होम / Chalisa / शेषावतार कल्लाजी राठौड़ पच्चीसी (Sheshavtar Kallaji Rathod Pachisi)

शेषावतार कल्लाजी राठौड़ पच्चीसी – वीरता और आस्था का लोक स्तवन

शेषावतार कल्लाजी राठौड़ पच्चीसी राजस्थान की लोक आस्था और वीर परंपरा का प्रतीक है। इस पच्चीसी में कल्लाजी के पराक्रम, त्याग और जनकल्याणकारी स्वरूप का वर्णन है। इसका पाठ करने से साहस, आत्मविश्वास और संकटों से रक्षा की कामना पूर्ण होती है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Chalisa 👁️ Views: 148
📖

परिचय

यह "शेषावतार कल्लाजी राठौड़ पच्चीसी" एक लोकगीत‑वीरगाथा है जो राठौड़ वीर कल्लाजी (कल्ला) के पराक्रम, धर्म‑रक्षा और जनकल्याण की महिमा सुनाती है; चित्तौड़ के रण, अकबर‑युद्ध जैसे सैन्य प्रसंगों तथा जयमल‑कल्ला के संघर्षों के माध्यम से कल्लाजी की साहसपूर्ण लीलाएँ, अन्यायियों का संहार और लोगों पर उनकी दयाभावी छत्रछाया प्रस्तुत होती है। यह छंदबद्ध रचना राजपूत मर्यादा, त्याग‑बलिदान और लोक‑श्रद्धा को उजागर करती है और स्थानीय ऐतिहासिक‑सांस्कृतिक स्मरण को गीत रूप में जीवंत रखती है।

शेषावतार कल्लाजी राठौड़ पच्चीसी (Sheshavtar Kallaji Rathod Pachisi)

PDF

शेषावतार कल्लाजी राठौड़ पच्चीसी ।। जय श्री कल्याण ।।

।। हेला पच्चीसी।।

कल्ला कीरत रावली, हेलो कोस हजार !
बांव पकड़ बैठा करो, अरवडिया आधार !! १ !!

पावडिया पत्तो लड़े, जयमल महलां बीच !
राय आंगण कल्लो लड़े, केसर हंदा कीच !! २ !!

कल्लो लड़े कबाण सूं, माथे जस रो मोड़ !
धरती बीच प्रगटिया, राज कुली राठौड़ !! ३ !!

प्याला केसर पीवणा, साँझ पड्यां सुबियाणा !
मुआ उगावे मानवी, काठा रंग कल्याण !! ४ !!

कल्लो चत्रगढ़ कांगरे, रहियो कमधज राय !
जाती जमी सिसोदिया, कमी न राखी काय !! ५ !!

कल्लो कला सूं कड्डीयो, लांखा हड धर लेर !
तीन पहर लग आसटी, शीश पडयो शमशेर !! ६ !!

पाधर यवानां पाडिया, ढाला सांकर डाण !
कलो हला पर कोपियो, रड दला रणराण!! ७ !!

गेमर डेणा गाईयाँ, खग झाटा खुरशाण !
कलो हला पर कोपियो, रड दला रणराण !! ८ !!

तोड़ हला अकबर तणां, तैग झला ता ठौड़ !
भला करण दल भांजणा, रंग कला राठौड़ !! ९ !!

पांव धरे इक पौवड़ो, हेलो कोस हजार !
तो वेला आवे कलो, दुनियां रो दातार !! १० !!

कले गडायो गारमो, दीज्यो रिझवन हाथ !
पहला पांव कल्याण ने, पछे संग रो साथ !! ११ !!

नव कुल नाग रनेलियो, नव खंड किधो नाम !
चत्रगढ़ भंगी जे निदा, कमधज आयो काम !! १२ !!

संवत सोल चौविसवा, हलत तोप हिंदवाण !
जयमलजी ने पुठ ले चक्कर तेज चलाण !! १३ !!

भावज हदा बोलणा, छप्पन दिनों छोड़ !
गढ़ रुड़ेला प्रकटीयो, चडियो गढ़ चितौड !! १४ !!

पाडनपोल पाडो बहयो जबर हिलोलो जाण
राणा बिडों बाटीयो, कुण झेले हिदबाण !! १५ !!

कमधज मारू यूँ कहे, हूँ झेलूं हिदबाण !
छप्पन धरा रो राजवी, असलां रो कुल भांण !! १६ !!

घोडा पाखर घुगरा भरहर भालो हाथ !
काछी आवे कूदता, कल्ला मारू साथ !! १७ !!

अकबर कहे नवाब ने, भिडियों कुण कबाण !
बीरबल भाग्यो बादशाह, कला हला करपाण !! १८ !!

जिण दिन कल्लो जनमियो, जग में किधो नाम !
नव गज धरती दल चढ़े, धन -धन कल्ला काम !! १९ !!

अण बियाणी बांगडी, जाचक दूध थपोड़ !
सह देवां मा देखिया, कला न थारी होड़ !! २० !!

कल्ला किरत रावली, हेलो कोस हजार !
दुखिया ने सुखिया करो, पधारो राज कुमार !! २१ !!

कलो कडारे प्रकटीयो, जग ने दीधो जोत !
जठे दु:खी नर सब सुखी, टले अखारी मौत !! २२ !!

औखद- बाखद आखडी, करूँ न दूजे दौड़ !
मिटे पीड कल्याण सूं, राज कुली राठौड़ !! २३ !!

रुडो गाम रनेलियो, बहु रय्यामणु खेम !
मन हरखे मारू जटे, कलो बिचारे केम !! २४ !!

कलो कला सूं कड्डीयों, तोड़ तोड़ ता ठोड !
दुःख मिटावण जगत रो, कुल तारयो राठौड़ !! २५ !!

!! इति !!

।।रनेलिया रा शेषावतार कल्लाजी राठौड़ की जय ।।

📢 शेयर करें