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विशालाक्षी आरती | Vishalakshi (Varanasi) Aarti

Aarti Goddesses Aarti Shakti Peeth ( शक्ति‑पीठ )
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परिचय

वाराणसी (काशी) की विशालाक्षी माता काशीवासियों और तीर्थयात्रियों की प्रिय दैवी आदिशक्ति मानी जाती हैं। पारंपरिक कथाओं के अनुसार यहाँ देवी के कर्णाभूषण (कुंडल) के गिरने से यह स्थल पवित्र हुआ — इसलिए इसे शक्तिपीठों में गणना की जाती है। काशी के धार्मिक अनुभव में विशालाक्षी का स्थान महत्वपूर्ण है; यहाँ की आरती में शास्त्रीय भजन, दीप‑वंदन और भक्तों का सान्निध्य दिखाई देता है। (pilgrims often seek ज्ञान, शांति और मोक्ष के लिए दर्शन करते हैं।)

विशालाक्षी आरती | Vishalakshi (Varanasi) Aarti

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॥ आरती — विशालाक्षी माता (काशी) ॥

जय विशालाक्षी माता, काशी की दयामयी छवि।
कुंडल तेरा दिव्य जो गिरे, बनी पवित्र यह भूमि।
तेरे चरण वंदन करूँ मैं, शरण में लाऊँ मन पूरा।
ज्ञान‑मोक्ष की दैवी सौगात, दे दो माँ यह अमोघ दारा॥ जय विशालाक्षी माता ॥

दीप जले गंगा के तट पर, गूँजे भजन हर ओर।
भक्त ह्रदय में बसी हो तुम, मिटे अज्ञान का अँधेरा दूर।
पुष्प चढ़ाएँ, घी का दीप जलाएँ, नमन करूँ तेरे चरण।
कृपा कर करुणा की मूरत माँ, कर दे जीवन सफल वरण॥ जय विशालाक्षी माता ॥

माँ! कर दयो उद्धार सदा, पापों का कर दो क्षय।
काशी की शान, दिव्य चरणों में, तुझसे ही है सबका भय।
जय विशालाक्षी माता, जय जय काशी की देवी।
जय मां विशालाक्षी — दया करो, आशीर्वाद दो सब जीव॥ जय विशालाक्षी माता ॥