परिचय
Dwarka is the most sacred city of Gujarat situated on the coast of Arabian Sea. It is the capital of Lord Krishna and one of the Char Dhams. It holds the seventh place among the Sapta Puri - seven cities that grant Moksha.
द्वारका - भगवान कृष्ण की राजधानी | सप्त पुरी मोक्षदायिनी पवित्र नगरी
द्वारका - भगवान श्री कृष्ण की स्वर्णिम राजधानी
द्वारका गुजरात राज्य में अरब सागर के तट पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र नगरी है। हिंदू धर्म की सात मोक्षदायिनी नगरियों (सप्त पुरी) में द्वारका को सप्तम और अंतिम स्थान प्राप्त है। यह नगरी भगवान श्री कृष्ण की राजधानी थी जहाँ उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय बिताया।
द्वारका चार धामों में से एक है। शंकराचार्य जी ने यहाँ शारदा पीठ की स्थापना की थी। मान्यता है कि भगवान कृष्ण के स्वर्गारोहण के बाद यह नगरी समुद्र में डूब गई थी और वर्तमान द्वारका उसी प्राचीन नगरी के ऊपर बसी है।
द्वारका के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. द्वारकाधीश मंदिर
द्वारकाधीश मंदिर द्वारका का सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिर है। यह भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है जहाँ वे द्वारकाधीश अर्थात द्वारका के राजा के रूप में विराजमान हैं। यह मंदिर 5 मंजिला है और इसका शिखर 78 मीटर ऊँचा है। मंदिर के शिखर पर 84 फीट लंबी ध्वजा फहराती है।
2. बेट द्वारका
बेट द्वारका एक छोटा द्वीप है जो मुख्य द्वारका से नाव द्वारा पहुँचा जाता है। मान्यता है कि यह भगवान कृष्ण का वास्तविक निवास स्थान था। यहाँ कृष्ण जी की प्राचीन मूर्ति के दर्शन होते हैं।
3. गोमती घाट
गोमती नदी और अरब सागर के संगम पर स्थित गोमती घाट द्वारका का प्रमुख घाट है। यहाँ गोमती नदी में स्नान को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। 56 सीढ़ियों वाले इस घाट पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु स्नान करते हैं।
4. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
द्वारका से 17 किमी दूर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ भगवान शिव नागेश्वर रूप में विराजमान हैं। बाहर विशाल शिव प्रतिमा दर्शनीय है।
5. रुक्मिणी देवी मंदिर
द्वारका से 2 किमी दूर रुक्मिणी देवी मंदिर स्थित है जो भगवान कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी को समर्पित है। यह एक अत्यंत प्राचीन और सुंदर मंदिर है।
6. शारदा पीठ
आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित शारदा पीठ हिंदू धर्म के चार प्रमुख पीठों में से एक है। यह पीठ द्वारकाधीश मंदिर के समीप स्थित है।
7. सुदामा सेतु
गोमती नदी पर बना सुदामा सेतु एक झूलता पुल है जहाँ से द्वारका का अद्भुत दृश्य दिखता है। यह पुल भगवान कृष्ण के मित्र सुदामा की याद में बनाया गया है।
द्वारका कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: जामनगर हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो द्वारका से 137 किमी दूर है।
रेलमार्ग: द्वारका रेलवे स्टेशन अहमदाबाद और राजकोट से सीधे जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: अहमदाबाद से 450 किमी, राजकोट से 217 किमी, पोरबंदर से 100 किमी।
द्वारका दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय द्वारका यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। जन्माष्टमी, होली और द्वादशी के दिन यहाँ विशेष उत्सव मनाए जाते हैं। जन्माष्टमी पर यहाँ भव्य उत्सव होता है और लाखों भक्त आते हैं।
द्वारका का धार्मिक महत्व
द्वारका चार धामों में से एक होने के कारण इसका विशेष महत्व है। यह भगवान कृष्ण की कर्मभूमि और राजधानी थी। शास्त्रों में कहा गया है कि द्वारका दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। समुद्र में डूबी प्राचीन द्वारका की खोज पुरातत्व विभाग द्वारा अभी भी जारी है जो इसके ऐतिहासिक महत्व को सिद्ध करती है।