परिचय
विशालाक्षी आरती | Vishalakshi (Varanasi) Aarti
॥ आरती — विशालाक्षी माता (काशी) ॥
जय विशालाक्षी माता, काशी की दयामयी छवि।
कुंडल तेरा दिव्य जो गिरे, बनी पवित्र यह भूमि।
तेरे चरण वंदन करूँ मैं, शरण में लाऊँ मन पूरा।
ज्ञान‑मोक्ष की दैवी सौगात, दे दो माँ यह अमोघ दारा॥ जय विशालाक्षी माता ॥
दीप जले गंगा के तट पर, गूँजे भजन हर ओर।
भक्त ह्रदय में बसी हो तुम, मिटे अज्ञान का अँधेरा दूर।
पुष्प चढ़ाएँ, घी का दीप जलाएँ, नमन करूँ तेरे चरण।
कृपा कर करुणा की मूरत माँ, कर दे जीवन सफल वरण॥ जय विशालाक्षी माता ॥
माँ! कर दयो उद्धार सदा, पापों का कर दो क्षय।
काशी की शान, दिव्य चरणों में, तुझसे ही है सबका भय।
जय विशालाक्षी माता, जय जय काशी की देवी।
जय मां विशालाक्षी — दया करो, आशीर्वाद दो सब जीव॥ जय विशालाक्षी माता ॥