परिचय
विंध्यवासिनी माता आरती | Vindhyavasini (Vindhyachal) Aarti
॥ आरती — विंध्यवासिनी माता ॥
जय विंध्यवासिनी माता, जय जय विंध्यवासिनी माता।
भक्तन के सुख दाता, संकट हरने वाली माता।
जय विंध्यवासिनी माता, जय जय विंध्यवासिनी माता॥
विंध्याचल की धरती पर, तेरे चरण जो बसे।
गंगा‑तीर की शांति से, जीवन में ज्ञान भरे।
जय विंध्यवासिनी माता…
कमलासन सजी अवतार, करुणा अम्बु तुम्हारी।
भक्तों की हृदय‑पीड़ा हरि, दया कर के दूर जारी।
जय विंध्यवासिनी माता…
त्रिशूल धारण, तेजोमयी रूप, अमोघ संकट हरानी।
जो तेरा नाम ले ले जो, पावें जीवन में दिव्य पानी।
जय विंध्यवासिनी माता…
नवरात्रि के पावन दिन, भक्तों की भीड़ भारी।
जो तेरे चरणों में शीश झुके, पावे सुख समृद्धि सारी।
जय विंध्यवासिनी माता…
तेरे ही भजन, तेरी आरती, मिटावें अज्ञान की धूल।
तू दान दे विवेक, कर दे जीवन को सफल और फूल।
जय विंध्यवासिनी माता…
जो भी करे तुझमें शरण, मिले उसे कल्याण।
माँ की कृपा से सब प्राप्त, जीवन में प्रकाश महान।
जय विंध्यवासिनी माता…
गंगा के तट का जो धाम, विंध्याचल का जो नमन।
भक्तों का अश्रु सुख दे दे, तू बने जीवन का धन।
जय विंध्यवासिनी माता, जय जय विंध्यवासिनी माता।