परिचय
कलिघाट काली आरती — Kalighat Kali Aarti
कलिघाट काली आरती (Kalighat Kali Aarti)
॥ आरती — कलिघाट काली माता ॥
जय काली माता, जय जय काली माता।
जय करुणा की मूरत, जय भयहरिणी माता।
जय काली माता, जय जय काली माता।
सिंहासन शोभित तेरा, नीलो भेस विशाल।
त्रिशूल धारी करुणामयी, रूप अनन्त निराला।
जय काली माता…
लाल वस्त्र आभूषण, जटा जटाधर श्यामा।
अग्नि समान तेज तुम्हारा, संकट हरने वाली amma।
जय काली माता…
नागेंद्र मुद्रा में जो, संकट सब हरावे।
भक्त जन की पीड़ा सुने, हृदय से दया बरसावे।
जय काली माता…
कालीघाट की पावन धरा, जहाँ तेरे चरण धरे।
संकट सब मिटत जाएँ, सुख समृद्धि को सहारे।
जय काली माता…
अंधकार का नाश करने, तुम छाई जग में भोर।
तुम्हारी आरती जो गावे, पाप विनाशक हो पर।
जय काली माता…
भक्त लाजोदि चरण कंधे, माँ अनंत कृपा कर।
जीवन की हर समस्या को, हाथों से तू टार।
जय काली माता…
जय काली माता, जय जय काली माता।
जय काली माता, जय जय काली माता।