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श्री केदारनाथ आरती | Shree Kedarnath Aarti

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परिचय

श्री केदारनाथ जी महादेव के ज्योतिर्मय रूप के प्राचीन और प्रमुख तीर्थों में से एक हैं। केदारनाथ हिमालय के उदार और अनाहत स्वरूप—शिव के कठोर, परम करुणामयी रूप—के प्रतीक हैं। केदारनाथ की आरती श्रद्धा, ध्यान और भक्ति से पढ़ने पर मन को शान्ति, पापनाश और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव कराती है। आरती करते समय दीप, पुष्प और धूप अर्पित करें; मन में महादेव का स्मरण रखें और यदि संभव हो तो “ॐ नमः शिवाय” का संकल्प लें। नीचे आरती को पढ़ने‑योग्य रूप में दे रहा/रही हूँ — श्रद्धा और भक्ति के साथ पढ़िए या गायिए।

श्री केदारनाथ आरती | Shree Kedarnath Aarti

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॥ श्री केदारनाथ आरती ॥

जय केदार उदार शंकर, मन भयंकर दुःख हरम।
गौरी गणपति स्कन्द नन्दी, श्री केदार नमाम्यहम॥

शैल सुन्दर अति हिमालय, शुभ मन्दिर सुन्दरम।
निकट मन्दाकिनी सरस्वती, जय केदार नमाम्यहम॥

उदक कुण्ड है अधम पावन, रेतस कुण्ड मनोहरम।
हंस कुण्ड समीप सुन्दर, जय केदार नमाम्यहम॥

अन्नपूर्णा सह अर्पणा, काल भैरव शोभितम।
पंच पाण्डव द्रोपदी सह, जय केदार नमाम्यहम॥

शिव दिगम्बर भस्मधारी, अर्द्ध चन्द्र विभूषितम।
शीश गंगा कण्ठ फिणिपति, जय केदार नमाम्यहम॥

कर त्रिशूल विशाल डमरू, ज्ञान गान विशारदम।
मझहेश्वर तुंग ईश्वर, रुद्र कल्प महेश्वरम॥

पंच धन्य विशाल आलय, जय केदार नमाम्यहम।
नाथ पावन हे विशालम, पुण्यप्रद हर दर्शनम॥

जय केदार उदार शंकर, पाप ताप नमाम्यहम॥