होम / Aarti / त्रिपुरमालिनी आरती | Tripuramalini (Jalandhar) Aarti

त्रिपुरमालिनी माता आरती – जलंधर की शक्तिस्वरूपा देवी

त्रिपुरमालिनी माता का संबंध जलंधर क्षेत्र से माना जाता है और यह एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है। माता की आरती प्रेम, सुरक्षा और पारिवारिक कल्याण के लिए श्रद्धा से की जाती है।

📅 25 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 173
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परिचय

त्रिपुरमालिनी को पारंपरिक सूचियों में एक महत्वपूर्ण शक्ति‑पीठ माना जाता है; जलंधर क्षेत्र से जुड़ा यह स्थान देवी के बायाँ वक्ष (left breast) के गिरने से पवित्र हुआ बताया जाता है। भक्त यहाँ माँ से सशक्त सुरक्षा, प्रेम और पारिवारिक कल्याण के लिये आते हैं। आरती‑समय दीप, पुष्प और भक्तिमय भजन के साथ लोक‑परम्परागत अनुष्ठान होते हैं जो स्थान की आध्यात्मिकता को प्रकट करते हैं।

त्रिपुरमालिनी आरती | Tripuramalini (Jalandhar) Aarti

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आरती — त्रिपुरमालिनी माता (एक छोटा भजन / आरती‑पाठ)

जय त्रिपुरमालिनी माता, करुणा की मूरत भारी।
तेरे वक्ष का पवित्र स्पर्श, करे हृदय को उदयकारी॥ जय माता ॥

जलंधर के धाम में बसे, भक्तों की तू ही आस।
संकट हटे तेरे नाम से, मिले जीवन में बनि प्रकाश॥ जय माता ॥

दीप जला कर करें आरती, पुष्प चढ़ाएँ ध्यान से।
माँ त्रिपुरमालिनी कर दया, दे सबको सुख व जीवन श्रेष्ठे॥ जय माता ॥

माँ! अपन करुणा बना कर, दीनों को कर दो उद्धार।
तेरी शरण में जो आएगा, पाएगा सद्गति का अधिकार॥ जय त्रिपुरमालिनी माता — जय जय माता॥

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