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ब्रह्मा मंदिर पुष्कर राजस्थान - विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित विश्व का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर है। पुष्कर झील के किनारे स्थित। 14वीं शताब्दी में निर्मित। ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचना के लिए यज्ञ हेतु यह स्थान चुना। पत्नी सावित्री के देर से आने पर गुर्जर कन्या गायत्री से विवाह कर यज्ञ पूरा किया। क्रोधित सावित्री ने श्राप दिया कि ब्रह्मा की पूजा केवल पुष्कर राजस्थान में होगी विश्व में कहीं और नहीं। चार मुख वाली ब्रह्मा मूर्ति। पुष्कर सरोवर में 52 घाट। कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला और ऊंट मेला। लाखों तीर्थयात्री। अजमेर से 15 किमी। संपूर्ण शाकाहारी तीर्थ नगरी।

प्रसिद्ध मंदिर
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परिचय

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर राजस्थान के अजमेर जिले में विश्व का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर। पुष्कर झील किनारे। 14वीं शताब्दी निर्मित। सावित्री देर से आईं तो गायत्री से विवाह कर यज्ञ पूरा किया। सावित्री का श्राप - केवल पुष्कर में पूजा होगी। चार मुख मूर्ति। हंस वाहन। पुष्कर सरोवर 52 घाट। कार्तिक पूर्णिमा मेला। लाखों तीर्थयात्री। अजमेर से 15 किमी। शाकाहारी नगरी।

Brahma Temple in Pushkar, Ajmer district, Rajasthan is world's only major Brahma temple. Located on Pushkar lake shore. Built in 14th century. When Savitri came late, married Gayatri and completed yajna. Savitri's curse - worship only in Pushkar. Four-faced idol. Swan vahana. Pushkar Sarovar 52 ghats. Kartik Purnima fair. Lakhs of pilgrims. 15 km from Ajmer. Vegetarian town.

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर | विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर राजस्थान

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🙏 ब्रह्मा मंदिर पुष्कर 🙏

**ब्रह्मा मंदिर का परिचय:**

ब्रह्मा मंदिर **राजस्थान के पुष्कर** में स्थित **विश्व का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर** है।

**स्थान:**
- **राज्य:** राजस्थान
- **शहर:** पुष्कर
- **जिला:** अजमेर
- **अजमेर से:** 15 किमी
- **जयपुर से:** 145 किमी
- **दिल्ली से:** 400 किमी

**विश्व में एकमात्र क्यों:**

पूरे विश्व में ब्रह्मा जी का यह **एकमात्र प्रमुख मंदिर** है। अन्य स्थानों पर ब्रह्मा की पूजा नहीं होती।

**ब्रह्मा मंदिर की स्थापना कथा:**

**सृष्टि रचना का यज्ञ:**

सृष्टि के आरंभ में **ब्रह्मा जी** (सृष्टिकर्ता) ने **सृष्टि रचना के लिए यज्ञ** करने का निर्णय लिया।

उन्होंने यज्ञ के लिए उपयुक्त स्थान खोजा। उनके हाथ से **कमल का फूल** गिर गया।

जहां कमल गिरा, वहां **तीन स्थानों पर झीलें** बन गईं:
- ज्येष्ठ पुष्कर
- मध्य पुष्कर
- कनिष्ठ पुष्कर

ब्रह्मा ने कहा: "यह स्थान **पुष्कर** (कमल) कहलाएगा। यहां मैं यज्ञ करूंगा।"

**यज्ञ की तैयारी:**

ब्रह्मा ने यज्ञ की तैयारी शुरू की। यज्ञ के लिए यह नियम था कि **पत्नी का होना अनिवार्य** है।

ब्रह्मा की पत्नी **सावित्री** (सरस्वती) थीं।

**सावित्री की देरी:**

यज्ञ का **शुभ मुहूर्त** आ गया लेकिन **सावित्री नहीं आईं**।

देवताओं ने कहा: "हे ब्रह्मा! मुहूर्त निकल रहा है। बिना पत्नी के यज्ञ नहीं हो सकता।"

**गायत्री से विवाह:**

ब्रह्मा ने **इंद्र** से कहा: "कोई कन्या लाओ ताकि यज्ञ पूरा हो सके।"

इंद्र एक **गुर्जर (चरवाहा) कन्या** को लेकर आए। उसका नाम **गायत्री** था।

ब्रह्मा ने तुरंत **गायत्री से विवाह** किया और यज्ञ शुरू कर दिया।

**सावित्री का आगमन और क्रोध:**

तभी **सावित्री** आ गईं। उन्होंने देखा कि ब्रह्मा ने **दूसरी स्त्री से विवाह** कर लिया है।

सावित्री अत्यंत **क्रोधित** हो गईं। उन्होंने ब्रह्मा को **श्राप** दिया:

"**हे ब्रह्मा! तुमने मेरा अपमान किया। अब तुम्हारी पूजा केवल यहीं पुष्कर में होगी। विश्व में कहीं और तुम्हारा मंदिर नहीं बनेगा।**"

यही कारण है कि **पूरे विश्व में केवल पुष्कर में ही** ब्रह्मा का मुख्य मंदिर है।

**सावित्री पहाड़ी:**

क्रोधित सावित्री पास की **पहाड़ी** पर चली गईं। वह पहाड़ी आज **सावित्री पहाड़ी** कहलाती है। वहां सावित्री का मंदिर है।

**गायत्री पहाड़ी:**

गायत्री दूसरी तरफ की **पहाड़ी** पर बैठ गईं। वह **गायत्री पहाड़ी** कहलाती है।

**मंदिर का निर्माण:**

मूल मंदिर अत्यंत प्राचीन है। वर्तमान मंदिर **14वीं शताब्दी** में पुनर्निर्मित किया गया।

**मंदिर की विशेषताएं:**

**1. चार मुख वाली मूर्ति:**

ब्रह्मा जी की मूर्ति **चार मुखों** वाली है। चारों दिशाओं को देखते हुए।

**2. हंस वाहन:**

ब्रह्मा जी का वाहन **हंस** है। मंदिर में हंस की मूर्ति भी है।

**3. लाल पत्थर:**

मंदिर **लाल पत्थर** से बना है।

**4. चांदी का कछुआ:**

मंदिर में **चांदी के कछुए** की मूर्ति है। कछुआ पृथ्वी का प्रतीक है।

**पुष्कर सरोवर:**

ब्रह्मा मंदिर **पुष्कर सरोवर** (झील) के किनारे है।

**सरोवर की पवित्रता:**

पुष्कर सरोवर अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि:
- ब्रह्मा ने यहां से **सृष्टि रचना** शुरू की
- यहां स्नान से **सभी पापों का नाश**
- **तीर्थराज** (तीर्थों का राजा)

**52 घाट:**

पुष्कर सरोवर के चारों ओर **52 घाट** हैं। प्रमुख घाट:
- ब्रह्म घाट
- गंधी घाट
- वराह घाट
- गौ घाट

**कार्तिक पूर्णिमा मेला:**

**समय:** कार्तिक मास की पूर्णिमा (अक्टूबर-नवंबर)

**विशेषता:**

कार्तिक पूर्णिमा पर **पुष्कर में विशाल मेला** लगता है:

**तीर्थयात्री:**
- **लाखों तीर्थयात्री** पुष्कर आते हैं
- पुष्कर सरोवर में **पवित्र स्नान**
- ब्रह्मा मंदिर में दर्शन

**ऊंट मेला:**

पुष्कर का **ऊंट मेला** विश्व प्रसिद्ध है:
- हजारों ऊंटों की खरीद-बिक्री
- ऊंट दौड़, ऊंट सजावट
- राजस्थानी संस्कृति का प्रदर्शन
- पर्यटकों के लिए आकर्षण

**दर्शन समय:**

**सुबह:** 6:30 AM - 1:30 PM
**शाम:** 3:00 PM - 9:00 PM

**प्रवेश:** निःशुल्क

**पुष्कर के नियम:**

**1. संपूर्ण शाकाहारी:**

पुष्कर **पूर्णतः शाकाहारी तीर्थ नगरी** है। यहां:
- मांस-अंडा **पूर्ण वर्जित**
- शराब वर्जित
- केवल शाकाहारी भोजन

**2. चमड़े का सामान:**

मंदिर में चमड़े के जूते, बेल्ट आदि नहीं ले जा सकते।

**ब्रह्मा मंदिर कैसे पहुंचें:**

**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **जयपुर** (145 किमी)

**रेल मार्ग:**
- निकटतम स्टेशन: **अजमेर** (15 किमी)

**सड़क मार्ग:**
- अजमेर से: 15 किमी (बस/टैक्सी)
- जयपुर से: 145 किमी
- दिल्ली से: 400 किमी

**ठहरने की व्यवस्था:**

पुष्कर में अनेक होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं हैं।

**पास के स्थल:**

- **सावित्री मंदिर** - पहाड़ी पर
- **अजमेर शरीफ दरगाह** (15 किमी)
- **आना सागर झील** - अजमेर

**महत्वपूर्ण तथ्य:**

- राजस्थान के पुष्कर में
- विश्व का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर
- सावित्री के श्राप से केवल यहां पूजा
- 14वीं शताब्दी में निर्मित
- चार मुख वाली मूर्ति
- पुष्कर सरोवर 52 घाट
- कार्तिक पूर्णिमा मेला
- ऊंट मेला विश्व प्रसिद्ध
- संपूर्ण शाकाहारी नगरी
- अजमेर से 15 किमी

🙏 ॐ ब्रह्मा देवाय नमः 🙏
🙏 जय पुष्करराज 🙏