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गौ माता की आरती (Gau Mata ki Aarti )

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परिचय

श्री गौमाताजी की आरती गोभक्ति और गौ‑सेवा की महिमा का सरल, लेकिन संपूर्ण स्तुतिगान है। इसमें गाय को माता रूप में पूजने, उसकी दया‑दृष्टि से लोककल्याण और पारिवारिक समृद्धि की प्रार्थना की जाती है; यह आरती गाय के दूध‑दत्त स्वास्थ्य, धर्म और समृद्धि देने वाले स्वरूप को उजागर करती है। पारंपरिक भक्ति‑परंपरा में इसे गायपूजन, गोवंदना और घर‑मन्दिरों में श्रद्धा‑भाव से गाया जाता है — भक्तों में करुणा, स्नेह और आध्यात्मिक संरक्षण की अनुभूति जगाने वाली आरती है।

गौ माता की आरती (Gau Mata ki Aarti )

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॥ आरती — श्री गौमाताजी की ॥
आरती श्री गैय्या मैंय्या की, आरती हरनि विश्व धैय्या की।
आरती श्री गैय्या मैंय्या की...।

अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी, अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी।
सुर‑मानव सौभाग्या विधायिनी, प्यारी पूज्य नन्द छैय्या की॥
आरती श्री गैय्या मैंय्या की...।

अखिल विश्व प्रतिपालिनी माता, मधुर अमिय दुग्धान्न प्रदाता।
रोग शोक संकट परित्राता, भवसागर हित दृढ नैय्या की॥
आरती श्री गैय्या मैंय्या की...।

आयु ओज आरोग्य विकाशिनी, दुःख दैन्य दारिद्रय विनाशिनी।
सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनी, विमल विवेक बुद्धि दैय्या की॥
आरती श्री गैय्या मैंय्या की...।

सेवक हो चाहे दुखदाई, सम पय सुधा पियावति माई।
शत्रु‑मित्र सबको सुखदायी, स्नेह स्वभाव विश्व जईय्या की॥
आरती श्री गैय्या मैंय्या की...।

आरती श्री गैय्या मैंय्या की, आरती हरनि विश्व धैय्या की।
आरती श्री गैय्या मैंय्या की...।