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मानस शक्तिपीठ तिब्बत - कैलाश मानसरोवर की दुर्लभ दिव्य शक्तिपीठ

मानस शक्तिपीठ तिब्बत में विश्वप्रसिद्ध मानसरोवर झील के पावन तट पर कैलाश पर्वत के समीप विराजमान 51 शक्तिपीठों में से सबसे दुर्लभ और पवित्र पीठ है। यहाँ माँ सती का दाहिना हाथ गिरा था। माँ दाक्षायणी रूप में यहाँ विराजमान हैं। भगवान शिव के कैलाश और माँ के इस शक्तिपीठ के एक ही क्षेत्र में होने से यहाँ दर्शन का फल अत्यंत विशेष और दुर्लभ माना जाता है।

51 शक्तिपीठ
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परिचय

मानस शक्तिपीठ तिब्बत में मानसरोवर झील के तट पर कैलाश पर्वत के समीप स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती का दाहिना हाथ गिरा था। माँ दाक्षायणी रूप में यहाँ विराजमान हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा में इस शक्तिपीठ के दर्शन का सुअवसर मिलता है।

Manas Shaktipeeth is situated on the banks of Mansarovar lake near Kailash Parvat in Tibet. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's right hand fell. Maa Dakshayani is enshrined here. The opportunity to visit this Shaktipeeth comes during the Kailash Mansarovar Yatra.

मानस शक्तिपीठ - तिब्बत | माँ सती के दाहिने हाथ का पवित्र शक्तिपीठ

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मानस शक्तिपीठ - कैलाश मानसरोवर की दिव्य शक्तिपीठ

मानस शक्तिपीठ तिब्बत में विश्वप्रसिद्ध मानसरोवर झील के तट पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत दुर्लभ पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का दाहिना हाथ गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।

मानस शक्तिपीठ उन दुर्लभ शक्तिपीठों में से एक है जो कैलाश पर्वत के समीप मानसरोवर झील के तट पर स्थित है। यहाँ माँ दाक्षायणी रूप में विराजमान हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान इस शक्तिपीठ के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। भगवान शिव का कैलाश पर्वत और माँ सती का शक्तिपीठ एक ही क्षेत्र में होना इस स्थान को अत्यंत विशेष बनाता है।

मानस शक्तिपीठ का महत्व

मानस शक्तिपीठ को सभी शक्तिपीठों में सबसे दुर्लभ और विशेष माना जाता है। यह समुद्र तल से लगभग 4500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ पहुँचना अत्यंत कठिन है लेकिन माँ के दर्शन का फल भी उतना ही विशेष और दुर्लभ माना जाता है।

मानस शक्तिपीठ के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. माँ दाक्षायणी मंदिर
मानसरोवर झील के तट पर माँ दाक्षायणी का मंदिर स्थित है। माँ दाक्षायणी माँ सती का ही नाम है क्योंकि वे दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं इसीलिए दाक्षायणी कहलाती हैं।

2. मानसरोवर झील
मानसरोवर झील विश्व की सबसे ऊँची और पवित्र झीलों में से एक है। यहाँ स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। झील का जल अत्यंत स्वच्छ और नीला है। मानसरोवर में स्नान और आचमन से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है।

3. कैलाश पर्वत
मानसरोवर झील के उत्तर में भगवान शिव का निवास कैलाश पर्वत स्थित है। कैलाश पर्वत की परिक्रमा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र परिक्रमाओं में से एक है।

4. राक्षसताल
मानसरोवर के समीप राक्षसताल नामक झील भी है। इन दोनों झीलों के बीच से एक नहर निकलती है।

5. भैरव मंदिर
मानस शक्तिपीठ के भैरव अमर रूप में पूजे जाते हैं। यहाँ भैरव की उपासना का विशेष महत्व है।

मानस शक्तिपीठ कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: लhasa हवाई अड्डा तिब्बत में सबसे नजदीक है।
सड़कमार्ग: भारत से कैलाश मानसरोवर यात्रा दो मार्गों से होती है। पहला उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से और दूसरा सिक्किम के नाथुला दर्रे से।
विशेष यात्रा: भारत सरकार प्रतिवर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन करती है जिसमें पंजीकरण कराना होता है।

मानस शक्तिपीठ दर्शन का सबसे अच्छा समय

जून से सितंबर का समय कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। यात्रा के लिए पहले से भारत सरकार के पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। शारीरिक रूप से स्वस्थ और मजबूत यात्री ही इस कठिन यात्रा को कर सकते हैं।

मानस शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व

मानस शक्तिपीठ को सभी शक्तिपीठों में सबसे दुर्लभ और विशेष माना जाता है क्योंकि यह कैलाश पर्वत के समीप स्थित है। भगवान शिव के कैलाश और माँ सती के मानस शक्तिपीठ के एक ही क्षेत्र में होने से यहाँ शिव और शक्ति दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है। मानसरोवर स्नान और माँ दाक्षायणी के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है।