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कलिघाट काली आरती — Kalighat Kali Aarti

Aarti Goddesses Aarti Shakti Peeth ( शक्ति‑पीठ )
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परिचय

कलिघाट काली आरती मां काली को समर्पित है, जो कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर में पूजी जाती हैं। यह मंदिर शाक्त परंपरा में एक महत्त्वपूर्ण शक्ति‑पीठ माना जाता है — पारंपरिक कथा के अनुसार यहां माता सती का एक अंग (कहा जाता है, दाहिने पैर का अंगूठा) गिरा था, इसलिए यह 51 शक्ति‑पीठों से जुड़ा माना जाता है। कालीघाट माँ को शक्ति, संकट विनाश और भक्तों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है; यहाँ की आरती और अनुष्ठान श्रद्धालुओं में विशेष श्रद्धा और भक्ति जागृत करते हैं। आरती के समय लाल वस्त्र, दीप, पुष्प और तांबे/पीतल के पात्रों का प्रयोग पारम्परिक है — तथा आरती के शब्दों में माता की स्तुति और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना निहित रहती है।

कलिघाट काली आरती — Kalighat Kali Aarti

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कलिघाट काली आरती (Kalighat Kali Aarti) 

॥ आरती — कलिघाट काली माता ॥

जय काली माता, जय जय काली माता।
जय करुणा की मूरत, जय भयहरिणी माता।
जय काली माता, जय जय काली माता।

सिंहासन शोभित तेरा, नीलो भेस विशाल।
त्रिशूल धारी करुणामयी, रूप अनन्त निराला।
जय काली माता…

लाल वस्त्र आभूषण, जटा जटाधर श्यामा।
अग्नि समान तेज तुम्हारा, संकट हरने वाली amma।
जय काली माता…

नागेंद्र मुद्रा में जो, संकट सब हरावे।
भक्त जन की पीड़ा सुने, हृदय से दया बरसावे।
जय काली माता…

कालीघाट की पावन धरा, जहाँ तेरे चरण धरे।
संकट सब मिटत जाएँ, सुख समृद्धि को सहारे।
जय काली माता…

अंधकार का नाश करने, तुम छाई जग में भोर।
तुम्हारी आरती जो गावे, पाप विनाशक हो पर।
जय काली माता…

भक्त लाजोदि चरण कंधे, माँ अनंत कृपा कर।
जीवन की हर समस्या को, हाथों से तू टार।
जय काली माता…

जय काली माता, जय जय काली माता।
जय काली माता, जय जय काली माता।