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शाकम्भरी माता आरती - अन्न और पोषण की देवी की स्तुति

माँ शाकम्भरी अन्न, वनस्पति और पालन-पोषण की देवी हैं। उनकी आरती से घर में समृद्धि, अन्न की प्रचुरता और संकटों से रक्षा होती है। श्रद्धा से किया गया यह पाठ जीवन में संतुलन और सुरक्षा प्रदान करता है।

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परिचय

शाकम्भरी माता की आरती शाकम्भरी/शाकम्भर अम्बा—वनस्पति, अन्न और पालन‑पोषण की देवी—की स्तुति है। श्रद्धा‑भाव से इसका पाठ करने पर जीवन में पोषण, संकटों से रक्षण और समृद्धि की प्रार्थना व्यक्त होती है; यह आरती विशेषकर खेती, अन्न‑सम्बंधी चिंता या पूर्णता की कामना के समय गायी जाती है।

शाकम्भरी माता की आरती (Aarti of Shakambhari Mata)

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॥ आरती — श्री शाकम्भर अम्बा जी की ॥
हरि ॐ, श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।
ऐसो अद्भुत रूप हृदय धर लीजो, शताक्षी दयालु की आरती कीजो।
तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ, सब घट तुम आप बखानी माँ।
श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।

तुम्हीं हो शाकम्भरी, तुम ही हो शताक्षी माँ।
शिव मूर्ति माया, तुम ही हो प्रकाशी माँ।
श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।

नित जो नर‑नारी, अम्बे आरती गावे माँ,
इच्छा पूरण कीजो, शाकम्भरी दर्शन पावे माँ।
श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।

जो नर आरती पढ़े‑पढावे माँ, जो नर आरती सुने‑सुनावे माँ,
बसे बैकुण्ठ, शाकम्भर दर्शन पावे।
श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।