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बांके बिहारी मंदिर - वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर

बांके बिहारी मंदिर वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध और भीड़भाड़ वाला मंदिर है। यह भगवान कृष्ण के बाल रूप को समर्पित है। मंदिर की स्थापना 1864 में स्वामी हरिदास जी ने की। बांके का अर्थ है टेढ़ा (त्रिभंग मुद्रा) और बिहारी का अर्थ है विहार करने वाला। मूर्ति अत्यंत आकर्षक है - काले रंग की, त्रिभंग मुद्रा में। मंदिर में पर्दा हर कुछ मिनट में खुलता-बंद होता है। होली और जन्माष्टमी पर विशाल उत्सव। फूलों की होली प्रसिद्ध। लाखों भक्त प्रतिवर्ष आते हैं। मंदिर वृंदावन के मुख्य बाजार में।

प्रसिद्ध मंदिर
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परिचय

बांके बिहारी वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर। कृष्ण के बाल रूप को समर्पित। 1864 में स्वामी हरिदास ने स्थापना की। बांके = टेढ़ा (त्रिभंग), बिहारी = विहार करने वाला। काली मूर्ति, त्रिभंग मुद्रा। पर्दा हर कुछ मिनट में खुलता-बंद होता। फूलों की होली प्रसिद्ध। जन्माष्टमी भव्य। लाखों भक्त। मुख्य बाजार में।

Banke Bihari is Vrindavan's most famous temple. Dedicated to child form of Krishna. Established by Swami Haridas in 1864. Banke = bent (tribhanga), Bihari = one who enjoys. Black idol, tribhanga pose. Curtain opens-closes every few minutes. Flower Holi famous. Janmashtami grand. Lakhs visit. In main market.

बांके बिहारी मंदिर वृंदावन | स्वामी हरिदास और त्रिभंग कृष्ण

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🙏 बांके बिहारी मंदिर 🙏

**बांके बिहारी का परिचय:**

बांके बिहारी मंदिर **वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर** है।

**स्थान:**
- **राज्य:** उत्तर प्रदेश
- **शहर:** वृंदावन
- **मथुरा से:** 15 किमी
- **आगरा से:** 65 किमी
- **दिल्ली से:** 150 किमी

**नाम का अर्थ:**
- **बांके** = टेढ़ा, मुड़ा हुआ (त्रिभंग मुद्रा)
- **बिहारी** = विहार करने वाला, आनंद लेने वाला

**बांके बिहारी की स्थापना कथा:**

**स्वामी हरिदास:**

**स्वामी हरिदास** महान संगीतज्ञ और कृष्ण भक्त थे। वे **तानसेन के गुरु** थे।

स्वामी हरिदास **निधिवन** (वृंदावन) में रहते थे और कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे।

**भगवान का प्रकट होना:**

एक दिन स्वामी हरिदास **भजन-कीर्तन** कर रहे थे। उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि **भगवान कृष्ण और राधा** प्रकट हो गए!

**एक रूप में:**

स्वामी हरिदास ने देखा कि राधा और कृष्ण अलग-अलग खड़े हैं। उन्होंने प्रार्थना की:

"हे प्रभु! आप दोनों को अलग देखकर मेरा मन व्याकुल हो जाता है। कृपया एक रूप में आइए।"

राधा-कृष्ण **एक रूप** में प्रकट हुए - **बांके बिहारी** के रूप में।

यह रूप **त्रिभंग मुद्रा** (तीन जगह मुड़ा हुआ) में था।

**मूर्ति की स्थापना:**

स्वामी हरिदास के शिष्य **स्वामी गोस्वामी** ने **1864 में** यह मूर्ति स्थापित की और मंदिर बनवाया।

**मूर्ति की विशेषताएं:**

**1. त्रिभंग मुद्रा:**

बांके बिहारी की मूर्ति **त्रिभंग** (तीन जगह मुड़ी) मुद्रा में है:
- गर्दन मुड़ी
- कमर मुड़ी
- घुटना मुड़ा

**2. काले रंग:**

मूर्ति **काले रंग** की है - श्याम सुंदर।

**3. बांसुरी:**

हाथ में **बांसुरी** है (हालांकि दिखाई नहीं देती)।

**4. आंखें:**

मूर्ति की **आंखें अत्यंत आकर्षक** हैं।

**अनोखी परंपराएं:**

**1. पर्दा प्रथा:**

बांके बिहारी मंदिर में एक **अनोखी परंपरा** है। मूर्ति के सामने **पर्दा** लगा रहता है जो **हर कुछ मिनट** (5-10 मिनट) में **खुलता और बंद** होता है।

**कारण:**
मान्यता है कि बांके बिहारी इतने आकर्षक हैं कि भक्त उन्हें देखते रह जाते हैं और **झपकना भूल जाते हैं**। इसलिए उनकी आंखों को आराम देने के लिए पर्दा बार-बार बंद किया जाता है।

**2. पैर नहीं दिखते:**

मूर्ति के **पैर दिखाई नहीं देते**। वे वस्त्रों से ढके रहते हैं।

**कारण:**
मान्यता है कि यदि पैर दिखेंगे तो बांके बिहारी **वृंदावन छोड़कर चले जाएंगे**।

**3. कोई घंटी नहीं:**

मंदिर में **घंटी** नहीं है। भक्त घंटी नहीं बजाते।

**कारण:**
बांके बिहारी सो रहे हों तो घंटी से उनकी नींद टूट जाएगी।

**त्योहार:**

**1. फूलों की होली:**

बांके बिहारी मंदिर की **फूलों की होली** विश्व प्रसिद्ध है।

**समय:** होली से 2 दिन पहले और होली के दिन

**विशेषता:**
- भक्तों पर **रंग-बिरंगे फूल** बरसाए जाते हैं
- कोई रंग या पानी नहीं
- लाखों लोग आते हैं

**2. जन्माष्टमी:**

जन्माष्टमी पर **भव्य उत्सव** होता है:
- विशेष सज्जा
- झांकियां
- भजन-कीर्तन

**3. राधाष्टमी:**

राधा रानी की जयंती भी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है।

**दर्शन समय:**

**गर्मी:**
- सुबह: 7:45 AM - 12:00 PM
- शाम: 5:30 PM - 9:30 PM

**सर्दी:**
- सुबह: 8:45 AM - 1:00 PM
- शाम: 4:30 PM - 8:30 PM

**दोपहर बंद:** बांके बिहारी के विश्राम के लिए

**बांके बिहारी कैसे पहुंचें:**

**मथुरा से:** 15 किमी (टैक्सी/ऑटो)

**दिल्ली से:** 150 किमी (ट्रेन/बस)

**आगरा से:** 65 किमी

**महत्वपूर्ण तथ्य:**

- वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर
- 1864 में स्वामी हरिदास के शिष्य ने स्थापित किया
- त्रिभंग मुद्रा में मूर्ति
- पर्दा हर कुछ मिनट में खुलता-बंद होता
- पैर नहीं दिखते
- घंटी नहीं है
- फूलों की होली विश्व प्रसिद्ध
- लाखों भक्त प्रतिवर्ष

🙏 राधे राधे 🙏
🙏 जय बांके बिहारी लाल की 🙏