परिचय
Prayag Shaktipeeth is situated near the sacred Triveni Sangam of Ganga Yamuna Saraswati in Prayagraj, Uttar Pradesh. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's fingers fell. Maa Lalita Devi is enshrined here and the Kumbh Mela is world famous.
प्रयाग शक्तिपीठ - इलाहाबाद उत्तर प्रदेश | माँ सती के हाथ की उंगलियों का पवित्र शक्तिपीठ
प्रयाग शक्तिपीठ - तीर्थराज की दिव्य शक्तिपीठ
प्रयाग शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज इलाहाबाद में गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र त्रिवेणी संगम के समीप स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती के हाथ की उंगलियाँ गिरी थीं इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
माँ ललिता देवी रूप में यहाँ विराजमान हैं। प्रयागराज को तीर्थराज अर्थात सभी तीर्थों का राजा कहा जाता है। यहाँ गंगा यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम है। तीर्थराज प्रयाग में माँ ललिता शक्तिपीठ की उपस्थिति इसे और भी विशेष बनाती है।
प्रयाग शक्तिपीठ का इतिहास
प्रयाग शक्तिपीठ का उल्लेख अनेक पुराणों और प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। माँ ललिता देवी का मंदिर मीरापुर में स्थित है जो प्रयागराज का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और यहाँ माँ की पूजा अनादिकाल से होती आ रही है।
प्रयाग शक्तिपीठ के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. माँ ललिता देवी मंदिर
मंदिर के गर्भगृह में माँ ललिता देवी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ का श्रृंगार अत्यंत भव्य होता है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।
2. त्रिवेणी संगम
प्रयागराज में गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती का पवित्र संगम स्थित है। यहाँ स्नान करना करोड़ों तीर्थों के बराबर माना जाता है। कुंभ मेले के समय यहाँ करोड़ों श्रद्धालु संगम स्नान के लिए आते हैं।
3. अक्षयवट
प्रयागराज किले के भीतर अक्षयवट नामक प्राचीन वटवृक्ष है जो अमर माना जाता है। यहाँ पितरों की शांति के लिए पूजा होती है।
4. भैरव मंदिर
प्रयाग शक्तिपीठ के भैरव भव रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव का स्थान भी है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
5. माघ मेला और कुंभ मेला
प्रयागराज में प्रतिवर्ष माघ मेला और 12 वर्षों में कुंभ मेला आयोजित होता है। कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है जिसमें करोड़ों श्रद्धालु संगम स्नान करते हैं।
6. आनंद भवन
प्रयागराज में नेहरू परिवार का आनंद भवन भी दर्शनीय है जो अब राष्ट्रीय स्मारक है।
प्रयाग शक्तिपीठ की पूजा विधि
माँ ललिता देवी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। ललिता सहस्रनाम दुर्गा सप्तशती और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि मकर संक्रांति और माघ पूर्णिमा के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।
प्रयाग शक्तिपीठ कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: प्रयागराज का बमरौली हवाई अड्डा शहर से 12 किमी दूर है।
रेलमार्ग: प्रयागराज जंक्शन देशभर के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: वाराणसी से 120 किमी, लखनऊ से 200 किमी, दिल्ली से 650 किमी।
प्रयाग शक्तिपीठ दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। माघ मेला कुंभ मेला और नवरात्रि के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। मकर संक्रांति पर संगम स्नान का विशेष महत्व है।
प्रयाग शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व
प्रयागराज को तीर्थराज कहा जाता है और यहाँ माँ ललिता शक्तिपीठ की उपस्थिति इसे और भी पवित्र बनाती है। त्रिवेणी संगम स्नान और माँ ललिता देवी के दर्शन से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।