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श्री गोवर्धन आरती - गिरिराज महाराज की दिव्य वंदना और महत्व

गोवर्धन पूजा के अवसर पर गिरिराज महाराज की आरती का गान विशेष फलदायी माना जाता है। यह आरती प्रकृति संरक्षण, भक्ति और भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम का संदेश देती है। श्रद्धा के साथ गोवर्धन आरती का पाठ करने से घर में खुशहाली, संपन्नता और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 3936
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परिचय

श्री गोवर्धन आरती गोवर्धनधाम और गिरिराज (गोवर्धन) की महिमा का भक्ति‑गीत है। इसे श्रद्धा‑भाव से गाने पर प्रेम, संरक्षण और अभय की अनुभूति होती है; यह गोवर्धन पूजा, विट्ठल/कृष्ण‑भक्ति सभा या निजी आराधना में गायी जाती है। नीचे आरती को पारम्परिक आरती‑शैली में साफ‑सुथरे रूप में दे रहा/रही हूँ — आप इसे सीधे पढ़कर आरती कर सकते/गा सकते हैं।

श्री गोवर्धन आरती (Shree Govardhan Aarti)

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॥ आरती — श्री गोवर्धन महाराज की ॥
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज — तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े — तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरी सात कोस की परिकम्मा — चकलेश्वर है विश्राम।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे गले में कण्ठ साज रहेओ — ठोड़ी पे हीरा लाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ — तेरी झाँकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गिरिराज धरण प्रभु, तेरी शरण — करो भक्त का बेड़ा पार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

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