परिचय
Mathura is the sacred city of Uttar Pradesh situated on the banks of Yamuna river. It is the birthplace of Lord Krishna and the center of Braj Bhoomi. It holds the second place among the Sapta Puri - seven cities that grant Moksha.
मथुरा - भगवान श्री कृष्ण की पवित्र जन्मभूमि | सप्त पुरी मोक्षदायिनी नगरी
मथुरा - भगवान श्री कृष्ण की पवित्र जन्मभूमि
मथुरा उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र नगरी है। हिंदू धर्म की सात मोक्षदायिनी नगरियों (सप्त पुरी) में मथुरा को द्वितीय स्थान प्राप्त है। यह नगरी भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली होने के कारण "कृष्ण की नगरी" के नाम से विश्वविख्यात है।
मथुरा और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र "ब्रज भूमि" कहलाता है जहाँ भगवान कृष्ण ने अपनी बाल लीलाएँ कीं। वृंदावन, गोकुल, बरसाना, नंदगाँव और गोवर्धन - ये सभी पवित्र स्थल मथुरा के आसपास ही स्थित हैं।
मथुरा के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर
यह वह पावन स्थान है जहाँ भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। यहाँ भगवान कृष्ण की वह कारागार कोठरी भी है जहाँ उनका जन्म हुआ था। यह मथुरा का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र मंदिर है।
2. द्वारकाधीश मंदिर
यमुना नदी के तट पर स्थित द्वारकाधीश मंदिर मथुरा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ भगवान कृष्ण द्वारकाधीश रूप में विराजमान हैं। होली और जन्माष्टमी के समय यहाँ विशाल उत्सव होता है।
3. विश्राम घाट
विश्राम घाट मथुरा का सबसे प्रमुख और पवित्र घाट है। मान्यता है कि मथुरा से कंस का वध करने के बाद भगवान कृष्ण यहाँ विश्राम करने आए थे इसीलिए इसे विश्राम घाट कहते हैं। यहाँ की संध्या आरती अत्यंत भव्य और दर्शनीय होती है।
4. वृंदावन
मथुरा से 15 किमी दूर वृंदावन वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने अपना बचपन बिताया और राधा जी के साथ रासलीला की। बांके बिहारी मंदिर, राधारमण मंदिर, इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर यहाँ के प्रमुख मंदिर हैं।
5. गोवर्धन पर्वत
मथुरा से 22 किमी दूर गोवर्धन पर्वत वह स्थान है जिसे भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर उठाकर इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा की थी। यहाँ 21 किमी की परिक्रमा का विशेष महत्व है।
6. बरसाना और नंदगाँव
बरसाना राधा जी का जन्मस्थान है और नंदगाँव नंद बाबा का गाँव है। यहाँ की लट्ठमार होली विश्वप्रसिद्ध है।
मथुरा कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: आगरा हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो मथुरा से 58 किमी दूर है।
रेलमार्ग: मथुरा जंक्शन एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है जो दिल्ली, आगरा, मुंबई से जुड़ा है।
सड़कमार्ग: दिल्ली से 145 किमी, आगरा से 58 किमी, लखनऊ से 320 किमी।
मथुरा दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय मथुरा यात्रा के लिए सबसे उत्तम है। जन्माष्टमी, होली, राधाष्टमी और दीपावली के समय यहाँ विशेष उत्सव मनाए जाते हैं। ब्रज की होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है और फाल्गुन माह में यहाँ एक माह तक होली का उत्सव चलता है।
मथुरा का धार्मिक महत्व
मथुरा को "मोक्षदायिनी नगरी" कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार मथुरा में निवास करने और यहाँ की यात्रा करने मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं। यमुना नदी में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान कृष्ण की जन्मभूमि होने के कारण यह नगरी अत्यंत पूजनीय है।