्ष्मी देवी मंदिर महाराष्ट्र राज्य के कोल्हापुर शहर में पंचगंगा नदी के तट पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती की आँखें गिरी थीं इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
कोल्हापुर की महालक्ष्मी देवी को साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। महाराष्ट्र में तुलजापुर की तुलजा भवानी, कोल्हापुर की महालक्ष्मी, माहुर की रेणुका देवी और सप्तश्रृंगी देवी को साढ़े तीन शक्तिपीठ कहा जाता है। कोल्हापुर को दक्षिण काशी भी कहते हैं।
महालक्ष्मी देवी मंदिर का इतिहास
महालक्ष्मी देवी मंदिर का इतिहास 7वीं शताब्दी से भी पुराना है। वर्तमान मंदिर का निर्माण चालुक्य राजाओं ने करवाया था। मंदिर हेमाडपंथी स्थापत्य शैली में बना है। मंदिर की एक विशेषता यह है कि वर्ष में एक बार किरणोत्सव के समय सूर्य की किरणें सीधे माँ के चरणों पर पड़ती हैं।
महालक्ष्मी देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. महालक्ष्मी देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ महालक्ष्मी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ की प्रतिमा 40 किलोग्राम सोने के आभूषणों से सुसज्जित है। माँ के चार हाथों में माला, ढाल, खड्ग और पानपात्र हैं।
2. किरणोत्सव
प्रतिवर्ष जनवरी और नवंबर माह में किरणोत्सव के समय सूर्य की किरणें सीधे माँ महालक्ष्मी के चरणों पर पड़ती हैं। यह प्राचीन मंदिर की वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है और इस समय हजारों भक्त विशेष दर्शन के लिए आते हैं।
3. भैरव मंदिर
महालक्ष्मी शक्तिपीठ के भैरव क्रमदीश्वर रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
4. पंचगंगा नदी
मंदिर के समीप पंचगंगा नदी बहती है जिसमें स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। नदी के तट पर बने घाटों पर श्रद्धालु स्नान करके माँ के दर्शन करते हैं।
5. कोल्हापुर महल
कोल्हापुर में छत्रपति शाहू महाराज का भव्य महल भी दर्शनीय है जो अब संग्रहालय में परिवर्तित हो चुका है।
महालक्ष्मी देवी की पूजा विधि
माँ महालक्ष्मी की पूजा में कमल पुष्प, हल्दी, कुमकुम, पीले वस्त्र और मिठाई का विशेष महत्व है। श्री सूक्त, कनकधारा स्तोत्र और ललिता सहस्रनाम का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि, दीपावली और शुक्रवार के दिन यहाँ विशेष पूजा होती है।
महालक्ष्मी देवी कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: कोल्हापुर हवाई अड्डा शहर से 10 किमी दूर है। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 375 किमी दूर है।
रेलमार्ग: कोल्हापुर रेलवे स्टेशन मंदिर से मात्र 3 किमी दूर है और देशभर से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: पुणे से 230 किमी, मुंबई से 375 किमी, गोवा से 200 किमी।
महालक्ष्मी देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। किरणोत्सव (जनवरी-नवंबर), नवरात्रि और दीपावली के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। शुक्रवार को माँ का विशेष अभिषेक और श्रृंगार होता है।
महालक्ष्मी देवी का धार्मिक महत्व
कोल्हापुर की महालक्ष्मी देवी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। माँ महालक्ष्मी की कृपा से भक्तों के जीवन में धन, सुख और समृद्धि आती है। व्यापारी वर्ग और उद्योगपति विशेष रूप से माँ की कृपा प्राप्त करने यहाँ आते हैं। यहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।