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ज्वालामुखी आरती | Jwalamukhi (Jwala) Aarti

Aarti Goddesses Aarti Shakti Peeth ( शक्ति‑पीठ )
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परिचय

ज्वालामुखी (जवाला जी) का प्रसिद्ध मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है और शाक्त परंपरा में इसे एक महत्वपूर्ण शक्ति‑पीठ माना जाता है। लोकमान्य परंपरा के अनुसार यहाँ माता सती का एक अंग (प्रायः जीभ/जुबान) गिरा था, इसलिए यह शक्ति‑पीठों में गिना जाता है। इस मंदिर की सबसे विशिष्ट विशेषता प्राकृतिक अनल (स्थायी लौ) है जो चट्टान से फूटती है — इन्हीं ज्वालाओं के कारण माता को 'ज्वाला देवी' कहा जाता है। भक्त यहाँ दर्द और संकट दूर करने, मनोकामना की सिद्धि और माता की अनुकम्पा पाने हेतु आते हैं। आरती के समय ज्वाला‑दीप को विशेष श्रद्धा से अर्पित किया जाता है; लाल वस्त्र, फूल और स्थानीय प्रसाद आम हैं। ज्वालामुखी की आरती में अक्सर माँ की आग‑रूप शक्ति, भक्ति‑समर्पण और संकट‑निवारण का स्वर मुखर होता है।

ज्वालामुखी आरती | Jwalamukhi (Jwala) Aarti

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॥ आरती — ज्वालामुखी माता (ज्वाला जी) ॥

जय ज्वाला माता, जय जय ज्वाला माता।
अनल रूपा परब्रह्मा, तू दयालु दया सघाता।
जय ज्वाला माता, जय जय ज्वाला माता॥

तेरी ज्वालाएँ चट्टान से, अनंत प्रकाश फैलाएँ।
भक्तों के दुःख और भय सब, तुरन्त ही हराएँ।
जय ज्वाला माता…

ज्योतिर्मयी, अद्भुत आलोक, संकट हरने वाली।
अश्रु सुखाकर जीवन में, आशीष सदा लाली।
जय ज्वाला माता…

जो भी तेरे चरणों में आता, दीन दुःख उसका मिटे।
मनोकामना सिद्ध करे तू, प्रेम से सबको सीने।
जय ज्वाला माता…

त्रिशूल धारिणी, तेज प्रतापिनी, करुणा अनूपा भारी।
भक्तों के प्राण रक्षा कर, बन जा जीवन की डोरी।
जय ज्वाला माता…

ज्वालामुखी के धाम में जहाँ, लौ अमर जग में चमके।
जो तेरा नाम ले या आरती गावे, पापों के पातल दमके।
जय ज्वाला माता…

माँ अनन्त, माँ अपरंपार, कृपा कर दया बरसाओ।
भक्तों की पीड़ा हरि दे, अभय का वर दान दो।
जय ज्वाला माता, जय जय ज्वाला माता।