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श्री शनिदेव की आरती – कर्मफल दाता की वंदना

श्री शनिदेव की आरती न्याय, धैर्य और कर्मफल के सिद्धांत का स्मरण कराती है। श्रद्धा से की गई शनिदेव आराधना जीवन की बाधाओं को शांत करती है और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करती है।

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परिचय

श्री शनिदेव की आरती शनिदेव के भक्तहितकारी, दण्डधारक और समयपालक रूप का भक्ति‑गीत है। इसे श्रद्धा‑भाव से पढ़ने या गाने से बाधाओं, अंधकार और कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है; विशेषकर शनिदिन, शनि‑साधना या शनिदेव के मंदिरों में यह आरती पाठ लोकप्रिय है। नीचे आरती को पारम्परिक आरती‑शैली में बिना संख्या के साफ‑सुथरे रूप में प्रस्तुत किया गया है — आप इसे पूजा में सीधे पढ़ सकते/गाकर प्रयोग कर सकते हैं।

श्री शनिदेव की आरती (Aarti of Shri Shanidev)

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॥ आरती — श्री शनिदेव की ॥
जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु, छाया महतारी॥
जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी॥

श्याम अंग, वक्र दृष्टि, चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धारि, नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी॥

क्रीट मुकुट शीश पर, सहज दिपत लिलारी।
मुक्त्न की माल गले, शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी॥

मोदक और मिष्ठान चढ़े, चढ़ती पान‑सुपारी।
लोहा, तिल, तेल, उड़द — महिषी है अति प्यारी॥
जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी॥

देव‑दनुज, ऋषि‑मुनी, स्मिरत नर‑नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान — हमहैं शरण तुम्हारी॥
जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी॥