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श्री गणेश आरती – शुभारंभ का प्रतीक

श्री गणेश की आरती सभी कार्यों के शुभारंभ में की जाती है। यह आरती विघ्नों को दूर कर सफलता प्रदान करती है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 3997
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परिचय

श्री गणेश आरती विघ्नहर्ता भगवान गणेश की स्तुति‑आरती है। इसे श्रद्धा से पढ़ने या गाने से मनोबल, समृद्धि और आरंभिक कार्यों में सफलता की प्रार्थना व्यक्त होती है; आरती में गणेशजी के दयालु, बुद्धिमान और कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन मिलता है। पूजा‑समारोह या कनिष्ठ पाठ के लिये यह सरल और भक्तिमय आरती उपयुक्त है।

श्री गणेश आरती (Shree Ganesh Aarti)

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जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा । लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी । कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

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