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वैष्णो देवी आरती - त्रिकुटा पर्वत की अधिष्ठात्री की वंदना

माँ वैष्णो देवी की आरती श्रद्धा, विश्वास और मनोकामना पूर्ति की प्रतीक है। इस आरती से भक्तों को साहस, सुरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। माता की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

Aarti Goddesses Aarti Shakti Peeth ( शक्ति‑पीठ )
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परिचय

श्री वैष्णो देवी की आरती माता वैष्णो/वैष्णवी की महिमा, उनके गुफा‑मंदिर की पवित्रता और तीर्थयात्रियों की अटूट आस्था का संक्षिप्त एवं भावनात्मक स्तुतिपाठ है। यह आरती माता की करुणा, सुरक्षा और मनोकामना‑सिद्धि का स्मरण कराती है; श्रद्धा‑भाव से पढ़ने या गाने पर भक्तों को आश्वासन, शांति और आध्यात्मिक ऊष्मा का अनुभव होता है। यात्रा, भेंट‑प्रसाद और दर्शन के साथ जुड़ा यह पाठ तीर्थयात्रियों के हृदय में माता के प्रति भक्ति और निष्ठा को दृढ़ करता है।

वैष्णोदेवी जी की आरती (Aarti of Vaishno Devi)

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॥ आरती — श्री वैष्णो देवी ॥
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।
हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥
जय वैष्णवी माता॥

शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी।
गंगा बहती चरणन, ज्योति जगे न्यारी॥
जय वैष्णवी माता॥

ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे।
सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥
जय वैष्णवी माता॥

सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे।
बार‑बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥
जय वैष्णवी माता॥

भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे।
ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥
जय वैष्णवी माता॥

पान सुपारी, ध्वजा, नारियल, भेंट पुष्प मेवा।
दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥
जय वैष्णवी माता॥

जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे।
उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥
जय वैष्णवी माता॥

इतनी स्तुति निश‑दिन, जो नर भी गावे।
कहते सेवक ध्यानू, सुख‑सम्पत्ति पावे॥
जय वैष्णवी माता॥