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विंध्यवासिनी माता आरती | Vindhyavasini (Vindhyachal) Aarti

Aarti Goddesses Aarti Shakti Peeth ( शक्ति‑पीठ )
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परिचय

विंध्यवासिनी माता का प्रमुख मंदिर विंध्याचल‑सहित उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले के निकट स्थित है और यह स्थान हिन्दू श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत पूज्य माना जाता है। परंपरा के अनुसार इसे शक्तिशाली देवी का स्थान माना जाता है जो भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करने वाली और संकट निवारण करने वाली माता हैं। विंध्याचल की पहाड़ियों और गंगे के समीप स्थित इस धाम का विशेष महत्व नवरात्रि के दौरान बढ़ जाता है जब दूर-दूर से श्रद्धालु माँ के दर्शन और आराधना के लिए आते हैं। यहाँ की आरती और भजन‑परंपरा भक्तों में श्रद्धा, पवित्रता और आध्यात्मिक अनुभूति जगाती है।

विंध्यवासिनी माता आरती | Vindhyavasini (Vindhyachal) Aarti

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॥ आरती — विंध्यवासिनी माता ॥

जय विंध्यवासिनी माता, जय जय विंध्यवासिनी माता।
भक्तन के सुख दाता, संकट हरने वाली माता।
जय विंध्यवासिनी माता, जय जय विंध्यवासिनी माता॥

विंध्याचल की धरती पर, तेरे चरण जो बसे।
गंगा‑तीर की शांति से, जीवन में ज्ञान भरे।
जय विंध्यवासिनी माता…

कमलासन सजी अवतार, करुणा अम्बु तुम्हारी।
भक्तों की हृदय‑पीड़ा हरि, दया कर के दूर जारी।
जय विंध्यवासिनी माता…

त्रिशूल धारण, तेजोमयी रूप, अमोघ संकट हरानी।
जो तेरा नाम ले ले जो, पावें जीवन में दिव्य पानी।
जय विंध्यवासिनी माता…

नवरात्रि के पावन दिन, भक्तों की भीड़ भारी।
जो तेरे चरणों में शीश झुके, पावे सुख समृद्धि सारी।
जय विंध्यवासिनी माता…

तेरे ही भजन, तेरी आरती, मिटावें अज्ञान की धूल।
तू दान दे विवेक, कर दे जीवन को सफल और फूल।
जय विंध्यवासिनी माता…

जो भी करे तुझमें शरण, मिले उसे कल्याण।
माँ की कृपा से सब प्राप्त, जीवन में प्रकाश महान।
जय विंध्यवासिनी माता…

गंगा के तट का जो धाम, विंध्याचल का जो नमन।
भक्तों का अश्रु सुख दे दे, तू बने जीवन का धन।
जय विंध्यवासिनी माता, जय जय विंध्यवासिनी माता।