परिचय
Banke Bihari is Vrindavan's most famous temple. Dedicated to child form of Krishna. Established by Swami Haridas in 1864. Banke = bent (tribhanga), Bihari = one who enjoys. Black idol, tribhanga pose. Curtain opens-closes every few minutes. Flower Holi famous. Janmashtami grand. Lakhs visit. In main market.
बांके बिहारी मंदिर वृंदावन | स्वामी हरिदास और त्रिभंग कृष्ण
**बांके बिहारी का परिचय:**
बांके बिहारी मंदिर **वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर** है।
**स्थान:**
- **राज्य:** उत्तर प्रदेश
- **शहर:** वृंदावन
- **मथुरा से:** 15 किमी
- **आगरा से:** 65 किमी
- **दिल्ली से:** 150 किमी
**नाम का अर्थ:**
- **बांके** = टेढ़ा, मुड़ा हुआ (त्रिभंग मुद्रा)
- **बिहारी** = विहार करने वाला, आनंद लेने वाला
**बांके बिहारी की स्थापना कथा:**
**स्वामी हरिदास:**
**स्वामी हरिदास** महान संगीतज्ञ और कृष्ण भक्त थे। वे **तानसेन के गुरु** थे।
स्वामी हरिदास **निधिवन** (वृंदावन) में रहते थे और कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे।
**भगवान का प्रकट होना:**
एक दिन स्वामी हरिदास **भजन-कीर्तन** कर रहे थे। उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि **भगवान कृष्ण और राधा** प्रकट हो गए!
**एक रूप में:**
स्वामी हरिदास ने देखा कि राधा और कृष्ण अलग-अलग खड़े हैं। उन्होंने प्रार्थना की:
"हे प्रभु! आप दोनों को अलग देखकर मेरा मन व्याकुल हो जाता है। कृपया एक रूप में आइए।"
राधा-कृष्ण **एक रूप** में प्रकट हुए - **बांके बिहारी** के रूप में।
यह रूप **त्रिभंग मुद्रा** (तीन जगह मुड़ा हुआ) में था।
**मूर्ति की स्थापना:**
स्वामी हरिदास के शिष्य **स्वामी गोस्वामी** ने **1864 में** यह मूर्ति स्थापित की और मंदिर बनवाया।
**मूर्ति की विशेषताएं:**
**1. त्रिभंग मुद्रा:**
बांके बिहारी की मूर्ति **त्रिभंग** (तीन जगह मुड़ी) मुद्रा में है:
- गर्दन मुड़ी
- कमर मुड़ी
- घुटना मुड़ा
**2. काले रंग:**
मूर्ति **काले रंग** की है - श्याम सुंदर।
**3. बांसुरी:**
हाथ में **बांसुरी** है (हालांकि दिखाई नहीं देती)।
**4. आंखें:**
मूर्ति की **आंखें अत्यंत आकर्षक** हैं।
**अनोखी परंपराएं:**
**1. पर्दा प्रथा:**
बांके बिहारी मंदिर में एक **अनोखी परंपरा** है। मूर्ति के सामने **पर्दा** लगा रहता है जो **हर कुछ मिनट** (5-10 मिनट) में **खुलता और बंद** होता है।
**कारण:**
मान्यता है कि बांके बिहारी इतने आकर्षक हैं कि भक्त उन्हें देखते रह जाते हैं और **झपकना भूल जाते हैं**। इसलिए उनकी आंखों को आराम देने के लिए पर्दा बार-बार बंद किया जाता है।
**2. पैर नहीं दिखते:**
मूर्ति के **पैर दिखाई नहीं देते**। वे वस्त्रों से ढके रहते हैं।
**कारण:**
मान्यता है कि यदि पैर दिखेंगे तो बांके बिहारी **वृंदावन छोड़कर चले जाएंगे**।
**3. कोई घंटी नहीं:**
मंदिर में **घंटी** नहीं है। भक्त घंटी नहीं बजाते।
**कारण:**
बांके बिहारी सो रहे हों तो घंटी से उनकी नींद टूट जाएगी।
**त्योहार:**
**1. फूलों की होली:**
बांके बिहारी मंदिर की **फूलों की होली** विश्व प्रसिद्ध है।
**समय:** होली से 2 दिन पहले और होली के दिन
**विशेषता:**
- भक्तों पर **रंग-बिरंगे फूल** बरसाए जाते हैं
- कोई रंग या पानी नहीं
- लाखों लोग आते हैं
**2. जन्माष्टमी:**
जन्माष्टमी पर **भव्य उत्सव** होता है:
- विशेष सज्जा
- झांकियां
- भजन-कीर्तन
**3. राधाष्टमी:**
राधा रानी की जयंती भी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है।
**दर्शन समय:**
**गर्मी:**
- सुबह: 7:45 AM - 12:00 PM
- शाम: 5:30 PM - 9:30 PM
**सर्दी:**
- सुबह: 8:45 AM - 1:00 PM
- शाम: 4:30 PM - 8:30 PM
**दोपहर बंद:** बांके बिहारी के विश्राम के लिए
**बांके बिहारी कैसे पहुंचें:**
**मथुरा से:** 15 किमी (टैक्सी/ऑटो)
**दिल्ली से:** 150 किमी (ट्रेन/बस)
**आगरा से:** 65 किमी
**महत्वपूर्ण तथ्य:**
- वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर
- 1864 में स्वामी हरिदास के शिष्य ने स्थापित किया
- त्रिभंग मुद्रा में मूर्ति
- पर्दा हर कुछ मिनट में खुलता-बंद होता
- पैर नहीं दिखते
- घंटी नहीं है
- फूलों की होली विश्व प्रसिद्ध
- लाखों भक्त प्रतिवर्ष
🙏 राधे राधे 🙏
🙏 जय बांके बिहारी लाल की 🙏