परिचय
स्रीशैलम / ब्रह्मराम्बा आरती | Srisailam / Bhramarambha Aarti
॥ आरती — ब्रह्मराम्बा माता (स्रीशैलम) ॥
जय ब्रह्मराम्बा माता, जय जय महादेवी माता।
शक्ति स्वरूपा जगनाथा, करुणा की मूरत न्यारी माता॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥
मल्लिकार्जुन संग तेरी, धाम स्रीशैलम पुनीत।
ज्योतिर्लिंग शिव‑रूप के साथ, त्रिनयान का अनंत रीत॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥
कमलासन सजा चरण तेर, तेजोमयी रूप विभो।
भक्त जनों के हृदय में बसे, करुणा का अमर भो।॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥
नवदुर्गा की ты शक्तिरूप, संकट हरने वाली।
जो तेरी शरण में आवे, पावें जीवन सफल रवानी।॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥
गंगा समान पवित्र धारा, नल्लमाला की छाव।
तेरे धाम की जो आरती गावे, मिलता भक्त को नव उत्थान।॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥
देवी! दीनों के दाता तू, भूख और भय मिटावे।
मनोकामना पूरी करे, कृपा से जीवन संवारे।॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥
त्रिशूल‑शक्ति नयन तेज, करुणा का तू भण्डार।
तेरे नाम से त्राण है मिल, तेरे होने से गृह संसार।॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥
नवरात्रि में तेरा प्रकाश, भक्तों का मन भरे शांति।
जो तेरी आरती मन से गावे, पावें माता की दयालु छाँती।॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥
माँ! चरणों में नमन मेरा, करुणा कर दया करो।
भवसागर से उबार दो हमें, अपना आशीष दे दो।॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥
जय ब्रह्मराम्बा माता, जय महाशक्ति जय जय।
शरणागत भव भक्तों को, देना कृपा‑दिव्य प्रसन्नता जय।॥ जय ब्रह्मराम्बा माता ॥